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इस चींटी के शरीर में बनता है खास हथियार, जो बना देता है इसे अजेय

इस चींटी (Ant) के पूरे शरीर में जब यह कवच (Armour) चढ़ जाता है तो इसे हराना दूसरी प्रजाति की चींटी के लिए मुश्किल हो जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

इस चींटी (Ant) के पूरे शरीर में जब यह कवच (Armour) चढ़ जाता है तो इसे हराना दूसरी प्रजाति की चींटी के लिए मुश्किल हो जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

एक चींटी (Ant) की प्रजाति (Species) के शरीर में जैविक खनिजों (bio minerals) से बना एक खास कवच (Armour) उसे दूसरी प्रजात ...अधिक पढ़ें

    जीवों (Organisms) के विविधता भरे संसार में विचित्र तरह की क्षमताएं देखने को मिलती है. ऐसा ज्यादातर उन जीवों में होता है जो शिकारी जानवरों (Predators) का भोजन होते हैं लेकिन प्रकृति ने भी इन छोटे जीवों को कुछ ऐसी ताकतें दी होती हैं जो उनके अस्तित्व को बचाने में उपयोगी होती है. एक जानी मानी पत्ती काटने में सक्षम चींटी (Ants) में वैज्ञानिकों ने एक खास तरह के कवच (Armour) को देखा है जो जैविक खनिजों (Biominirals) के जरिए बनता है.

    अपनी ही प्रजाति से लड़ाई में कवच का काम
    यह हथियार चींटी को एक विशेष सुरक्षा शक्ति देता है जो इससे पहले कीट पतंगों के संसार में कभी नहीं देखी गई है. हाल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक इस वजह से ये चींटियां लड़ाई में अजेय हो जाती हैं. इस तरह कै जैविक खनिज हथियार प्रकृति में केकड़े जैसे क्रस्टेशन (crustaceans) और अन्य समुद्री जीवों में दिखाई देता है.

    कैसे पता चला इसके बारे में
    शोधकर्ता ने यह हैरान करने वाली खोज तब की जब वे फफूंद पैदा करने वाली चींटी की प्रजाति एक्रोमिरमेक्स एकिनेटियर (Acromyrmex echinatior) और एक एटींबायोटिक पैदा करने वाले बैक्टीरिया के बीच संबंध की पड़ताल कर रहे थे. यह बैक्टीरिया फसलों को ऐसी चीटिंयों से बचाता है.

    एक खास तरह की परत
    इस शोध के सहलेखक और विस्कॉन्सिन मैडिसन यूनिवर्सिटी में बेक्टीरियोलॉजी के प्रोफेसर कैमरून क्यूरी के मुताबिक शोधकर्ताओं ने पाया कि बड़ी वर्कर चींटी जिन्हें मेजर कहा जाता है, के शरीर की सतह पर पर एक सफेद रंग की दानेदार परत है.

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    इस तरह की सुरक्षा केकड़े और अन्य समुद्रीजीवों (Marine Creatures) में भी पाई जाती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    पूरे शरीर को ढंक लेता है
    नेचर कम्यूनिकेसनल में प्रकाशित इस रिपोर्ट के प्रमुख लेखक होंगजी ली ने बताया कि वे इन क्रस्टल्स को देखकर काफी हैरान हुए और उन्होंने पाया कि यह एक जैविक खनिज की परत है जो चींटियों में उनके परिपक्व होने के साथ ही बनती जाती है और उम्र के साथ इसकी कठोरता  बढ़ती जाती है और पूरे शरीर को ढंक लेती है.

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    दूसरी प्रजाति की चीटीं से संबंध
    शोधकर्ता निश्चित तौर पर यह नहीं जान सके कि इन चींटियों के पास ऐसा असामान्य हथियार क्यों होता है, लेकिन उन्हें लगता है कि इसका दूसरे फफूंद पैदा करने वाली दूसरी प्रजाति की सैनिक चींटियों से संबंध है जिन्हें आटा सेफेलोट्स (Atta cephalotes) कहा जाता है. शोधकर्ताओं ने लैब में सिम्यूलेशन में पाया कि ये दो प्रजातियां अपने इलाके के लिए आपस में लड़ाई में ही उलझी रहती हैं क्यूरी ने बताया कि जब एक्रो मेजर बिना अपने हथियार के होती हैं तो आटा सैनिक उन्हें टुकड़ों में काट कर रख देती हैं. लेकिन जब उनका कवच बन जाता है तो वे हारती हुई लड़ाई भी जीतने लग जाती हैं.

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    इस तरह की चींटियां (Ants) पत्तियों का काटने (Leaves cutters) में माहिर होती हैं और फसल बर्बाद कर देती हैं. (तस्वीर: Pixabay)


    और भी फायदा
    शोधकर्ताओं ने पाया कि जैविक खनिज वैले एक्सोसेक्लेटन कवच के लड़ाई के अलावा और भी फायदे हैं. अध्ययन की पड़ताल बताती है कि इससे वर्कर चींटियों को संक्रमण से भी बचाव होता है. यह इन चींटियों मेटारिजियम एनिसोप्लाइ फफूंद से  होने वाली बीमारी से बचाता है जो कवच न होने के कारण इनकी घने आबादी में बहुत तेजी से फैल जाता है.

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    शोधकर्ताओं ने पाया कि एक्रोमिरमेक्स एकिनेटियर का कवच उच्च कैलेशियम सिलिसाइट से बनता है. यह बहुत ही कम पाया जाने वाल जैविक खनिज होता है जिसमें कठोरता मैग्नीशियम के कारण बढ़ती जाती है जो चूने के पत्थर से मिलता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की जैविक खनिज की सुरक्षा कीट पतंगों की और प्रजातियों में भी मिलती होगी.

    Tags: Environment, Research, Science

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