NASA के मंगल रोवर अभियान में कितना खास है Perseverance Rover प्रक्षेपण

NASA के मंगल रोवर अभियान में कितना खास है Perseverance Rover प्रक्षेपण
नासा का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल ग्रह पर अभूतपूर्व प्रयोग करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नासा (NASA) के पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) पिछले रोवरों से बहुत ही अलग है जिसे उसने अपने अगले मंगल अभियानों (Mars Missions) की तैयारी के लिए प्रक्षेपित किया है.

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नासा (NASA) के पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) का प्रक्षेपण हो चुका है. मंगल (Mars) के लिए नासा का यह एक महत्वाकांक्षी अभियान है. यह एक संयोग ही है जब इसी महीने यूएई (UAE) और चीन (China)ने भी अपने अंतरिक्ष यान (Spacecraft) मंगल के लिए प्रक्षेपित किए हैं, जिसमें चीन के अंतरिक्ष यान के साथ उसका रोवर भी गया है जो मंगल की सतह पर उतरेगा. फिर भी नासा का पर्सिवियरेंस रोवर कई लिहाज से बहुत खास है जबकि इससे पहले से ही नासा के कुछ रोवर मंगल की सतह पर घूम चुके हैं.

23 साल पहले शुरू हुआ था यह सिलसिला
नासा की मंगल के लिए रोवर अभियानों  की शुरुआत साल 1997 में मार्स पाथफाइंडप मिशन से हुई थी. इस मिशन के जरिए नासा ने मंगल पर पहला रोवर उतारा था. सोजर्नर नाम के इस रोवर से लोगों को बहुत आशा नहीं थी क्योंकि इसका बजट बहुत कम था. कई लोगों को लगा कि यह फेल हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इस अभूतपूर्व सफलता से उत्साहित होकर नासा ने साल 2003 में दो रोवर मंगल पर भेजे, स्पिरिट और ऑपर्च्युनिटी नाम के इन रोवर के बाद नासा ने साल 2012 में एक और उन्नत क्यूरियोसिटी नाम का रोवर मंगल पर भेजा. अब नासा पर्सिविरेंस का प्रक्षेपण करने जा रहा है.

क्या फर्क था इन रोवर्स में
एक फीट लंबा चौड़ा एक खिलौने की तरह दिखने वाला रोजर्नर रोवर मंगल पर 83 दिन तक काम कर सका. इसके बाद स्पिरिट और ऑपर्च्युनिटी रोवर गोल्फ कार्ट के आकार थे जो क्रमशः 6 और 15 साल तक के लिए काम कर गए.  2012 में लैंड हुआ छोटी कार के आकार का क्यूरियोसिटी अब भी सुचारू रूप से काम कर रहा है. पर्सिविरियरेंस का आकार भी एक छोटी कार के बराबर है.







क्यों अंतरिक्ष यानों से बेहतर होते हैं रोवर
रोवर अंतरिक्ष यानों के मुकाबले इस लिहाज से बेहतर होते हैं क्योंकि वे ग्रह की सतह के नजदीक होते हैं और ज्यादा सटीक और साफ तस्वीरें ले सकते हैं. इसके उपकरण ग्रह की सतह पर गड्ढा कर उसकी भी तस्वीरें ले सकते हैं जिससे ग्रह की भूगर्भीय अध्ययन के लिए जरूरी आंकड़े मिल सकते हैं और साथ ही स्पेक्ट्रोमीटर्स से लेकर माइक्रोस्कोपिक इमेजर्स भी ऐसी तस्वीरें ले सकते हैं जो कि अंतरिक्षयान के  लिए मुमकिन नहीं हो सकता. इसके अलावा स्पिरिट और ऑपर्च्युनिटी रोवर में मोबाइल मौसम स्टेशन भी लगाए गए हैं जो मंगल के वायुमंडल की लगातार जानकारी दे रहे हैं.

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क्या नया है पर्सवियरेंस में
नासा ने हर नए रोवर को उन्नत कर उसमें नई क्षमताएं जोड़ी है. ऐसा ही कुछ पर्सिवियरेंस के साथ भी है. लेकिन उसमें कुछ खास उपकरण भी जोड़े गए हैं. इनमें से कई उपकरण यानि इन सीटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन (ISRU, In Situ Resource Utilization) प्रयोग से संबंधित हैं यानि वे प्रयोग जिनसे मौके की संसाधनों का उपयोग किया जा सके. इसके तहत मंगल पर ऑक्सीजन बनाने के लिए मॉक्सी (MOXIE or Mars Oxygen ISRU Experiment) सबसे खास उपकरण है जो मंगल की कार्बन डाइऑक्साइड से ही ऑक्सीजन का निर्माण करेगा.

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नासा का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल पर इंसान के जाने की तैयारी का हिस्सा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


मंगल की मिट्टी
इसके साथ नासा का इंजेन्यूटी (Ingenuity) नाम का ड्रोन के जैसा हेलीकॉप्टर भी मंगल के हालातों में उड़ान भरने का प्रयोग करेगा. इसकी आगे के अभियानों के लिए बहुत ज्यादा अहमियत है. नासा के लिए पर्सिवियरेंस का सबसे अहम प्रयोग मंगल से मिट्टी के नमूने जमा करना है जिन्हें पृथ्वी पर लाने के लिए अलग से तैयारी चल रही है. इससे मंगल पर जीवन है या कभी रहा था या नहीं जैसे कई सवालों पर अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है. पर्सिवियरेंस का एक काम मंगल की जमीन के नीचे पानी की तलाश करना भी है.

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सब जानते हैं कि नासा की योजना अगले दशक में मंगल पर इंसान भेजने की है.  पर्सिवियरेंस इसी की तैयारी की अहम हिस्सा है. मंगल पर इंसान भेजने से पहले नासा लंबे समय तक इंसानों के ठहराने के लिए हालात भी बनाना चाहता है.  साल 2024 तक वह आर्टिमिस मिशन के जरिए एक पुरुष और एक महिला को चंद्रमा पर भी भेजने की तैयारी कर रहा है.
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