दुनिया के सबसे बड़े Nuclear Fusion प्रोजेक्ट पर काम शुरू, जानिए इसकी अहमियत

दुनिया के सबसे बड़े Nuclear Fusion प्रोजेक्ट पर काम शुरू, जानिए इसकी अहमियत
इस प्रजोक्ट में दुनिया के सभी बड़े देश भागीदारी कर रहे हैं. (फोटो: Iter/Twitter)

दुनिया का सबसे बड़ा नाभकीय संलयन (Nuclear Fusion) प्रोजक्ट का असेंबली का काम शुरू हो गया है. यह दुनिया की ऊर्जा की समस्या (Energy Crisis) को खत्म कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 29, 2020, 11:23 AM IST
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आज जब पूरी दुनिया की ऊर्जा खपत पर निर्भरता बढ़ती ही जा रही है, वहीं उसके सामने ऐसे ऊर्जा स्रोत की आवश्यकता है जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए और उसका उपयोग भी मुश्किल न हो. ऐसे में जब आणविक ऊर्जा (Atomic Energy) पर जब हम एक विकल्प के तौर पर विचार करते हैं तो हमारे पास उसका दोहन नाभकीय विखंडन (Nuclear Fission) और नाभकीय संलयन(Nuclear Fusion) से हो सकता है. अभी तक हम नाभकीय विखंडन का ही नियंत्रित तरीके से उपयोग कर सके हैं, लेकिन उसमें नाभकीय प्रदूषण का खतरा है. दूसरी तरफ नाभकीय संलयन के दोहन को संभव बनाने की दिशा में एक योजना अहम स्तर पर पहुंच गई है.

इस नए प्रजोक्ट से होगा यह मुमकिन
फ्रांस में हाल ही में नाभकीय संलयन के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ है जो इस तरह का दुनिया का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है. आईटर (Iter) नाम के इस प्रोजेक्ट का एसेंबली दौर शुरू हो गया है जो पांच साल में पूरा हो जाएगा जिसके बाद संलयन शक्ति के जरूरी प्लाज्मा बनाने लग जाएगा.

कितना खर्चीला है यह प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट दक्षिण फ्रांस के सेंट पॉल लेज डूरेंस में तैयार हो रहा है जिस पर करीब 23.5 अरब डॉलर खर्च आ रहा है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि संलयन एक अनंत और साफ ऊर्जा का स्रोत है जो जलवायु समस्या को सुलझाने में मददगार साबित होगा. आईटर कई देशों के सहयोग से बन रहा है जिसमें भारत, यूरोपीय यूनियन, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका शामिल हैं. ये सभी देश इस आईटर के निर्माण का खर्चा आपस में मिलकर उठा रहे हैं.





नाभकीय संलयन क्यों
फिलहाल आणविक ऊर्जा के नाम पर केवल नाभकीय विखंडन प्रक्रिया का प्रयोग हो रहा है, जिसमें एक बड़ा रासायनिक तत्व का केंद्र जो हलके रासायनिक तत्वों में टूटता है जिससे प्रचंड ऊर्जा निकलती है. वहीं दूसरी तरफ नाभकीय संलयन में दो हलके तत्वों को मिलाने से एक भारी तत्व बनता है जिससे प्रचंड ऊर्जा निकलती है. नाभकीय विखंडन में खतरनाक रेडियोएक्टिव प्रदूषण होता है जो कि बहुत नुकसानदायक होता है, लेकिन ऐसा खतरा संलयन पद्धति में नहीं है.

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क्या लक्ष्य है इस प्रोजक्ट का
इसके लिए प्लाज्मा की अवस्था का निर्माण होना जरूरी है. आईटर के खास ढांचे, टोकामैक (Tokamak) में इस गर्म प्लाज्मा का सीमित और नियंत्रित किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य यह पता लगाना है कि क्या फ्यूजन का व्यवासायिक तौर पर उत्पादन किया जा सकता है या नहीं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का कहना है कि यह कदम सभी देशों को सभी के कल्याण के लिए एकजुट करेगा. यह हमें भविष्य में बहुत विश्वास देगा और मानव इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा.

क्या है इस प्रोजेक्ट से उम्मीद
इस संरचना में प्लाज्मा मशीन में पैदा होगा जो असेंबली दौर के खत्म होने के बाद साल 2025 में शूरू होगा. मैक्रों ने कहा, “शुरू में बाधाएं आती हैं, लेकिन आईटर खोज, महत्वाकांक्षा जैसी भावनाओं से उन पर हावी हो सकेगा.''

Solar
सूर्य नाभकीय संलयन ऊर्जा पैदा करने का सबसे सटीक उदाहरण हैं यह करोड़ों साल से ऊर्जा पैदा कर रहा है.


एक बड़े बदलाव की ओर कदम
यूके आणविक ऊर्जा प्राधिकरण (UKAEA) के प्रमुख कार्यकारी प्रोफेसर इयान चैपमैन ने बीबीसी न्यूज को बताया कि यह इस प्रोजक्ट का बहुत उत्साजनक दौर होने वाला है. हम भावी पीढ़ियों को क्लीन एनर्जी देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं. हम सब लोग दुनिया में बदलाव के लिए जुड़े हैं.

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केवल कुछ ही समय के लिए बनेगा प्लाज्मा
उन्होंने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि पांच साल बाद हम पहला प्लाज्मा देख सकेंगे. यह केवल छोटा सा ही प्लाज्मा होगा जो कुछ ही मिली सेकेंड में खत्म हो जाएगा. इससे यह पता चलेगा कि सभी मैग्नेट सही तरह से काम कर रहे हैं. इसके बाद इसके कुछ और हिस्सों को जोड़ने का काम होगा. यह फ्यूजन के व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में एक बड़ा कदम होगा.”
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