अपने ‘उपग्रह’ से गैस छीनकर पनपती हैं विशाल गैलेक्सी, शोध ने बताया कैसे

एक विशाल गैलेक्सी (Large Galaxy) अपने पास की उपग्रह गैलेक्सी (Stellate Galaxy) और उसके बीच में स्थित आणविक गैसों को खींच लेती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

एक विशाल गैलेक्सी (Large Galaxy) अपने पास की उपग्रह गैलेक्सी (Stellate Galaxy) और उसके बीच में स्थित आणविक गैसों को खींच लेती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 7:39 PM IST
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जिस तरह एक ग्रह (Planets) के उपग्रह हो सकते हैं. उसी तरह से एक विशाल गैलेक्सी (Large Galaxy) की उपग्रह गैलेक्सी (Satellite Galaxy) भी होती हैं. गैलेक्सी और उनकी उपग्रह गैलेक्सी के बारे में हाल ही में हुए एक अध्ययन में एक अनोखी बात सामने आई है. पता चला है कि विशाल गैलेक्सी अपनी उपग्रह गैलेक्सी और उनके बीच के हिस्से से आणविक गैस (Molecular Gases) खींचती हैं जो उनमें तारों के निर्माण (Star Formation) में काम आती है.

सिम्यूलेशन ने दिखाई राह
इंटनेशनल सेंटर फॉर रेडो एस्ट्रोनी रिसर्च (ICRAR) के खगोलविदों ने पास की विशालकाय गैलेक्सी के आणविक गैसों का अध्ययन किया. यह अध्ययन उन्होंने एक कॉस्मोलॉजिकल सिम्यूलेशन में किया. इस शोध के दौरान उनका विशेष ध्यान गैलेक्सी के वातावरण पर था.

आणविक गैस के बारे में तो पता था
ICRAR के एस्ट्रोफिजिसिस्ट डॉ एडम्स स्टीवन्स ने बताया कि उनका अध्ययन इस बात के नए व्यवस्थित प्रमाण देता है कि छोटी गैलेक्सी हमेशा ही कुछ मात्रा में आणविक गैस खो देती हैं जब वे किसी विशाल गैलेक्सी या उसके पास के गर्म गैस के हालो के पास आती हैं.



गैस की अहमियत
डॉ स्टीवन्स का मानना है कि गैस गैलेक्सी को जीवन देने वाले रक्त की तरह हैं. लगातार गैस हासिल करते रहने से गैस वृद्धि करती रहती हैं और तारे बनाती रहती हैं. इनके बिना गैलेक्सी निष्क्रिय हो जाती हैं. हम यह तो पहले से ही जानते हैं कि विशाल गैलेक्सी पास के गैलेक्सी के बाहर से परमाणविक गैस तो निकालती हैं, लेकिन अब तक इसका आणविक गैसों के साथ विस्तार से परीक्षण नहीं हुआ था.

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पास के आणविक गैसों (Molecular Gases) पर निर्भर रहती है विशाल गैलोक्सी की वृद्धि. . (तस्वीर: @NASAHubble)


अकेली नहीं रहती कोई गैलेक्सी
डॉ बारबरा कैटिनेलिया जो ICRAR से हैं, ने बताया, “गैलेक्सी अकेले में या एकांत में नहीं रहती हैं. जब गैलेक्सी गैलेक्सी किसी इंटरगैलेक्टिक माध्यम या किसी गैलेक्सी के हालो से होकर गुजरती है, तब उस गैलेक्सी की कुछ ठंडी गैस बाहर निकल जाती है. इस तेजी से होने वाली प्रक्रिया को रैम प्रैशल स्ट्रपिंग कहा जाता है.”

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कैसे किया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने TNG100  कॉसिमोलॉजिकर,हाइड्रोडायनामिक सिम्यूलेशन का उपोयग कर खगोलविदों ने परमआणविक और आणविक गैस की मात्रा का अनुमान लगाया जो प्यूर्टो रिको में एरसिबो टेलीस्कोप और स्पेस में IRA 30 मीटर टेलीस्कोप के खास सर्वे में अवलोकित किए जाने चाहिए. इसके बाद उन्होंने इन अनुमान की टेलीस्कोप से किए गए वास्तविक अवलोकनों से तुलना की और दोनों एक दूसरे को बहुत ही करीब पाया.

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अभी तक आणविक गैसों (Molecular Gases) को लेकर इतना बड़ा अध्ययन नहीं हुआ था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


छोटी गैलेक्सी में धीरे बनते हैं तारे
डॉ केटिनेला ने बताया कि IRAM टेलीस्कोप ने 500 गैलेक्सी से भी ज्यादा में आणविक गैसों की मौजूदगी पाई. यह ब्रह्माण्ड में स्थानीय स्तर पर परमआणविक और आणविक गैस के सबसे विशाल नमूने और सबसे गहरे अवलोकन हैं. इसी लिए यह विश्लेषण के लिए सर्वश्रेष्ठ नमूने थे. इन पड़ताल के नतीजे पिछले प्रमाणओं पर सटीक बैठते हैं और सुझाते हैं कि सैटेलाइट गैलेक्सी में तारों के निर्माण की दर धीमी होती है.

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यह अध्ययन मंथली नोटेसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुआ है. डॉ स्टीवन्स का कहना है कि गैस शुरूमें विशाल गैलेक्सी के बाहर अंतरिक्ष में जाती है और उसके बाद वे गैलेक्सी के पास चली जाती हैं और या तो उनके अंदर ही चली जाती हैं या बाहर लेकिन पास में ही रहती हैं. लेकिन अंत में गैलेक्सी में जाकर उसके केंद्र की ओर बढ़ती हैं.
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