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क्या बकवास है LOVE JIHAD का दावा? पुलिस साबित करने में हमेशा रही नाकाम

News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 12:55 PM IST
क्या बकवास है LOVE JIHAD का दावा? पुलिस साबित करने में हमेशा रही नाकाम
साल 2009 से भारत में लव जिहाद टर्म सुर्खियों में आया. हिंदू और ईसाई संगठनों के आरोपों ने इसे देश भर में खबरों में ला दिया था.

हाल ही में केरल (Kerala) के एक चर्च (Church) ने दावा किया है कि ईसाई महिलाओं (Christian women) को फंसाकर आतंकी बनाने की कोशिश हो रही है.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 12:55 PM IST
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भारत में लव जिहाद (LOVE JIHAD) के सुर्खियां बनने की शुरुआत साल 2008-09 में हुई थी. आरोप लगाने वालों में हिंदू और ईसाई संगठन शामिल थे. केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल ने आरोप लगाया था कि बीते सालों में 4500 ईसाई लड़कियों को लव जिहाद के जरिये निशाना बनाया गया, जबकि हिंदू जनजागृति समिति का कहना था कि 30 हजार हिंदू लड़कियां अब तक लव जिहाद का शिकार हो चुकी हैं. केंद्र में तब यूपीए की सरकार थी और हंगामा पूरे देश में मचना शुरू हो गया. लेकिन नवंबर 2009 में केरल के DGP जैकब पनोसे ने कोर्ट में स्पष्ट कहा कि पुलिसिया जांच में ये आरोप निराधार साबित हुए हैं. हालांकि वो इस बात का सबूत नहीं दे पाए कि ऐसा बिल्कुल नहीं हो रहा है. सूबतों के अभाव में पुलिस जांच जारी रखी गई.

पूरे मामले को हवा तब मिल गई जब केरल हाईकोर्ट के जस्टिस के.टी. शंकरन ने डीजीपी की रिपोर्ट स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि जबरिया धर्म परिवर्तन के कुछ इशारे मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसमें कुछ संस्थाओं का हाथ भी हो सकता है. हालांकि बाद में केरल हाईकोर्ट के ही जस्टिस एम. शशिधरन नांबियार ने डीजीपी पनोसे की रिपोर्ट को आधार बनाकर जांच को बंद कर दिया.

इसके बाद 2010 में कर्नाटक सरकार ने साफ किया कि कई महिलाओं के इस्लाम धर्म स्वीकार करने की खबरें तो आई हैं, लेकिन इसके पीछे कोई सांगठनिक प्रयास नहीं दिखता. फिर केरल पुलिस ने एक वेबसाइट पर केस भी दर्ज किया जिस पर फेक पोस्टरों में बताया जा रहा था कि कैसे मुस्लिम युवा दूसरे धर्म की लड़कियों को फंसाते हैं. ये अफवाहबाजी के खिलाफ पुलिस की पहली कार्रवाई थी.



साल 2014 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी लव जिहाद को लेकर काफी हो हल्ला मचा था. लेकिन पुलिस ने यहां भी टका सा जवाब दिया कि उसके पास आए 6 में से 5 मामलों में लव जिहाद जैसी कोई बात नहीं है. पुलिस ने कहा था कि अगर कुछ पुरुषों द्वारा महिलाओं को झूठ बोलकर फंसाया भी जा रहा है तो भी ये किसी बड़े षड्यंत्र की तरफ इशारा नहीं करता.

केरल की हदिया और लव जिहाद का केस
भारत में लव जिहाद के मामले में सबसे ज्यादा चर्चित मामला हदिया केस है. इसके केस से लव जिहाद के दुष्प्रचार की कलई खुल गई थी. हदिया का हिंदू नाम अखिला अशोकन था और वो होमियोपैथी की डॉक्टर है. होमियोपैथी की पढ़ाई के दौरान ही वो अपनी दो दोस्तों जसीना और फसीना के जरिए वो इस्लाम धर्म के संपर्क में आई थी. इस्लाम से जुड़ी कई धार्मिक किताबें पढ़ने के बाद उसने साल 2015 में खुद को आसिया कहना शुरू कर दिया.जब उसने अपने घर पर ये बात बताई तो मां-बाप काफी नाराज हुए, लेकिन आसिया नहीं मानी और उसने आधिकारिक तौर पर अपना नाम हदिया रख लिया. बाद में उसने शफीन जहां नाम के एक युवक से शादी कर ली. हदिया के पिता अशोकन को ये बात नागवार गुजरी और उन्होंने कोर्ट में केस दायर कर दिया. उनका आरोप था कि हदिया को सांगठनिक प्रयास के जरिए फंसाया गया है. हदिया अपने पिता की बातों का लगातार विरोध करती रही. इसके बावजूद भी केरल हाईकोर्ट ने उसकी कस्टडी पिता के हाथों में दे दी.

इसके बाद हदिया का पति शफीन मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट में हदिया की गवाही हुई. और फिर हदिया और शफीन को साथ रहने की इजाजत मिली. हालांकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में एक सिमिलर पैटर्न होने की बात कही थी, इस वजह से उसे लव जिहाद के मामलों तफसील से जांच की जिम्मेदारी भी सौंप गई. एनआईए को अंतर धार्मिक विवाह का उद्देश्य और साजिश जैसे बिंदुओं पर जांच करने और रिपोर्ट फाइल करने का आदे​श दिया गया. यह आदेश तत्कालीन सीजेआई जेएस खेहर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने दिया था. बाद में इस जांच को भी बंद कर दिया गया.

अपने पति शफीन के साथ हदिया


ईसाई और हिंदू संगठन अक्सर उठाते हैं मुद्दा
केरल से शुरू हुआ लव जिहाद के आरोपों का मामला धीरे-धीरे पाकिस्तान और इंग्लैंड तक भी फैल गया है. पाकिस्तान में कई सिख संगठनों ने लड़कियों के जबरिया धर्म परिवर्तन के मामले उठाए हैं. इंग्लैंड में भी ऐसे आरोप लगे हैं. लेकिन कहीं भी पुलिस इसे साबित नहीं कर पाती है. लव जिहाद के हर मामले की सिर्फ एक कहानी है कि धार्मिक संगठन आरोप लगाते हैं और पुलिस कोर्ट में साफ कर देती है कि ऐसा कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है.

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First published: January 22, 2020, 12:06 PM IST
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