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इंटरनेट पर बीमारियों के बारे में पढ़ना पसंद है तो संभल जाएं, पड़ सकता है दिल का दौरा

इंटरनेट पर बीमारियों के बारे में पढ़ना पसंद है तो संभल जाएं, पड़ सकता है दिल का दौरा

प्रतीकात्मक फोटो

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एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि ये दिल की बीमारियों के शुरुआती संकेतों में से एक है.

    सामान्य सिरदर्द या मामूली सर्दी-खांसी, बुखार को किसी गंभीर बीमारी का संकेत मान लेना और तमाम तरह की जांचों के सही आने के बावजूद डर में जीना- यह अपने-आप में एक बीमारी है. हाइपोकॉन्ड्रिया नामक इस बीमारी का शिकार व्यक्ति हर छोटी-मोटी मौसमी तकलीफ को भी किसी बड़ी बीमारी से जोड़कर देखता और परेशान रहता है. अब डॉक्टर हाइपोकॉन्ड्रिया को ज्यादा गंभीरता से लेने लगे हैं क्योंकि एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि ये बीमारी दिल की बीमारियों के शुरुआती संकेतों में से एक है.

    नॉर्वे में हुआ यह शोध मेडिकल जर्नल बीएमजे ओपन में छपा. लगभग 7 हजार लोगों पर यह शोध हुआ जो 12 सालों तक चला. आइए जानते हैं क्या है हाइपोकॉन्ड्रिया और कैसे ये दिल की सेहत से जुड़ा है.

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    हाइपोकॉन्ड्रिया या इलनेस एंजाइटी डिसऑर्डर लंबे समय तक चलने वाली समस्या है. इसके तहत अच्छे स्वास्थ्य वाला व्यक्ति भी इस आशंका से ग्रस्त हो जाता है कि उसे अमुक बीमारी है जो किसी डॉक्टर की पकड़ में नहीं आ रही. अगर मरीज को पहले से ही कोई स्वास्थ्यगत समस्या है तब तो उसकी स्थिति और खराब हो जाती है. ऐसे में छोटी सी समस्या को वह बहुत बढ़ा-चढ़ाकर देखने और बताने लगता है. यह डर उम्र के साथ या जीवन में किसी तनाव के साथ और बढ़ता जाता है. इसका सीधा असर मरीज के काम, रोजमर्रा के जीवन और रिश्तों पर पड़ता है इसलिए समय पर पहचान औऱ इलाज जरूरी है.

    प्रतीकात्मक फोटो


    क्या हैं इसके संकेत
    मरीज लगातार यह सोचने लगता है कि उसे कोई गंभीर बीमारी है. छोटे से छोटे संकेतों को इससे जोड़कर देखता है. जांचों के ठीक आने पर भी डरा रहता है. परिवार या डॉक्टर के बोलने का भी कोई असर नहीं होता. अगर परिवार में कोई आनुवंशिक बीमारी है तो और भी ज्यादा परेशान हो जाता है कि उसे भी यह बीमारी है या होने वाली है. आने वाली बीमारी को लेकर इतना डरा रहता है कि कोई भी काम नहीं कर पाता. लोगों से मिलना-जुलना टालता है. लगातार बीमारी के बारे में बात करता है और इंटरनेट या किताबों में इसी तरह की चीजें पढ़ना चाहता है.

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    अक्सर सारी जांचें सही आने पर मरीज असंतुष्ट हो जाता है और किसी नए डॉक्टर के पास चला जाता है. बीमारी के गंभीर होने पर कई बार मरीज डॉक्टर को जोर देता है कि वह अमुक सर्जरी कर दे या शरीर से अमुक अंग निकाल दे. हाइपोकॉन्ड्रअक छांट-छांटकर ऐसी बीमारी के लक्षण पढ़ते हैं, जो कि उन्हें लगता है कि उन्हें है. मरीज डॉक्टर के पास जाते हैं और अपने अनुसार बीमारी की बात सुन पाने के कारण अविश्वास में फिर किसी दूसरे डॉक्टर के पास जाते हैं. यह प्रक्रिया चलती रहती है. इस बीमारी के कारण अब तक अज्ञात हैं लेकिन हॉर्मोनल असंतुलन को भी इसकी एक वजह माना जा रहा है.

    बीमारी की कुछ वजहें
    अगर मरीज स्वास्थ्य और बीमारी के बारे में ठीक तरह से नहीं जानता है तो मामूली से लक्षणों को भी गंभीर मान बैठता है.
    मरीज को इस समस्या की आशंका तब और भी ज्यादा होती है, जब उसके पेरेंट्स उसके या खुद के स्वास्थ्य को लेकर परेशान रहते हों.
    बचपन में कोई गंभीर बीमारी होने पर वयस्कावस्था में भी मरीज को हमेशा बीमारी का डर सताता है.
    इंटरनेट का इस्तेमाल आम होने के साथ हाइपोकॉन्ड्रअक लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. एक ओर जहां इंटरनेट पर स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां लोगों की मदद कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कईयों में आशंका बढ़ाने का काम भी कर रही हैं.

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    तब मिलें डॉक्टर से
    अगर वास्तव में मरीज को कोई स्वास्थ्यगत परेशानी है तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखलाना चाहिए ताकि समस्या का निदान और इलाज जल्द हो सके. अगर जांच हो चुकी हो और सब ठीक आने के बावजूद मरीज परेशान है तो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञ से सलाह ली जानी चाहिए, इससे पहले कि मरीज का जीवन भय से बुरी तरह से प्रभावित हो जाए.

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    दिल की बीमारी से संबंध
    शोध में पहले यह मानकर चला गया कि हाइपोकॉन्ड्रिया के मरीजों को दिल की बीमारी होने की आशंका कम होगी क्योंकि वे लाइफस्टाइल को लेकर सचेत रहते हैं और समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराते रहते हैं. हालांकि नतीजे इसके उलट रहे. लगभग 7 हजार लोगों की हेल्थ लगातार 12 सालों तक मॉनीटर की गई, जिसमें पाया गया कि हाइपोकॉन्ड्रिया से ग्रस्त लोगों को दिल की बीमारियां जल्दी पकड़ती हैं. इसकी वजह पर अब भी शोध जारी है लेकिन अनुमान ये है कि हेल्थ एंजाइटी के चलते मरीज लगातार अपना वक्त चिंता में बिताता है और खानपान बिगड़ता चला जाता है, जिसके कारण दिल की सेहत खराब हो जाती है. शोध में शामिल 70 प्रतिशत हाइपोकॉन्ड्रअक दिल की खराब सेहत से जूझते पाए गए.

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