धूम्रपान से गहरा नाता है अकेलेपन का, लॉकडाउन में बढ़ सकती है समस्या- शोध

धूम्रपान से गहरा नाता है अकेलेपन का, लॉकडाउन में बढ़ सकती है समस्या- शोध
शोध में पाया गाय है कि अकेलेपन का धूम्रपान की आदत पर गहरा असर होता है.

शोधकर्ताओं ने पाया है कि अकेलेपन (Loneliness) और धूम्रपान (Smoking) का बहुत गहरा संबंध है. लॉकडाउन (Lock down) के दौरान अकेलेपन का धूम्रपान की आदतों पर ज्यादा असर होता है.

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona virus) के खिलाफ जंग चल रही है. कोरोना का संक्रमण फैल रहा है तो कई देश इसके साथ जूझने की आदत डाल रहे हैं. लेकिन लंबें समय से चल रहे लॉकडाउन (Lock down) ने लोगों को कई तरह की मनोवैज्ञानिक मुसीबतों में भी डाला है जिसमें अकेलापन खास है. एक अध्ययन में पाया गया है कि अकेलेपन (Loneliness) का (Smoking) से संबंध है.

खास अध्ययन में मिले नतीजे
ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में इस बात के प्रमाण पाए हैं कि लंबे समय तक अकेले रहने और धूम्रपान का गहरा संबंध है. एडिक्शन जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में एक नई शोध पद्धति का उपयोग किया गया जिसे मेंडनियन रैंडमाइजेशन कहता है. इस पद्धति में लाखों लोगों के जैनेटिक और सर्वे के आंकड़ों का उपयोग होता है. इस अध्ययन में पाया गया कि अकेलेपन से धूम्रपान के बढ़ने की संभावना होती है.

दो तरफा होता है असर
इस शोध के सहलेखक डॉ रेबिन वूटोन ने एक बयान में कहा, “इस  पद्धति का पहले इस सवाल पर कभी उपयोग नहीं किया गया. इसलिए ये नतीजे भी नए हैं. अकेलेपन और धूम्रपान के बीच के संबंध की वजहों में सिगरेट का सूकून का स्रोत माना जाना या बैचेनी को खत्म करने वाला माना जाना शामिल है. इसके अलावा धूम्रपान से  लोगों का अकेलापन भी बढ़ता है. क्योंकि इससे निकोटिन दिमाग में डोपामाइन हारमोन के काम में दखल देता है.



और ये असर भी
इस अध्ययन में इस बात के प्रमाण पाए गए जो बताते हैं कि अकेले रहने में धूम्रपान के शुरुआत होने की ज्यादा संभावना होती है. साथ ही एक दिन में ज्यादा सिगरेट पीना भी बढ़ जाता है जबकि वहीं धूम्रपान छूटने की सफलता की संभावना भी कम हो जाती है.

lockdown updates
कई लोगों ने शिकायत की है कि लॉकडाउन केअकेलेपन की वजह से उन्हें स्वास्थ्य समस्या हो रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


अन्य प्रचलित रोगों के मुकाबले 30 गुना ज्यादा मौतें
यूके के स्मोकिंग एंड हेल्थ की पब्लिक हेल्थ चैरिटी एक्शन के प्रमुख कार्यकारी डेबोरा एर्नाट ने एक बयान में कहा, “यदि अकेले लोगों के धूम्रपान शुरू करने की संभावना ज्यादा होती है और उनके लिए इसे छोड़ना मुश्किल होता है, तो ऐसे में उन्हें धूम्रपान के ज्यादा नुकसान झेलने पड़ते हैं. धूम्रपान की वजह से लोग समय से जल्दी मर रहे हैं जिसे रोका जा सकता है और इनकी संख्या उन लोगों से 30 गुना ज्यादा है जो कैंसर हृदय और श्वास की बीमारियों से मर रहे हैं. शोध इस बात को रेखांकित करता है कि अकेलापन से पीड़ित घूम्रपान करने वालों को सहायता की जरूरत है जिससे वे न केवल अपना स्वास्थ्य सुधार सकें बल्कि अपना अकेलापन भी दूर कर सकें.

लॉकडाउन के महीने में बढ़ा अकेलापन
ब्रिटेन के नेशनल स्टैटस्टिक्स ऑफिस (ONS) के अनुसार लॉकडाउन के पहले महीने के दौरान करीब 74 लाख लोगों कहा था कि अकेलापन महसूस होने से उनके स्वास्थ्य पर असर हो रहा है. अकेले लोग बाकी लोगों की तुलना में मदद लेने या हासिल करके लिए ज्यादा संघर्ष करते हैं उन्हें यह महसूस करने में भी परेशानी होती है कि उन्हें मदद के लिए सहयोग तंत्र का सहारा है.

लॉकडाउन से बढ़ा यह खतरा
डॉ वूटोन का कहना है, “अचानक पूरा ब्रिटेन ही सामाजिक तौर पर अलग-थलग हो गया है. ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया. इससे अकेलापन बढ़ेगा. हम यह जानना चाहते थे कि अकेलापन धूम्रपान रोकने की संभावना को कम कर देता है. हमें लगता है कि यह उनके लोगों के लिए बहुत जरूरी हो सकता है जो इस महामारी के दौरान धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं.

Isolation
कोरोना वायरस के कारण लोगों के अकेले रहने की स्थितियां बहुत ज्यादा हो गई हैं.


 

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन का फायदा उन लोगों को होगा जो लोगों की धूम्रपान की आदत छुड़ाने में लगे हुए हैं. कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के कारण लोगों में अकेलापन तेजी से बढ़ा है. ऐसे में यह अध्ययन यह भी दर्शाता है कि लोगों का अकेलापन दूर कर एक दूसरे से बात करते रहना कितना जरूरी हो गया है.

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