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Lal Bahadur Shastri Birthday: विनम्रता और सादगी की मिसाल थे शास्त्रीजी

Lal Bahadur Shastri Birthday: विनम्रता और सादगी की मिसाल थे शास्त्रीजी

लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) जीवन भर एक सच्चे गांधीवादी बने रहे. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) जीवन भर एक सच्चे गांधीवादी बने रहे. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) ने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद भी अपने जीवन के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया.

    आज भारत के दूसरे प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री (Second Prime Minister of India) लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) का जन्मदिन है. महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के साथ अपने जन्मदिन साझा करने वाले शास्त्री पक्के गांधीवादी थे और जीवन भर उन्ही के सिद्धांतों पर चलते रहे. यहां तक भारत के प्रधानमंत्री जैसा पद हासिल करने के बाद भी उन्होंने कभी भी अपने सादगी और विनम्रता नहीं छोड़ी. उनके जीवन में ऐसे बहुत से किस्से सुनने को मिलते हैं  जब उन्होंने साबित किया कि वे एक सच्चे देशभक्त और गांधीवादी थे. उनका पूरा जीवन आज के युवाओं से लेकर सभी लोगों के ले एक मिसाल है.

    लाल बहादुर शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में 2 अक्टूबर 1904 को एक भोजपुरी हिंदू कायस्थ परिवार में हुआ था. बचपन में ही उनके पिता का देहांत हो गया था जिसके बाद वे ननिहाल में पले बढ़े. उनका मूल  नाम लाल बहादुर वर्मा था, लेकिन  वाराणसी के काशी विद्यापीठ से स्नातक होने के बाद उनके नाम में शास्त्री जुड़ गया है वे लाल बहादुर शास्त्री कहलाने लगे.

     देश के एक अहम नेता बने शास्त्री
    शास्त्री का जीवन ना केवल सादगी भरा रहा, वे हमेशा प्रचार प्रसार से दूर ही रहे. आजादी के आंदोलन में भी उनकी प्रमुख भूमिका थी और आजादी के बाद भी वे भारत के प्रमुख नीति निर्मातोँ में शामिल रहे. वे देश पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट का हिस्सा रहे और उन्होंने रेलवे और गृह जैसे बड़े और महकमे संभाले और नेहरू के विश्वस्त बने रहे. नेहरू के निधन के बाद शास्त्री जून 1964 में देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने.

    ऐसे करते अपने वेतन को खर्च
    शास्त्री जी अपने वेतन का काफी हिस्सा गांधीवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने और सामाजिक भलाई में खर्च किया करते थे. यही वजह थी कि उन्हें घर की जरूरतों के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. वे इतने विनम्र थे कि जब भी उनके खाते में तनख्वाह आती थी, तब वे उसे लेकर गन्ने का रस बेचने वाले के पास जाते. शास्त्री जी शान से कहते थे कि आज जेब भरी हुई है. जिसके बाद दोनों जूस वाले के साथ ही गन्ने का रस पीते.

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    लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) गांधी जी के करीब होने के बाद भी लाइमलाइट से दूर ही रहे. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    अपने बेटे का प्रमोशन रुकवाया
    शास्त्रीजी अपनी ईमानदारी के लिए मशहूर थे. उन्होंने अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक समिति बनाई थी. भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल पर उन्होंने अपने बेटेके मामले में भी भेदभाव नहीं किया. जब उन्हें पता चला कि उनके बेटे को गलत तरीके से प्रमोशन मिल रहा है. उन्होंने अपने बेटे की ही प्रमोशन रुकवा दी.

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    मिसाल देने में सबसे आगे रहे शास्त्रीजी
    शास्त्रीजी की वजह से भारत में सफेद और हरित क्रांति आई. वो हरित आंदोलन के चलते ही उन्होंने अपने घर के लॉन में खेती-बाड़ी शुरू कर दी थी. इसलिए वो किसानों को हरित क्रांति से जोड़ने के लिए खुद अपने लॉन में कृषि कार्य किया करते थे. इतना ही नहीं कार खरीदने के लिए उन्होंने आम लोगें की ही तरह पंजाब नेशनल बैंक से लोन लिया. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जो सुविधा उन्हें मिल रही है उतनी ही आम लोगों को भी मिलनी चाहिए.

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    अपनी सादी जीवनचर्चा को लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) ने प्रधानमंत्री बनने के बाद भी कायम रखा और कार खरीदने के लिए लोन लिया. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    क्यों लिया लोन
    शास्त्री जी खुद कार की जरूरत महसूस नहीं करते थे. सामाजिक कार्यों के खर्चों की वजह से घर में पैसों की किल्लत भी रहती ही थी. प्रधानमंत्री बनने तक उनके पास घर और कार दोनों नहीं थे. घरवालों के कहने पर उन्होंने कार खरीदने के लिए जब अपने बैंक खाते की जानकारी गंवाई तो उन्होंने पता चला कि खाते में केवल 7 हजार हैं जबकि कार 12 हजार की है. वे 5 हजार का बंदोबस्त कर सकते थे, फिर भी उन्होंने लोन लेने का फैसला किया.

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    लोन चुकाने से पहले ही शास्त्रीजी इस दुनिया से विदा हो गए. उनका लोन माफ करने की पेशकश को उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने ठुकरा दिया और वे चार साल तक कार की किस्तें चुकाती रहीं. शास्त्री ने हमेशा अपने कर्मों के तरजीह दी वे हमेशा पद के फेर में कभी नहीं रहे. वे पहले रेल मंत्री थे जिन्होंने रेल दुर्घटना होने पर उसकी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था जो एक मिसाल मानी जाती है.

    Tags: India, Lal Bahadur Shastri, Research

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