सफेद से पीला हुआ ताजमहल लेकिन ये ऐतिहासिक इमारतें चार बार बदल चुकी हैं रंग

सफेद से पीला हुआ ताजमहल लेकिन ये ऐतिहासिक इमारतें चार बार बदल चुकी हैं रंग
संसद में केंद्रीय पर्यावरण राज्यमंत्री महेश शर्मा ने माना पीला पड़ रहा है ताजमहल

पढ़ें कौन सी हैं वो इमारतें जो बदल चुकी हैं अपना असली रंग.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 25, 2018, 8:53 AM IST
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ताजमहल का रंग उड़ता जा रहा है. यह अपने असली सफेद रंग की बजाए हल्का सा पीला दिखने लगा है. हाल ही में लोकसभा में ताजमहल को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री महेश शर्मा ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के हवाले से बताया कि ताजमहल का रंग वायु प्रदूषण के चलते उड़ रहा है. ताजमहल के रंग को बनाए रखने के लिए पुरातत्वविद और वैज्ञानिक बहुत से प्रयास कर रहे हैं.  लेकिन दुनिया में कई इमारतें ऐसी भी हैं जिनका रंग कई बार बदल चुका है. हालांकि उन इमारतों के बदले रंग के पीछे कोई प्राकृतिक कारण नहीं रहा है. इन्हें इंसानों ने बदला है.

ऐसी इमारतों में भारत की विश्वप्रसिद्ध इमारत दिल्ली का लालकिला भी शामिल है. जिसका निर्माण मुगलकाल में हुआ था और भारत के राष्ट्रपति स्वतंत्रता दिवस के दिन यहीं से राष्ट्र को संबोधित करते हैं.

जानें दुनिया की किन इमारतों ने अब तक बदल लिया है अपना असली रंग-



लाल किला

लालकिला: मई, 2011 में पुरातत्वविदों ने दावा किया था कि दिल्ली के लालकिले का ज्यादातर हिस्सा सफेद था. इसका निर्माण शाहजहां ने करवाया था. और यह 1948 में बनकर तैयार हुआ था.

पुरातत्वविदों की खोज में यह भी सामने आया था कि जिस पारंपरिक सफेद मुगल प्लास्टर के जरिए इसका निर्माण किया गया था, उसे संगमरमर, दालों, नींबू और फलों के रस के जरिए बनाया गया था.

जंतर-मंतर


जंतर-मंतर: लालकिले के बारे में खुलासा करने वाले पुरातत्वविदों ने यह भी बताया था कि दिल्ली की एक और ऐतिहासिक इमारत जंतर-मंतर भी कभी सफेद हुआ करती थी. इसे खगोलीय गणनाओं के लिए जयपुर महाराज ने बनवाया था. उस वक्त पुरात्वविदों के बीच इन इमारतों को फिर से इनके असली रंग में लाने पर भी बातचीत भी हुई थी.

द पार्थेनन


द पार्थेनन: वैज्ञानिकों के अनुसार एथेंस स्थित बिल्कुल सफेद पत्थरों की यह ऐतिहासिक इमारत एक बार ग्रेयुक्त लाल रंग में, फिर नीले रंग में और अंतत: पीले रंग में भी रंगी जा चुकी है. वैज्ञानिकों ने इन रंगों के छोटे-छोटे धब्बों के आधार पर इस बात का पता लगाया था.

सेंट बेसिल कैथेड्रल


सेंट बेसिल कैथेड्रल: बाइजेंटाइन सभ्यता की विरासत, प्याज के आकार के इसके गुंबदों को आपने जरूर देखा होगा. रूस की इस विश्वप्रसिद्ध इमारत का रंग भी बदल चुका है. इसके बनाए जाने के कई दशकों बाद इसके गुंबदों को 17वीं शताब्दी में रंगा गया था. वैसे असली रंग के तौर पर उस पर सोने का पानी चढ़ा हुआ था और इस इमारत का रंग ज्यादातर एक जैसा ही था.

माया सभ्यता का मंदिर


माया सभ्यता के मंदिर: माया सभ्यता के इन प्राचीन मंदिरों को माइका से सजाया गया था. यह एक तरह का क्रिस्टलीय खनिज होता है. इसे ऐसा इसलिए सजाया जा रहा था ताकि सूरज की रोशनी में यह चमके. वैज्ञानिकों ने इसका पता होंडुरास के कोपेन में स्थित एक मंदिर की जांच के दौरान इस बात का पता लगाया था. इस मंदिर का निर्माण 6वीं शताब्दी में हुआ था और इसके बगल में एक बड़ा सा पिरामिड भी बनाया गया था.

द एफिल टावर


द एफिल टावर: जब गुस्ताव एफिल ने 1889 में इस टावर का निर्माण किया था तो इसे लाल रंग से रंगा गया था. इसके बाद इसे पीले, गहरे पीले और ईंट के रंग में भी रंगा गया. आज 984 फीट ऊंचा यह टावर जिस रंग में रंगा हुआ है, उसे एफिल ब्राउन कहा जाता है. इसे एफिल ब्राउन इसलिए कहा जाता है क्योंकि टावर के नीचे की हिस्से को गाढ़े भूरे रंग से रंगा गया है जबकि टावर का ऊपरी हिस्सा हल्के भूरे रंग से.

लंदन टावर


लंदन टावर: 1240 में लंदन की इस मशहूर इमारत को 'द व्हाइट टावर' कहा जाने लगा था क्योंकि तत्कालीन राजा हेनरी III ने इसे सफेद रंगवा दिया था. हालांकि आज यह टावर फिर से अपने असली रंग यानि पत्थरों के रंग में लौट आया है.

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