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जानिए लॉकडाउन में क्यों कम हुई थी बिजली गिरने की घटनाएं

जानिए लॉकडाउन में क्यों कम हुई थी बिजली गिरने की घटनाएं

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लॉकडाउन का बिजली गिरने (Lightening Strike) की घटनों के बीच कासंबंध पता लगाया है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लॉकडाउन का बिजली गिरने (Lightening Strike) की घटनों के बीच कासंबंध पता लगाया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

कोविड-19 (Covid-19) महामारी में दो साल से काफी समय तक लोगों ने लॉकडाउन (Lockdown) की स्थिति देखी जहां बहुत सी मानवीय गतिविधियां रुक गईं थी. इसकी वजह से पर्यावरण सहित कई बदलाव देखने को मिले. एक अध्ययन में बताया गया है कि इनमें से एक प्रभाव बिजली गिरने (Lightening) पर भी पड़ा है. शोधकर्ताओं तीन अलग तरीकों से अध्ययन कर पाया की लॉकडाउन के दौरान इनमें कमी देखने को मिली है.

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    कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic)  की वजह से मार्च 2020 से ही दुनिया के कई देशों में एक के बाद एक लॉकडाउन (Lockdown) लगने शुरू हो गए थे. इस वजह से कई इंसानी गतिविधियां थम गई थीं जिसका व्यापक असर हुआ था. लोगों ने साफ तौर पर इसके प्रभाव भी देखे. लेकिन कई स्पष्ट प्रभाव के अलावा और भी असर हुए थे जो कम दिखे और उन पर ध्यान नहीं गया. अध्ययन में पता चला है कि इसमें बिजली गिरने (Lightening) की घटनाओं में कमी भी शामिल है.

    कई प्रभावों में से एक
    लॉकडाउन की वजह से लोगों ने घर पर ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताया, ऊर्जा की खपत कम हुई, यात्राओं में भारी कमी हुई जिससे वायु प्रदूषण कम हुआ, पानी भी साफ हो गया. नए शोध ने दर्शाया है कि इससे इस अवधि में बिजली गिरने की घटनाएं भी कम हुईं. अध्ययन में पाया गया कि बिजली गिरने की घटना के पीछे कारक घटकों की कमी के कारण ऐसा हुआ.

    एरोसॉल की कमी
    पिछले साल फरवरी में साइंस डायरेक्ट में प्रकाशित अध्ययन मे दर्शाया गया था कि लॉकडाउन में मानव गतिविधि के कारण एरोसॉल उत्सर्जन में कमी हुई थी. इससे वायुमडंल में एरोसॉल की मात्रा में भी कमी हो गई. एरोसॉल वायुमंडल में वे सूक्ष्म कण होते हैं जो मानव द्वारा उपयोग में लाए जाने वाला ईंधन के जलने से पैदा होते हैं.

    एरोसॉल का संबंध
    मैसाचुसैट्स इस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में फिजिकल मेट्रोलॉजिस्ट एर्ले विलियम्स ने बताया कि शोधकर्ताओं ने बिजली चमकने की प्रक्रिया को मापने के लिए तीन पद्धतियों का उपयोग किया और सभी नतीजों ने एक ही ट्रेंड दिखाया. उन्होंने पाया कि बिजली चमकने और गिरने की घटनाओं में कमी का संबंध कम होती एरोसॉल की मात्रा से है.

    शोध में पाया गया कि बिजली चमकने की प्रक्रिया में बादलों (Clouds) में एरोसोल की भूमिका ज्यादा होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    एरोसॉल का बादलों में भूमिका
    जब वायुमंडल में मौजूद ऐरोसोल भाप को साथ ले लेते हैं तब बादलों में पानी की बूंदों का निर्माण होता है.  जब एरोसॉल की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो बादलों में पानी की भाप का वितरण ज्यादा बूंदों में होता है. इसलिए बूंदें छोटी होती हैं और उनके बड़ी बूंदों में बदलने की संभावना कम होती है. यही छोटी बूंदें बादलों में रह कर छोटे ओलों और यहां तक कि छोटी बर्फ के क्रिस्टल बनाने में सहयोग करती हैं.

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    बादलों के दो हिस्सों में आवेश
    छोटे ओले और क्रिस्टल के बीच टकराव बादालों के बीच से निचले हिस्से में इन ओलों में ऋणात्मक आवेश ला देता है. वहीं बादलों के ऊपर के हिस्से में धनात्मक आवेश के क्रिस्टल होते हैं.  वैज्ञानिकों का मानना है कि बादलों के दो हिस्सों के बीच आवेश के इस बड़े अंतर की वजह से बिजली चमकने और गिरने  जैसी घटनाएं जन्म लेती हैं.

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    वायु प्रदूषण कम होने की वजह से लॉकडाउन में कम एरोसॉल उत्सर्जित हुए जिससे बिजली (Lightening) भी कम चमकी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    प्रदूषण कम होने से यह परेशानी
    लेकिन यदि प्रदूषण कम होता है तब बादलों में बड़ी और गर्म पानी की बूंदें बनती हैं ऐसे में बादलों में बर्फ के कणों की भारी कमी हो जाती है. जिससे आवेश में बड़ा अंतर पैदा नहीं हो पाता है. इसी लिए बादलों से बिजली चमकने या गिरने की घटना देखने को नहीं मिलती है. ऐसा ही कुछ लॉकडाउन के दौरान हुआ होगा. साल 2020 में इंसानी गतिविधियों के थमने से हवा में कम एरोसॉल का उत्सर्जन हुआ था जब पूरी दुनिया में लगभग सभी लॉकडाउन लगने लगा. इससे बहुत ही बड़ी तादाद में ईंधन की खपत में गिरावट हुई और ऑटोमोबाइट ट्रैफिक का एरोसॉल उत्पादन पर गहरा असर होता है.

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    शोधकर्ताओं ने प्रदूषण कम होने के कारण बूंदों का दो तरह की चमकने ये गिरने वाली बिजली में अवलोकन किया. एक जो जमीन पर गिरती है और एक केवल बादलों में ही चमकती है. एक पद्धति में पाया गया कि मार्च 2020 से मई 2020 की तुलना में साल 2021 के उन्ही महीनों में बिजली की चमक 19 प्रतिशत कम चमकी थी. शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जहां एरोसॉल में भारी कमी हुई वहां बिजली चमकने की घटनों में भी ज्यादा कमी देखने को मिली.

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