जानिए कैसे और कब ऑक्सीजन कम होते होते खत्म हो जाएगा पृथ्वी से जीवन

शोध में साफ कहा गया है कि पृथ्वी (Earth) से ऑक्सीजन (Oxygen) पूरी तरह से खत्म हो जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

शोध में साफ कहा गया है कि पृथ्वी (Earth) से ऑक्सीजन (Oxygen) पूरी तरह से खत्म हो जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

पृथ्वी (Earth) से ऑक्सीजन (Oxygen) खत्म होते होते ऐसे परिवर्तन होंगे जिससे पृथ्वी का वायुमंडल (Atmosphere) पुरातन स्थिति में पहुंचता जाएगा और जीवन के सभी रूप खत्म होने लगेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 4, 2021, 10:14 PM IST
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खगोल वैज्ञानिक बाह्यग्रहों में जीवन तलाश रहे हैं. एलन मस्क मंगल पर इंसानी बस्ती बसाने की योजना बना रह हैं. तो वहीं दूसरी तरफ जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के खतरे दुनिया के खत्म हो जाने के खतरों के प्रति आगाह कर रही हैं. पृथ्वी (Earth) से मानव जाति के खत्म होने की आशंकाएं भी बताई गई हैं. ऐसे ही एक शोध के मुताबिक एक समय ऐसा आएगा जब पृथ्वी पर सांस लेने के लिए ऑक्सीजन (Oxygen) नहीं बचेगी, जिससे पृथ्वी पर जीवन (Life) खत्म हो जाएगा.

कितने साल बाद खत्म होगी ऑक्सीजन
हाल ही में नेचर जियोसाइंस जर्नल में प्रकाशित “द फ्यूचरलाइफ स्पान ऑफ अर्थ ऑक्सीजनेटेड एटमॉस्फियर” शीर्षक अध्ययन के मुताबिक पृथ्वी पर ऑक्सीजन एक अरब साल बाद खत्म हो जाएगी. शोध में यह भी साफ कहा गया है कि भले ही यह निकट भविष्य में ना हो, जब भी होगा बहुत तेजी से होगा.

पुरातन स्थिति में पहुंचेगी पृथ्वी
यह बदलाव हमारे नीले ग्रह पर उसी तरह से होगा जिसे 2.4 अरब साल पहले द ग्रेट ऑक्सीडेशन इवेंट कहा जाता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि सुदूर भविष्य में पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन आधारित जैवसंकेत (Bio signatures) का जीवन काल संदिग्ध हो जाएगा.



कैसा होगा तब वायुमंडल
शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि ऑक्सीजन के बिना पृथ्वी के वायुमंडल का क्या हाल होगा. पृथ्वी पर ऑक्सीजन के स्तर पुरातन स्तर तक पहुंच जाएगें, लेकिन यह पृथ्वी के जलवायु सिस्टम में नम ग्रीन हाउस गैस छा जाने और वायुमंडल में सतह के पानी का तेजी से चलने जाने के काफी पहले हो जाएगा.

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पृथ्वी (Earth) से ऑक्सीजन (Oxygen) खत्म होने केसाथ ही ग्रीन हाउस गैसें भी बढ़ जाएंगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


क्या कारण होगा इसका
इस प्रक्रिया की व्याख्या करते हुए शोधकर्ताओं ने बताया कि भविष्य में ऑक्सीजन कम होने की प्रक्रिया यानि डीऑक्जीनेशन अटल है, जो बढ़ते सौर परिवर्तनों का नतीजा होगा. वहीं इसके सटीक समय का निर्धारण पृथ्वी की दूसरी पर मैंडल और बाहरी परत के महासागर- वायुंडल – पर्पटी सिस्टम के बीच शक्ति बदलाव से होगा.

पृथ्वी को आवासीय बनाए रखने के लिए करने होंगे बहुत सारे बदलाव

महासागरों के सूखने से पहले ही
इससे पहले वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि बढ़त सूर्य का विकिरण हमारी पृथ्वी से महासागरों को 2 अरब सालों में सुखा देगा. लेकिन नए मॉडल के चार लाख सिम्यूलेशन बताते कि उससे पहले ऑक्सीजन की कमी ही जीवन को पृथ्वी से खत्म कर देगी.

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पृथ्वी (Earth) यह बदलाव उन प्रक्रियाओं के कारण आएगा जिन पर इंसान का जोर नहीं चल पाएगा.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


बहुत ही ज्यादा कम होने वाला है ऑक्सीजन का स्तर
जॉर्जया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के अर्थ साइंस्टिस्ट क्रिस रेनहार्ड का कहना है, “ऑक्सीजन की यह कमी बहुत ही ज्यादा होगी. हम आज के ऑक्सीजन के स्तर से दस लाख गुना कम के स्तर की बात कर रहे हैं.“ इस तरह से समय के लिहाज से देखों तो ऑक्सीजन का मौजूदगी पृथ्वी पर उतनी व्यापक नहीं रहने वाली है.

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शोधकर्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि हमें ऑक्सीजन के अलावा जीवन के दूसरे संकेत देखने का भी प्रयास करना चाहिए. ऑक्सीजन पृथ्वी का बहुत दूसरे पहचाना जा सकने वाला जीवन संकेत है. लेकिन शोध के मुताबिक यह पृथ्वी का स्थायी पहलू नहीं है. पृथ्वी पर ऑक्सीजन समृद्धि का समय उसके पूरे इतिहास के 20 से 30 प्रतिशत हिस्से में संभव है. जबकि बाह्यग्रहों की खोज में यह सबसे ज्यादा खोजा जाने वाला और सबसे ज्यादा अहमियत देने वाला जीवन संकेत हैं.
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