14 मिनट तक हवा में रह सकते हैं जोर से बोलने पर निकलने वाले ड्रॉपलेट्स

एक व्‍यक्ति सामान्‍य तौर पर बात करते समय एक मिनट में कम से कम 1,000 ड्रॉपलेट्स सांस के साथ हवा में छोड़ता है.
एक व्‍यक्ति सामान्‍य तौर पर बात करते समय एक मिनट में कम से कम 1,000 ड्रॉपलेट्स सांस के साथ हवा में छोड़ता है.

शोधकर्ताओं ने नए अध्‍ययन (New Study) में पाया है कि अगर कोई व्‍यक्ति जोर से बोलता है तो एक मिनट में 1,00,000 तक ड्रॉपलेट्स हवा में छोड़ सकता है. इनमें कोरोना वायरस (Coronavirus) भी हो सकता है. ये ड्रॉपलेट्स कम से कम 8 मिनट तक हवा में रहने के बाद किसी सतह पर पहुंचते हैं.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है. हर दिन हजारों की संख्‍या में लोग इस वायरस की चपेट में आकर बीमार हो रहे हैं. वहीं, रोज हजारों लोगों की मौत हो रही है. इस बीच वैज्ञानिक और शोधकर्ता इससे जुड़े हर पहलू का बारीकी से अध्‍ययन कर रहे हैं. एक नए शोध (New Study) में पता चला है कि अगर कोई व्‍यक्ति जोर से बात करता (Loud Speech) है तो उसके मुंह से निकलने वाले हजारों ड्रॉपलेट्स (Droplets) 14 मिनट तक हवा में टिके रह सकते हैं.

सामान्‍य तौर पर बात करने पर सांस के साथ बाहर निकलने वाले रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स 8 मिनट तक हवा में रह सकते हैं. यानी इतनी देर बाद ही रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स धूल कणों के साथ किसी सतह पर पहुंचेंगे. शोध रिपोर्ट में कहा गया है, 'अस्‍पताल, नर्सिंग होम, कांफ्रेंस रूम, सुपरस्‍टोर, क्रूज शिप जैसी जगहों पर मौजूद लोगों में कोरोना वायरस फैलने की एक वजह ये भी हो सकती है.'

बोलते समय एक मिनट में बाहर आते हैं कम से कम 1,000 ड्रॉपलेट्स
शोधकर्ताओं ने इस अध्‍ययन में कोरोना वायरस या किसी दूसरे वायरस के हवा में रहने को लेकर पड़ताल नहीं की थी. शोध में सिर्फ ये देखा गया कि लोग बोलने पर कैसे रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स (Respiratory Droplets) पैदा करते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज और पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में प्रकाशित रिपोर्ट एक प्रयोग पर आधारित है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़-भाड वाली जगहों और कार्यक्रमों के कारण वायरस छोटे एयरोसॉल के जरिये फैल सकता है.




इस अध्‍ययन में इंसानों के बोलते समय सांस के साथ मुंह से निकलने वाली हजारों ड्रॉपलेट्स पर शोध करने के लिए एक लेजर लाइट का इस्तेमाल किया गया था. शोधकर्ताओं ने पाया कि जोर से बोलने वाला व्‍यक्ति एक मिनट में कम से कम 1,000 ड्रॉपलेट्स निकलता है, जिनमें वायरस भी हो सकता है.

भीड़-भाड वाली जगहों पर आसानी से फैल सकता है कोरोना वायरस
एमआईटी टेक्‍नोलॉजी रिव्‍यू की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने यह अध्‍ययन लैब के माहौल में किया है. अध्‍ययन में वास्‍तविक मौसम की तरह तापमान और आर्द्रता में होने वाले बदलाव का ध्‍यान नहीं रख गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, अत्यधिक संवेदनशील लेजर लाइट के ऑब्जर्वेशन से पता चला है कि जोर से बोलने पर मुंह से प्रति सेकेंड हजारों ड्रॉपलेट्स निकल सकते हैं.

पिछले अध्‍ययन में सामने आया था कि दक्षिण कोरिया (South Korea) के एक कॉल सेंटर में कोरोनो वायरस से काफी लोग प्रभावित हुए थे. इसी तरह के हालात चीन (China) के भीड़-भाड वाले रेस्‍टोरेंट्स के भी थे. विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़-भाड वाली जगहों और कार्यक्रमों के कारण वायरस छोटे एयरोसॉल के जरिये फैल सकता है. अध्ययन में पाया गया कि जोर से बोलने पर निकलने वाले ड्रॉपलेट्स काफी देर तक हवा में रहते हैं.

जोर से बोलने वाला व्‍यक्ति एक मिनट में 1,00,000 तक संक्रमित ड्रॉपलेट सांस के साथ बाहर निकाल सकता है.


बोलते समय छोड़ सकता है 1,00,000 से ज्‍यादा संक्रमित ड्रॉपलेट्स
शोध में पाया गया कि छोटे रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स में संक्रमण फैलाने के पर्याप्त कण हो सकते हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक, सीधे तौर पर यह नहीं कह सकते कि ड्रॉपलेट्स के कारण कोरोना वायरस फैल रहा है, लेकिन फेस मास्क नहीं पहनने वालों के संक्रमित होने का जाखिम ज्‍यादा होने के स्‍पष्‍ट संकेत मिल रहे हैं. कोरोना वायरस के फैलने में खांसने और छींकने को सबसे ज्‍यादा अहम माना जा रहा था. अब ये कहा जा सकता है कि संक्रमित व्‍यक्ति बोलते समय भी कोरोना वायरस को फैला सकता है.

अध्‍ययन में देखा गया कि एक व्‍यक्ति बोलने के दौरान कितने ड्रॉपलेट्स निकालता है और वे कितनी देर तक हवा में टिके रहते हैं. इस दौरान शोधकर्ताओं से बार-बार एक ही वाक्‍य दोहराने को कहा और इस दौरान निकलने वाले ड्रॉपलेट्स का आकलन लेजर के जरिये किया. शोधकर्ताओं के मुताबिक, एक संक्रमित व्‍यक्ति बोलने पर एक मिनट में 1,00,000 से भी ज्‍यादा ड्रॉपलेट्स हवा में छोड सकता है.

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