क्या है 160 रुपये लीटर वाला 100 ऑक्टेन पेट्रोल, क्या हैं इसके फायदे?

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पेट्रोल की कीमतों (Petrol Prices) की चर्चा के बीच जानिए कि दुनिया के केवल सात देशों में उपलब्ध होने वाले हाई ऑक्टेन पेट्रोल (High Octane Petrol) का इस्तेमाल कैसे होता है और इससे उपभोक्तओं, उत्पादकों और पेट्रोल पंपों को क्या फायदा होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 28, 2021, 12:02 PM IST
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दुनिया में उंगलियों पर गिनने लायक देश हैं, जहां यह प्रीमियम क्वालिटी का पेट्रोल (Premium Quality Petrol) बनता और उपलब्ध होता है. हैदराबाद में हाल में लॉंच किए गए इस वर्ल्ड क्लास प्रीमियम पेट्रोल को पहले दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद समेत 10 महानगरों में करीब तीन महीने पहले लॉंच किया गया था. इस प्रीमियम पेट्रोल को XP100 (100 Octane) पेट्रोल कहते हैं. इस उपलब्धि के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया जो इस स्तर के प्रीमियम पेट्रोल का उपयोग कर रहा है.

बड़े स्तर पर इंडियन ऑयल ऑक्टेन 91 पेट्रोल की बिक्री और मार्केटिंग करता है. लेकिन देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी मथुरा रिफाइनरी में 100 ऑक्टेन पेट्रोल का उत्पादन शुरू कर चुकी है, जिसे देश के महानगरों में सप्लाई भी किया जा रहा है. बीएस 6 क्लास वाहनों के बेहद उपयुक्त बताए जा रहे इस पेट्रोल की कीमत हैदराबाद में लॉंच किए जाने पर 160 रुपये प्रति लीटर रही.

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क्या होता है 100 ऑक्टेन पेट्रोल?
इसे हाई ऑक्टेन फ्यूल के नाम से भी जाना जाता है. वाहन के इंजिन को नॉक से बचाने में पेट्रोल की क्षमता की जो रेटिंग होती है, उसे ऑक्टेन रेटिंग के तौर पर समझा जाता है. आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि इंजन के एक या एक से ज़्यादा सिलेंडरों में कंप्रेस्ड ऑइल की वजह से जब जल्दी इग्निशन होता है, तो इंजन से झनझन जैसी एक कर्कश आवाज़ निकलती है, इसे नॉक होना कहा जाता है, जो इंजन के लिए नुकसानदायक होता है.

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कहां इस्तेमाल होता है यह फ्यूल?
हाई ऑक्टेन ईंधन का इस्तेमाल हाई परफॉर्मेंस इंजन वाले वाहनों में किए जाने की सलाह दी जाती है, ताकि प्रीमैच्योर इग्निशन की समस्या न आए. हालांकि कुछ कार मालिक अपनी नॉन टर्बो पावर कार के लिए भी इस ईंधन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन विशेषज्ञ ऐसा न करने की सलाह देते हैं.

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विशेषज्ञों की हिदायत है कि रेगुलर इंजनों में अगर इस प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल किया जाता है, तो हो सकता है कि इंजन को ऑन होने के लिए ज़्यादा समय लगे और लंबे समय में यह इंजन के लिए नुकसान ही करता है.

क्या हैं हाई ऑक्टेन फ्यूल के फायदे?
ड्राइवरों, फ्यूल रिटेलरों, उत्पादकों और वाहन निर्माताओं के साथ ही पर्यावरण प्रेमियों के लिए भी इस पेट्रोल के कुछ फायदे बताए जाते हैं :

* उपभोक्ताओं को इससे बेहतर फ्यूल इकोनॉमी पाने के दावे किए जाते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक इससे मोटरस्पोर्ट या हेवी मशीन वाहनों के इंजन की क्षमता बढ़ती है, जिससे लंबे समय में मेंटेनेंस पर कम खर्च आता है.

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* प्रीमियम वाहन बनाने वाले हाई ऑक्टेन फ्यूल के इस्तेमाल की सलाह देने के पीछे दलील देते हैं कि इससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होता है. इससे निर्माताओं को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन टैक्स की बचत होती है.
* ईंधन निर्माताओं के लिए इस पेट्रोल से फायदा यह होता है कि वो रिटेलरों को बेहतर मार्जिन दे पाते हैं, जिससे बड़ी फ्यूल अर्थव्यवस्था बनती है. फ्यूल रिटेलरों को सीधे तौर पर इसमें ज़्यादा मार्जिन मिलता है.
* भारत स्टेज एमिशन स्टैंडर्ड, केंद्र सरकार की वह संस्था है, जो वायु प्रदूषकों को नियंत्रित करवाती है. हाई ऑक्टेन फ्यूल में चूंकि प्रदूषक तत्व कम होते हैं इसलिए पर्यावरण प्रेमी भी इसके पक्ष में रहते हैं.

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हाई परफॉर्मेंस वाहनों में 100 Octane पेट्रोल के इस्तेमाल की हिदायत दी जाती है.


हाई ऑक्टेन फ्यूल से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स
सबसे खास बात यही है कि यह प्रीमियम क्वालिटी पेट्रोल दुनिया भर में सिर्फ अमेरिका, जर्मनी, ग्रीस, इंडोनेशिया, मलेशिया और इज़रायल में ही उपलब्ध है. इस लिस्ट में अब भारत भी शुमार है. भारत में इस प्रीमियम पेट्रोल को पहले फेज़ में दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, आगरा, जयपुर, चंडीगढ़, लुधियाना, मुम्बई, पुणे और अहमदाबाद में उपलब्ध करवाया गया था.

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अब दूसरे चरण में इसे हैदराबाद में लॉंच किया जा चुका है और जल्द ही चेन्नई, कोलकाता, बेंगलूरु और भुबनेश्वर में भी इसे लॉंच किया जाने वाला है. यह भी आपको जानना चाहिए कि पेट्रोलियम उद्योग के विशेषज्ञों के मुताबिक देश में पेट्रोल की खपत का जितना बड़ा बाज़ार है, उसमें से 90 फीसदी नॉन ब्रांडेड पेट्रोल के व्यापार का है. जबकि हाई ऑक्टेन पेट्रोल का बाज़ार लग्ज़री वाहनों के उपयुक्त है.
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