वो बॉक्सिंग चैंपियन, जो ताकत के बूते बावर्ची से बना शासक, खुद को बताता था आदमखोर

शरीर से बेहद ताकतवर ईदी अमीन 1950 के दशक में देश का नामी हैवीवेट बॉक्सिंग चैंपियन रहा

शरीर से बेहद ताकतवर ईदी अमीन 1950 के दशक में देश का नामी हैवीवेट बॉक्सिंग चैंपियन रहा

युगांडा का सैन्य शासक और राष्ट्रपति ईदी अमीन (Idi Amin, Uganda) 50 के दशक तक बॉक्सिंग चैंपियन रहा. अफ्रीका (Africa) की काकवा जनजाति से ताल्लुक रखने वाले इस तानाशाह ने कथित तौर पर दावा किया था कि वो इंसानी गोश्त खाता है.

  • Share this:

जब तानाशाहों (dictators) की बात होती है तो युगांडा (Uganda) के ईदी अमीन (Idi Amin) का जिक्र जरूर आता है. 6 फीट 4 इंच लंबे और लगभग डेढ़ सौ किलो वजन वाले ईदी ने मामूली सैनिक से देश के शासक तक का सफर अमीन ने बड़े ही खूंखार तरीके से तय किया. अफ्रीका (Africa) की काकवा जनजाति से ताल्लुक रखने वाले इस शख्स के बारे में कहते हैं कि ये अपने दुश्मनों का खून पी जाता था.

दूसरे देशों के सपोर्ट के बीच अपने यहां असंतोष

अमीन को लीबिया, सोवियत संघ और जर्मनी का समर्थन हासिल था. लेकिन अपने ही देश में पनपते असंतोष के बीच तंजानिया के खिलाफ लड़ाई ईदी को भारी पड़ गई. उसे देश से भागना पड़ा. पहले लीबिया और फिर सऊदी अरब ने उसे शरण दी. आखिरकार साल 2003 में सऊदी में ही ईदी की मौत हो गई.

किताब में मिलता है अजीबोगरीब आदतों का जिक्र 
अमीन के कार्यकाल के दौरान युगांडा में भारतीय राजदूत रहे मदनजीत सिंह ने अपनी किताब Culture of the Sepulchre: Idi Amin's Monster Regime में जिक्र किया है कि अमीन के घर में एक कमरा हमेशा बंद रहता था. सिर्फ एक नौकर को ही अंदर जाने की इजाजत थी. एक बार जिद करके अमीन की एक पत्नी भीतर गई तो उसे अपने पूर्व प्रेमी का कटा हुआ सिर रखा मिला.

ये भी पढ़ें: दवाओं की तरह Water Overdose भी होता है, ज्यादा पानी से मौत का खतरा 

ये भी माना जाता है कि अमीन को इंसानों का खून पीने की आदत थी. वो अपने दुश्मनों का खून पी जाया करता था.



ईदी अमीन को लीबिया, सोवियत संघ और जर्मनी का समर्थन हासिल था

विदेशी लेखक ने अपने सामने घटे वाकये का दिया हवाला 

किताब State of Blood: The Inside Story of Idi Amin में भी अमीन की इन्हीं क्रूर और रहस्यमयी बातों का जिक्र है. किताब के लेखक Henry Kyemba ने ईदी के साथ रहते हुए एक घटना का जिक्र किया है. वे बताते हैं कि ईदी एक बार अस्पताल के मुर्दाघर पहुंचा. वहां कुछ समय मुर्दों के बीच अकेले रहा. माना जाता है कि ईदी ने इस दौरान शवों का खून पिया. हालांकि कहीं भी इस बात की पुष्टि नहीं है. किताब में इसका हवाला भी है कि कैसे एक बार ईदी ने अपने अधिकारियों को बताया था कि वो कई बार इंसानी गोश्त खा चुका है.

ये भी पढ़ें: बेहद खूबसूरत है Dominica द्वीप, प्राकृतिक सौंदर्य देखने हर साल पहुंचते हैं लाखों सैलानी

अय्याशियों में भी था आगे 

शरीर से बेहद ताकतवर ईदी 1950 के दशक में देश का नामी हैवीवेट बॉक्सिंग चैंपियन रहा. साथ में वो रग्बी भी खूब बढ़िया खेला करता. ताकत से जुड़ी इन खूबियों के साथ राजनैतिक और निजी मामलों में ईदी बेहद क्रूर रहा. माना जाता है कि वो एक साथ ढेरों महिलाओं से प्रेम संबंध रखता था. पूरे युगांडा में उसका हरम था, जिसमें अलग-अलग पेशों में रह रही महिलाओं से उसके संबंध थे. उसने छह शादियां की. इनके अलावा ईदी की ढेरों प्रेमिकाएं भी थीं. वैवाहिक संबंधों से मिलाकर ईदी के लगभग 40 बच्चे थे.

ईदी अमीन लगभग 8 सालों तक युगांडा का शासक बना रहा

ईदी को एशियाई लोगों से नफरत थी

उसका मानना था कि उन्हीं की वजह से मूल अफ्रीकन पिछड़े रह गए हैं. ऐसे में शासक बनने के बाद उसने कहा कि अल्लाह ने उसे सपने में एशियाई लोगों को देश से बाहर भेजने को कहा है. दरअसल हो ये रहा था कि तब वहां के मूल निवासियों की बजाए एशियाई लोग वहां ज्यादा कामयाब थे, जिसपर ईदी अमीन को काफी गुस्सा था. हालांकि ईदी के इस कदम के बाद युगांडा की अर्थव्यवस्था ठप्प हो गई क्योंकि वहां एशियाई और उसमें भी यहां भारतीय ही बिजनेस के मूल में थे.

ये भी पढ़ें: क्या ज्यादा जिंक खाने से बढ़ा Black Fungus, क्यों उठ रहे हैं सवाल?

भारतीयों पर बरपा अमीन का कहर 

ईदी लगभग 8 सालों तक युगांडा का शासक बना रहा. अपने कार्यकाल के दौरान ईदी ने एशियाई मूल के लोगों पर सबसे ज्यादा हिंसा की. उसने एकदम से एशियाई, जिनमें भारतीय सबसे ज्यादा थे, लोगों को देशनिकाला दे दिया. तब वहां लगभग 50 हजार भारतीय थे. ईदी ने यह भी कहा कि जाने वाले अपने साथ सिर्फ दो सूटकेस और लगभग 50 पाउंड ही ले जा सकते हैं. भारतीयों ने तब अपनी जायदाद छोड़कर रातोंरात ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा में शरण ली.

रसोइये की तरह सेना में दी थी सेवा

ईदी को दुनिया के कुछ सबसे खूंखार और रहस्यमयी तानाशाहों में गिना जाता है. साल 1925 में कोबोको में जन्मे ईदी ने 1946 में बावर्ची के रूप में ब्रिटिश औपनिवेशिक सेना की किंग्स अफ्रीकन राइफल्स में काम शुरू किया. अपने कद और ताकतवर शरीर के कारण जल्द ही ईदी आगे बढ़ता गया. उसका रुतबा इतना बढ़ गया कि साल 1971 में सैन्य तख्तापलट के दौरान वो रसोइये से मेजर जनरल बना चुका था.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज