मंगल की सतह के नीचे तरल पानी के होने मिले संकेत, जागी नई उम्मीद

मंगल (Mars) ग्रह की सतह के नीचे पानी (Water) का इतना विशाल स्रोत पहली बार पाया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
मंगल (Mars) ग्रह की सतह के नीचे पानी (Water) का इतना विशाल स्रोत पहली बार पाया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के मार्स एक्सप्रेस (Mars Express) अभियान ने मंगल (Mars) के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) की सतह के नीचे पानी (Liquid Water) का विशाल भंडार का पता लगाया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 12:59 PM IST
  • Share this:
मंगल (Mars) ग्रह पर जीवन (Life) की संभावनाओं की तलाश खत्म नहीं हुई है, लेकिन अभी तक वैज्ञानिकों को पुष्ट प्रमाण तो दूर आशाजनक संकेत तक नहीं मिल रहे थे. पिछले कुछ समय से मंगल पर जीवन के प्रतिकूल ही स्थितियां मिल रही थीं. बहुत कम तापमान (Low temperature) जिससे सतह पर तरल पानी (Liquid Water) का न होना इसमें प्रमुख था. लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि मंगल की सतह के नीचे (Subsurface) तरल पानी के भंडार हो सकते हैं. इसके पुष्ट संकेत यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के मंगल अभियान मार्स एक्सप्रेस (Mars Express) से मिले हैं जिसने मंगल पर तरल पानी के संकेत खोजे हैं.

कहां मिला तरल पानी
मार्स एक्सप्रेस ने मंगल के दक्षिणी ध्रुव  सतह के नीचे बहुत से पानी की जगहों की खोज की है. इसके लिए मार्स एवांस रेडार फॉर सबसर्फेस एंड आयनोस्फियर साउंडिंग (MARSIS) उपकरण की मदद ली गई थी. इस पड़ताल से उन सभी शोधों को बल मिला है जिनका अनुमान था कि मंगल पर की उपस्थिति हो सकती है.

MARSIS ने कैसे खोजा पानी
ईएसए के इस अभियान ने पानी का विशाल भंडार खोजा है जो दूसरे छोटे पानी की स्थानों को सूखे स्थानों से अलग करता है. ईएसए के मार्स एक्सप्रेस के MARSIS उपकरण ने राडार के संकेत भेजे जो मंगल की सतह और बर्फीले इलाकों को भेद सकते हैं.



पहली बार नहीं मिले ऐसे संकेत
मंगल पर इस तरह की यह पहली खोज नहीं हैं. इससे पहले साल 2018 में शोधकर्ताओं ने इसी MARSIS उपकरण का उपयोग किया था और घोषणा की थी कि  उन्होंने मंगल की सतह के नीचे बहुत बड़ी झील का पता लगाया है. लेकिन कई विशेषज्ञों ने इस अध्ययन पर तरल पदार्थ के स्वभाव पर संदेह जताते हुए सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि वैज्ञानिकों को इस बात के पुष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं कि खोजी गया तरल इलाका पानी की झील है.
कैसे किया अध्ययनरोम ट्रे यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने उन आंकड़ों का अध्ययन किया जो उन तकनीकों पर आधारित थे जिनसे अर्थ सैटेलाइट के जरिए अंटार्कटिका ग्लैशियर के नीचे की झीलों का अध्ययन किया गया था. इस आधार पर MARSIS के भेजे गए आंकड़ों का शोधकर्ताओं ने विश्लेषण किया और मंगल पर पानी के स्रोतों की पड़ताल की. इससे उन्हें मंगल पर तरल पदार्थ के स्थान मिले.चांद पर दिखी दरार तो हैरान हुए वैज्ञानिक, जानिए कितनी अहम है ये जानकारीइस बार मिला बड़ा भूभागइस बार जिन तरल भागों के बारे में पता चला है वे अलग हैं. इससे पहले जितने भी गीले इलाके मिले हैं, उनमें मुख्य सूखे इलाके में बहुत सारे गीले हिस्से मिले थे, जो बहुत से खारी झीलों से भरा क्षेत्र बना दिखाई देता था. लेकिन इस बार एक बड़ा तरल पदार्थ भूभाग मिला है.


जागी नई उम्मीद
इस पड़ताल से मंगल पर जीवन की तलाश को एक नई दिशा मिल सकती है. शोधकर्ताओं का कहना है की जीवन के लिए तरल पानी की बहुत आवश्यकता होती है, ऐसे में यहां जीवन के मिलने की संभावना प्रबल हो जाती है. यह मंगल पर कॉलोनी बसाने के दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है.

कुल कितना पदार्थ है ब्रह्माण्ड में, जानिए वैज्ञानिकों ने कैसे लगाया अनुमान

मंगल ग्रह को लेकर वैज्ञानिक काफी आशान्वित हैं. इस बात के उन्हें कई प्रमाण मिल चुके हैं कि वहां पहले कभी पानी रहा होगा और हो सकता है कि वहां जीवन भी रहा हो. पानी के इन संकेतों की पुष्टि अगले साल नासा का पर्सिवियरेंस रोवर भी कर सकता है क्योंकि इस अभियान में उसका एक लक्ष्य मंगल की सतह के नीचे पानी और जीवन की पड़ताल करना भी है. इसी साल 31 जुलाई के प्रक्षेपित किया गया पर्सिवियरेंस अगले साल 18 फरवरी को मंगल के जजीरो क्रेटर पर उतरेगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज