कितनी अमावसें झेलकर चांद बनी थी 'गंगूबाई काठियावाड़ी' उर्फ 'कोठेवाली'!

वर्क फ्रंट की बात करें तो आलिया, रणबीर कपूर और अमिताभ बच्चन की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' रिलीज के लिए तैयार हैं. वहीं वह संजय लीला भंसाली की 'गंगूबाई काठियावाड़ी' भी कम्पलीट हो गयी है और ये इस साल ईद पर रिलीज होगी. आलिया करण जौहर की मल्टी-स्टारर 'तख्त' और एसएस राजामौली की 'आरआरआर' में भी दिखाई देंगी. (Instagram @AliaBhatt)

वर्क फ्रंट की बात करें तो आलिया, रणबीर कपूर और अमिताभ बच्चन की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' रिलीज के लिए तैयार हैं. वहीं वह संजय लीला भंसाली की 'गंगूबाई काठियावाड़ी' भी कम्पलीट हो गयी है और ये इस साल ईद पर रिलीज होगी. आलिया करण जौहर की मल्टी-स्टारर 'तख्त' और एसएस राजामौली की 'आरआरआर' में भी दिखाई देंगी. (Instagram @AliaBhatt)

आलिया भट्ट (Alia Bhatt) को स्क्रीन पर देखने से पहले जानें कि गंगूबाई के तेवर बचपन से ही ऐसे थे कि उसे क्वीन तो बनना ही था. बंबई के कमाठीपुरा (Kamathipura of Mumbai) में बेची गई गंगूबाई ने सोना चांदी ही नहीं, इज़्ज़त भी कमाई कि अब भी मुंबई के कोठों (Mumbai Brothels) में उसकी तस्वीरें लगी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 11:29 AM IST
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बॉलीवुड एक्ट्रेस (Bollywood Actress) ​आलिया भट्ट फिल्मकार संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) की अगली बायोपिक में गंगूबाई काठियावाड़ी की भूमिका में नज़र आने वाली हैं. मुंबई के बेहद चर्चित रेड लाइट एरिया (Red Light Area) कमाठीपुरा के कोठों की गलियों में गंगूबाई का नाम आज भी याद किया जाता है और कोठा चलाने वाली इसी 'मैडम' के जीवन पर आधारित फिल्म जल्द ही रिलीज़ होने जा रही है. बुधवार को इस फिल्म का पहला टीज़र (First Teaser of Gangubai Kathiawadi) रिलीज़ हुआ तो सोशल मीडिया पर खासी चर्चा रही कि आखिर असली गंगूबाई कौन थी और उसकी क्या शख्सियत क्या थी?

गंगूबाई काठियावाड़ी को गंगूबाई कोठेवाली के नाम से मुंबई में 1960 के दशक में काफी शोहरत मिली थी. कमाठीपुरा में कई कोठे उसकी निगरानी में चलते थे. अंडवर्ल्ड से लेकर राजनीति तक उसकी बहुत पहुंच बताई जाती थी. उसका दबदबा इस तरह का था कि कोई भी उससे उलझने में दस बार सोचता था. यह भी दिलचस्प बात है कि कैसे एक कोठा मालकिन ने अपने धंधे में इज़्ज़त भी खूब कमाई.

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कैसे बंबई पहुंची थी गंगूबाई?
काठियावाड़ के एक अच्छे खासे वकीलों के परिवार में इकलौती लड़की गंगा हरजीवन दास 1939 में पैदा हुई तो उसकी परवरिश बड़े लाड़ प्यार से हुई थी. पूरा परिवार 'गंगू' की हर इच्छा के लिए कुर्बान रहा करता था. गुजरात के सरकारी स्कूल में पढ़ने के बाद उसने आगे की पढ़ाई नहीं की क्योंकि उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता था.

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गंगूबाई का किरदार निभाती नज़र आएंगी आलिया भट्ट.


गंगूबाई जब सिर्फ 16 साल की थी, तब उसे अपने पिता के यहां अकाउंटेंट के तौर पर काम करने वाले युवक से प्यार हो गया. पिता और पूरे परिवार ने इस रिश्ते पर ऐतराज़ किया. ज़रा सी उम्र में भी गंगू का तेवर था 'किसी के बाप से नहीं डरने का'. तो गंगू ने प्यार को तरजीह दी और उस युवक के साथ भागकर बंबई चली आई.

क्यों भागी थी गंगू और कैसे हुआ धोखा?
गंगू को फिल्में बहुत भाती थीं और चकाचौंध के सपनों में खोयी रहती थी. कहते हैं कि उसका सपना था कि एक दिन वो भी बहुत कामयाब और मशहूर एक्ट्रेस बने. इन्हीं नन्हे सपनों का उस अकाउंटेंट ने मौके के तौर पर देखा. प्यार का जाल गंगू पर डाला और उसके सपने पूरे करने के सपने दिखाकर उसे बंबई ले गया.

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गंगू के सपनों को तब झटका लगा जब उसके प्रेमी ने उसे एक कोठे पर बेच दिया. गंगू खूबसूरत थी इसलिए उसके एवज़ उसके प्रेमी को तब 500 रुपये की मोटी रकम मिली. प्यार में धोखे के चलते वेश्यावृत्ति में धकेल दी गई गंगू के पास तब दो रास्ते थे, एक तो वो किस्मत मानकर हज़ारों लड़कियों की तरह मर मरकर जी लेती, या फिर इस धंधे में अपनी शर्तों पर जीने का रास्ता खोजती. जवाब था उसका अंदाज़, 'गंगू चांद थी और चांद ही रहेगी'.

कैसे ताकत बने गंगू के आंसू?
अपने प्रेमी के हाथों छली गई गंगू हफ्तों तक कोठे में रोती रहती थी. फिर उसने अपने आंसुओं को खुद ही पोंछकर अपनी ज़िंदगी को खुद संवारने का बीड़ा उठाया. अपनी ही तरह सताई लड़कियों से उसे हमदर्दी भी हुई और कहीं उसके मन में यह बात रह गई कि इन सभी लड़कियों की ज़िंदगी को बेहतर करने की ज़िम्मेदारी भी उसी की थी.

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ज़्यादा वक्त नहीं लगा और गंगू कमाठीपुरा की सबसे महंगी सेक्स वर्करों में शुमार हो गई थी. उसके 'क्लाइंट' रसूखदार लोग थे. अपने हौसले और शरीर के अलावा गंगू ने अपने दिमाग के बूते अपनी एक अलग पहचान बनाना शुरू की थी.

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गंगूबाई काठियावाड़ी फिल्म के एक दृश्य में आलिया भट्ट.


अंडरवर्ल्ड से रिश्ते ने बदले हालात
1960 का दौर बंबई के इतिहास में अंडरवर्ल्ड के हावी होने का वक्त था. हाजी मस्तान और वरदाराजन के साथ बंबई के माफिया त्रिकोण का तीसरा नाम था करीम लाला. एक तरफ लाला खौफ का नाम था तो दूसरी तरफ अपने उसूलों के लिए भी मशहूर था. गंगू और लाल के बीच एक गहरा रिश्ता बनने का रास्ता एक दर्दनाक हादसा था.

लाला के गैंग के एक गैंगस्टर ने गंगूबाई के साथ क्रूरता से बलात्कार किया था. इस घटना के बाद गंगूबाई बुरी तरह टूट तो गई ही थी, कमाठीपुरा में उसका भविष्य भी तकरीबन खत्म होने की कगार पर था. एक बार फिर गंगू ने अपने आंसू पोंछे और खड़े होने की हिम्मत जुटाई. जैसे 'गंगू चांद थी और चांद रात में ही चमकता है'. जुम्मे की नमाज़ के बाद उस गैंगस्टर की शिकायत लेकर उसके बॉस लाला के पास जा पहुंची.

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नमाज़ पढ़कर आ रहे लाला को गंगू ने आपबीती सुनाई तो आगबबूला लाला ने अपने उस ज़ालिम गैंगस्टर को सबके सामने खासा सबक़ सिखाया. सबके सामने लाला ने गंगू से राखी बंधवाई और बंबई के अंडरवर्ल्ड में बात फैल गई कि गंगू को लाला ने बहन बनाया है और धमकी दी है कि अगर किसी ने कोई ज़्यादती की तो अंजाम अच्छा नहीं होगा. इसके बाद गंगू के दिन जैसे फिर गए.

कमाठीपुरा की क्वीन बनी गंगू
गंगूबाई कोठों की दुनिया की बेताज मलिका बन चुकी थी. साड़ी में सोने की किनारी और ब्लाउज़ में सोने के बटन गंगू की पहचान हुआ करते थे. एक ज़माना था जब कमाठीपुरा की गलियों से उसकी बेंटले कार निकला करती थी, तो बंबई हैरत से तकती थी. जब गंगू के लिए 'कमाठीपुरा में अमावस की रात नहीं होती थी', तब गंगू के सामने इज़्ज़त कमाने का मौका था.

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गंगूबाई काठियावाड़ी फिल्म का पोस्टर


नाम और हैसियत कमा चुकी गंगूबाई ने वेश्यावृत्ति में धकेली गईं लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई छेड़ना शुरू की. कहा जाता है कि एक मौके पर गंगू देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिली थी और वेश्याओं के अधिकारों के लिए जिस अक्लमंदी से उसने बात की, नेहरू भी कायल हुए थे. इसके बाद रेड लाइट एरिया के लिए खास अधिकार भी तय हुए.

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आज भी गंगू के फोटो कमाठीपुरा के कोठों की दीवारों पर लगे मिल जाते हैं. वाकई यह पूरी ज़िंदगी 'लार्जर देन लाइफ' दिखती है,​ जिसे हुसैन ज़ैदी ने अपनी किताब माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई में दर्ज किया है और अब इस पर भंसाली की फिल्म में गंगू की सशक्त भूमिका में आलिया की काफी चर्चा शुरू हो चुकी है.
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