अब उंगली की लंबाई से जांच सकेंगे कोरोना का खतरा, वैज्ञानिकों ने किया दावा

अब उंगली की लंबाई से जांच सकेंगे कोरोना का खतरा, वैज्ञानिकों ने किया दावा
जिन पुरुषों की अनामिका उंगली लंबी होती है, कोरोना से उनकी मौत का खतरा बहुत कम होता है (Photo-pixabay)

कोरोना वायरस (coronavirus) से हो रही मौतों के संबंध में वैज्ञानिकों ने हाल में एक सनसनीखेज खुलासा (scientists claim) किया. वे दावा कर रहे हैं कि जिन पुरुषों की अनामिका उंगली (ring finger) लंबी होती है, कोरोना से उनकी मौत का खतरा बहुत कम (low fatality rate) होता है.

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दिसंबर 2019 में चीन के वुहान (Wuhan in China) से शुरू हुआ कोरोना वायरस (coronavirus) अब दुनियाभर में फैल चुका है. वायरस के खतरे को देखते हुए वैज्ञानिक रोज इसके टीके (corona vaccine) पर काम कर रहे हैं. इसी दौरान वायरस की एक कई बात पता चली है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन पुरुषों की अनामिका उंगली की लंबाई ज्यादा होती है, वायरस से उनकी मौत का खतरा उतना ही कम (long ring finger decreases coronavirus fatality rate) हो जाता है. जानिए, क्या है इसकी वजह.

क्या बताती है स्टडी
ब्रिटेन की स्वानसी यूनिवर्सिटी (Swansea University) के वैज्ञानिकों ने इस स्टडी में 41 देशों के 2 लाख से ज्यादा मरीजों का डेटा लिया और उसकी जांच की. इसमें भारत से भी 2274 पुरुषों की केस स्टडी ली गई. इसमें पाया गया कि जिन पुरुषों की रिंग फिंगर छोटी होती है, उनमें कोरोना से मौत का खतरा 30% तक बढ़ जाता है. वहीं जिनकी रिंग फिंगर मिडिल फिंगर से खास छोटी नहीं है, उन्हें कोरोना होगा भी तो माइल्ड लक्षणों वाला होगा और मौत का डर काफी कम रहता है. बता दें कि ये वही यूनिवर्सिटी है जो इससे पहले भी पब्लिक हेल्थ को लेकर कई अहम रिसर्च कर चुकी है. आज से 100 साल पहले बनी इस यूनिवर्सिटी की कोरोना पर ये रिसर्च साइंस जर्नल Early Human Development में प्रकाशित हुई.

स्वानसी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस स्टडी में 41 देशों के 2 लाख से ज्यादा मरीजों का डेटा लिया (Photo-pixabay)




उंगली से बीमारी का क्या है संबंध


स्टडी में शामिल मुख्य रिसर्चर प्रोफेसर जॉन मैनिंग के मुताबिक रिंग फिंगर का संबंध टेस्टोस्टेरॉन से होता है, जो असल में एक मेल हार्मोन है. ये हार्मोन मां के गर्भ में पुरुषों में तैयार होता है. जिन पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन का प्रतिशत ज्यादा होता है, उनमें वायरस के संक्रमण का डर उतना ही कम रहता है. माना जा रहा है कि इस हार्मोन से शरीर में ACE-2 रिसेप्टर्स की संख्या तय होती है. अगर टेस्टोस्टेरॉन कम है तो ACE-2की संख्या कम होगी. वैज्ञानिक मानते हैं कि इन्हीं रिसेप्टर के जरिए वायरस शरीर में घुसता है. हालांकि वे यह भी मानते हैं कि रिसेप्टर्स की संख्या ज्यादा होने पर कोरोना हमले के बाद भी फेफड़ों को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचता है और मरीज में माइल्ड लक्षण ही रहते हैं.

देशों के हिसाब से खतरा कम-ज्यादा
वैसे उंगलियों की लंबाई के लिहाज से देखें तो अलग-अलग देशों में डेथ रेट अलग-अलग साफ दिखती है. कई देशों जैसे ब्रिटेन, बुल्गारिया और स्पेन जैसे देश, जहां के पुरुषों की रिंग फिंगर छोटी दिखी, वहां कोरोना के कारण पुरुषों की मौत की दर भी ज्यादा दिखी. वहीं रूस, मलेशिया और मैक्सिको में कोरोना के कारण पुरुषों में मौत की दर कम देखी गई, जहां के पुरुषों की उंगलियां लंबी ही होती हैं. द सन में इसपर एक विस्तृत रिपोर्ट आई है जो बताती है कि पूर्वी एशिया के देशों से लेकर न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रिया और ऑस्ट्रेलिया के पुरुषों की भी उंगलियां लंबी होने के कारण वहां कोरोना के कारण फेटलिटी रेट कम है.

जिन पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन का प्रतिशत ज्यादा होता है, उनमें संक्रमण का डर उतना ही कम रहता है (Photo-pixabay)


इस तरह से निकाली जाती है उंगली की लंबाई
इस दौरान वैज्ञानिकों ने मरीजों की तर्जनी और अनामिका उंगलियों की माप ली. इसके बाद अनामिका यानी रिंग फिंगर की लंबाई को तर्जनी की लंबाई से भाग दे दिया. नतीजे को डिजिट रेश्यो कहा गया. एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर ये रेश्यो कम (लगभग 0.976) है तो पुरुष मरीज के कोरोना से सुरक्षित रहने की संभावना ज्यादा है. बता दें कि ये रेश्यो कम उसी सूरत में आया है, जब रिंग फिंगर लंबी हो. वहीं ये रेश्यो ज्यादा आए तो कोरोना से खतरा बढ़ जाता है. वहीं महिलाओं की उंगलियों का कोरोना से संबंध नहीं दिखा इसलिए उन्हें अलग से बड़ी स्टडी में नहीं लिया गया.

फीमेल सेक्स हार्मोन फायदेमंद
वैसे इससे पहले भी वैज्ञानिक दावा कर चुके हैं कि महिलाओं का सेक्स हॉर्मोन (sex hormone) उन्हें इस खतरनाक वायरस से बचा रहा है. अमेरिका में इसपर स्टडी (study in America) हो रही है, जिसके तहत कोरोना मरीज पुरुषों में फीमेल सेक्स हार्मोन एक्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन डाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि हार्मोन के अलावा माना जा रहा है कि महिलाओं की जेनेटिक संरचना भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है. वैसे कोरोना वायरस पहली बीमारी नहीं, जो पुरुषों को ज्यादा प्रभावित कर रही है. श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों से पुरुषों की मौत की दर ज्यादा होने के कारण इन बीमारियों को "man flu" भी कहा जाता रहा है.

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