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Lala Lajpat Rai Death Anniversary: जब लाठीचार्ज से हुई मौत से हिल गया था देश

Lala Lajpat Rai Death Anniversary: जब लाठीचार्ज से हुई मौत से हिल गया था देश

लाला लाजपतराय (Lala Lajpat Rai) की मौत साइमन कमीशन के विरोध करते समय हुए लाठीचार्ज में घायल होने की वजह से हुई. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

लाला लाजपतराय (Lala Lajpat Rai) की मौत साइमन कमीशन के विरोध करते समय हुए लाठीचार्ज में घायल होने की वजह से हुई. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

Lala Lajpat Rai Death Anniversary: लाला लाजपत राय 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Freedom Movement) के प्रमुख नेताओं में से एक थे. लाला जी पंजाब (Punjab) के साथ ही पूरे देश में एक ओजस्वी, वक्ता, लेखक, इतिहासकार, संपादक, समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थे. लाल बाल पाल की जोड़ी के लाल कांग्रेस के अंदर गरम दल के ओजस्वी नेता के रूप में काम करते रहे. उन्हें उनके स्वदेशी आंदोलन में योगदान और शिक्षा के प्रसार के लिए ज्यादा जाना जाता है. एक समाज सुधारक के तौर पर वे दयानंद स्वरस्ती के आर्य समाज से भी जुड़े और दलितों के वेद पढ़ने की इजाजत देने की भी पैरवी की.

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    लाला लाजपतराय (Lala Lajpat Rai) का नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक विशिष्ट स्थान रखता है. एक राजनेता, इतिहासकार, वकील और लेखक रहे लालाजी को पंजाब केसरी के नाम से जाना था जो अपने समय की मशहूर तिकड़ी लाल बाल पाल के लाला ने जीते जी तो स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया ही, उनकी मौत ने भी देश के युवाओं में आजादी की लड़ाई के लिए प्रेरित करने का काम किया. 17 नवंबर को देश उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद कर रहा है. उनकी मौत 1928 में साइमन कमीशन के शांतिपूर्वक विरोध के दौरान हुए लाठीचार्ज से मिली चोटों के कारण हुई जिससे देशभर में अंग्रेजों के खिलाफ आक्रोश भर गया था.

    वकालत के दौरान आर्य समाज और कांग्रेस संपर्क
    लाला राजपत राय का जन्म पंजाब के मोगा जिले में 28 जनवरी 1865 को अग्रवाल परिवरा में हुआ था. उनके पिता मुंशी राधाकृष्ण आजाद उर्दू के शिक्षक थे 1880 में ही उन्होंने कलकत्ता और पंजाब यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा पास की. उनके पिता जब हिसार में रहने गए तब उनकी कानून पढ़ाई शुरू हुई. इसी दौरान वे आर्यसमाज के सम्पर्क में आए और फिर 1885 में कांग्रेस की स्थापना के समय वे उसके प्रमुख सदस्य बने.

    समाज सुधारक और शिक्षाविद
    लाला लाजपत राय एक समाज सुधार भी थे जिन्होंने शिक्षा के लिए विशेष कार्य भी किए थे. समाज सेवा के लिए  दयानंद सरस्वती से जुड़े जिन्होंने आर्य समाज की स्थापना की थी.  उन्होंने पंजाब में  आर्य समाज की स्थापना में अहम भूमिका निभाई.  देश को पहला स्वदेशी  बैंक लाला जी ने ही दिया था. उन्होंने ही पंजाब में पंजाब नेशनल बैंक की नींव रखी थी. उन्होंने दयानंद एंग्लो वैदिक विद्यालयों का भी प्रसार किया जो आज देश भर मे डीएवी स्कूलों के नाम से जाने जाते हैं.

    साइमन कमीशन का विरोध
    साल 1927 में अंग्रेजों ने साइमन कमीशन भारत में  वैधानिक सुधार के लिए भेजागया. इसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था जिसकी वजह से कांग्रेस सहित पूरे देश ने विरोध किया. गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस ने पूरे देश में शांतिपूर्ण विरोध करने का फैसला किया. इसमें कांग्रेस के साइमन गो बैक का नारा देश भर में गूंज उठा. लाला जी ने पंजाब में इस विरोध प्रदर्शन का जिम्मा उठाया.

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    लाला लाजपतराय (Lala Lajpat Rai) कांग्रेस की मशहूर तिकड़ी लाल बाल पाल का हिस्सा थे. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    लाहौर में लालाजी पर लाठी चार्ज
    पंजाब के लाहौर में लाला लाजपत राय ने इस कमीशन का विरोध किया और कमीशन को काले झंडे दिखाते  हुए शांतिपूर्वक विरोध जताया. इससे बौखलाकर अंग्रेज पुलिस ने विरोध कर रही भीड़ पर लाठी चार्ज कर दिया जिसका नेतृत्व लाला लाजपत राय कर रहे थे. एसपी जेम्स ए स्कॉट के नेतृत्व में हुए इस लाठीचार्ज में लाला जी गंभीर रूप से घायल हो गए.

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    लालाजी की वह भविष्यवाणी
    जख्मी लालाजी ने घायल होने के बाद कहा था कि उनके शरीर पर पड़ी एक एक लाठी ब्रिटिश राज के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी. इसके बाद लाला जी 18 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ते रहे और 17 नवंबर 1928 को उनका देहांत  हो गया. लाला जी की मौत से पूरे देश में आक्रोश फैल गया.

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    लाला लाजपतराय (Lala Lajpat Rai) एक बैंकर, शिक्षाविद और समाज सुधारक के रूप में भी जाने जाते थे. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    भगत सिंह और साथियों का बदला
    लाला जी की मौत के बाद  भगत सिंह, सुखदेव राजगुरू और चंद्रशेखर आजाद ने मिलकर ने लालाजी की मौत का बदला लेने के लिए स्कॉट की हत्या की योजना बनाई. लेकिन पहचान में गलती होने के कारण भगत सिंह, और राजगुरू ने जॉन पी सॉन्डर्स को गोली मार दी जो उस समय लाहौर का एसपी था. दोनों ने 17 दिसंबर 1928 को उसे तब गोली मारी जब वह लाहौर का जिला पुलिस हेडक्वार्टर से बाहर निकल रहा था. जबकि आजाद ने उनकी भागने में मदद की.

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    लाला लाजपत राय अपने ओजस्वी वाणी के कारण  पंजाब की आवाज बन चुके थे. पंजाब में लोग उन्हें बहुत मानते थे. यही वजह थी उनकी मौत का बदला भगत सिंह और उनके साथी क्रांतिकारियों ने लेने का फैसला किया था. उनके इसी मान के कारण उन्हें पंजाब केसरी कहा जाता था.  उनके सम्मान में देश और पंजाब में कई जगह स्कूल और अन्य शिक्षण संस्थान हैं.

    Tags: Freedom fighters, Freedom Movement, History, India

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