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Lakes on Mars: राडार संकेतों ने कैसे गहराया लाल ग्रह पर पानी का रहस्य

मंगल ग्रह (Mars) के दक्षिणी ध्रुव पर ऐसे संकेत मिले हैं जो बताते हैं की वहां सतह के नीचे पानी की झीलें हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

Lakes on Mars: पुराने अध्ययन को आगे बढ़ाने पर वैज्ञानिकों को राडार संकेतों (Radar Signals) से पता चला है कि ग्रह के दक्षिणी ध्रुव (South Pole on Mars) की सतह के नीचे झीलें हैं.

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    मंगल ग्रह (Mars) पर हमारे वैज्ञानिक जीवन की ही खोज नहीं कर रहे हैं. वे उन संभावनाओं की भी तलाश रहे हैं जो लाल ग्रह को जीवन के अनुकूल बना सके. इसमें सबसे प्रमुख कारकों में से एक है मंगल पर तरल पानी (Liquid Water on Mars) की मौजूदगी. अभी तक यह तो तय हो चुका है कि मंगल के कुछ इलाकों में पानी बर्फ के रूप में मौजूद है. मंगल पर कुल पानी कितना है इस पर बहस चल रही थी, लेकिन नए शोध में ऐसे और ज्यादा संकेत मिले जो बताते हैं कि मंगल के दक्षिणी ध्रुव की सतह के नीचे तरल पानी की झीलें (Lakes on Mars) हैं.

    राडार ने दिए तरल पानी के संकेत
    इस खोज ने वैज्ञानिकों को मंगल पर तरल पानी की मौजूदगी को लेकर पुष्टि करने के एक कदम और करीब ला दिया है. राडार संकेतों के किए विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि बहुत सारी झीलें ऐसे इलाके में हैं जो तरल पानी के लिहाज से बहुत ही ठंडे हैं. इस अध्ययन ने साल 2018 के अध्ययन को आगे बढ़ाया जिसमें राडार के उपकरण से निकली तरंगे लाल ग्रह के दक्षिणी ध्रुव से इस तरह से प्रतिबिंबित हुई थीं जिससे वहां सतह के नीचे तरस पानी की झील होने के संकेत मिले थे.

    पहले भी मिले थे ऐसे रही संकेत
    जियोलॉजिकल रिसर्च लैटर्स में प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया है कि मगंल ग्रह के दक्षिणी ध्रुव में बहुत से ऐसे इलाके हैं जहां ऊर्जा सतह की तुलना में उसके नीचे से अप्रत्याशित रूप से अधिक मात्रा में प्रतिबिंबित हो रही है. शोधपत्र में बताया गया है कि इस जगह के एक इलाके के पिछले विश्लेषण ने सुझाया था कि ये तेज प्रतिबिंब सतह के नीचे झीलों की वजह से हो रहे होंगे.

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    मंगल (Mars) पर पहले भी राडार संकेतों से इसी तरह का बर्ताव मिला था. (Photo Credit-NASA)


    किसने किया अध्ययन
    नासा के जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी के शोधकर्ता आदित्य आर खुल्लर और जेफरी जे प्लॉट की अगुआई में इस शोध में यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर से भेजे गए राडार संकेतों के मंगल पर भेज कर उनका अध्ययन किया गया. पहले ये संकेत दक्षिणी ध्रुव की परत निक्षेप इलाके में पाए गए थे जिसमें बर्फ, जमी हुई कार्बन डाइऑक्साइड और लाखों सालों से जमी धूल की परतें हैं.

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    तरंगों का कमजोर होकर लौटना
    वैज्ञानिकों ने ऑर्बिटर के मार्स एडवांस्ड राडार फॉर सबसर्फेस एंड आयनोस्फियरिक साउंडिंग (MARSIS) उपकरण से रोडियो तरंगे भेजीं जो सतहके नीचे की परतों का नक्शा बनाने में मदद करती हैं. रेडियो तरंगे प्रसारण के बाद जब सतह के नीचे से गुजरती हैं तो ऊर्जा खोने लगती हैं और कमजोर होकर अंतरिक्ष यान तक लौटती हैं. लेकिन कई बार लौटने वाली तरंगें सतह से लौटने वाली तरंगों से ज्यादा चमकदार होती हैं.

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    मंगल (Moon) पर तापमान इतना कम होता है कि ऐसे हालात मे तरल पानी का होना बहुत मुश्किल है. फोटो सौ. (NASA)


    और यह अवलोकन भी
    वैज्ञानिकों ने इस तथ्य से यह निष्कर्ष निकाला है कि सतह के नीचे तरल पानी होना चाहिए जो बहुत ताकतवर रेडियो तरंगे प्रतिबिंबित करता है. दोनों शोधकर्ताओं ने 15 साल से ज्यादा के आंकड़ों का अध्ययन किया जो मार्सिस उपकरण से लिए जो अंतरिक्ष यान में लगा हुआ है. इससे उन्होंने पाया कि चमकीली प्रतिबिंबित तरंगें. पहले जितना पाया गया था उससे कहीं ज्यादा फैले इलाके से आ रही हैं.

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    विश्लेषण से पता चला है कि कुछ जगहों पर सतह से एक मील से भी कम की गहराई से चमकीली तरंगें लौटी है जिनका तापमान -63 डिग्री सेल्सियस तक है. ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि इतने कम तापमान में पानी तरल कैसे बना रह सकता है. बहराल, शोधकर्ताओं को इन अवलोकनों से मंगल की जलवायु के इतिहास के बारे में भी काफी जानकारी मिली है.

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