बापू के बेटे की लव स्टोरी, जब गांधीजी को प्यार के आगे झुकना पड़ा

गांधीजी अपने सार्वजनिक जीवन के शुरुआती वर्षों में अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह के खिलाफ थे. लेकिन उस वक्त उन्हें झटका लगा, जब उनके ही छोटे बेटे देवदास ने लक्ष्मी के साथ प्यार होने और उससे शादी करने की बात कही. लक्ष्मी सी राजगोपालाचारी की बेटी थीं.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: August 3, 2019, 8:54 AM IST
बापू के बेटे की लव स्टोरी, जब गांधीजी को प्यार के आगे झुकना पड़ा
बापू के सामने उनके सबसे छोटे बेटे देवदास गांधी ने सी राजगोपाली चारी की बेटी से अपने प्यार का इजहार किया था
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: August 3, 2019, 8:54 AM IST
महात्मा गांधी के विचार शादी को लेकर थोड़े अलग थे. अपने सार्वजनिक जीवन के शुरुआती वर्षों में तो वो अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह के खिलाफ रहे. लेकिन खुद उनके परिवार में एक ऐसा वाकया हुआ कि बापू को अपने विचार बदलने पड़े. गांधीजी उस वक्त चौंक गए थे, जब उनके छोटे बेटे देवदास ने बताया था कि वो दक्षिण भारतीय ब्राह्मण लड़की के प्यार में हैं और उसी से शादी करना चाहते हैं. बापू ने शुरुआती दौर में इस शादी को रोकने की कोशिश भी की लेकिन बाद में बेटे के प्यार के आगे उन्हें झुकना पड़ा और अनुमति भी देनी पड़ी.

देवदास का जन्म साउथ अफ्रीका में हुआ था. वो जब अपने माता-पिता के साथ भारत आए तब तक युवा हो चुके थे. युवा देवदास को यहां लक्ष्मी से प्यार हो गया. देवदास तब 28 साल के थे और लक्ष्मी 15 की. लक्ष्मी अक्सर गांधीजी के वर्धा आश्रम में रहती थीं. इसी दौरान वो दोनों करीब आए. लक्ष्मी के पिता कोई साधारण शख्स नहीं थे बल्कि वो दक्षिण भारत में कांग्रेस की राजनीति के बड़े दिग्गज भी थे और गांधीजी के अभिन्न सहयोगी और करीबी मित्र भी. उनका नाम था सी. राजगोपालाचारी.

गांधीजी थे शादी के विरोध में
जब देवदास ने अपनी इच्छा पिता को बताई तो ना केवल गांधीजी सन्न रह गए बल्कि राजगोपालाचारी को भी झटका लगा. ना गांधी इस शादी के पक्ष में थे और ना ही राजगोपालाचारी. 1920 के दशक में गांधी खुले तौर पर कई बार अंतरजातीय और अतंरधार्मिक विवाह के खिलाफ बोल चुके थे. वो ऐसी शादियों को हिंदू धर्म और समाज दोनों के लिए अच्छा नहीं मानते थे. हालांकि दस साल बाद ही उनका मन बदल गया. उन्होंने अंतर धार्मिक विवाहों तक का समर्थन शुरू कर दिया. ऐसी कई शादियों को अपना आशीर्वाद भी दिया.

गांधीजी नहीं बल्कि सी राजगोपालाचारी भी इस शादी के खिलाफ थे (सौजन्य - विकीकॉमंस मीडिया)


बनिया का लड़का कैसे ब्राह्मण लड़की से शादी कर सकता है
बात 1927 की करते हैं. देवदास जब विवाह प्रस्ताव लेकर पिता के पास पहुंचे तो स्तब्ध पिता ने कहा, बनिया जाति का लड़का कैसे ब्राह्मण लड़की से शादी कर सकता है.
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देवदास को बेशक राजगोपालाचारी पसंद करते थे लेकिन उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि वो नहीं चाहेंगे कि लक्ष्मी की शादी वो इस तरह करें. ये दोनों फैसले देवदास के लिए आघात देने वाले थे. उनकी स्थिति विक्षिप्त जैसी हो गई. उन्हें रात दिन केवल लक्ष्मी नजर आती थी. वहीं लक्ष्मी खुद अपने पिता के फैसले के खिलाफ कतई जाने को तैयार नहीं थीं.

देवदास गांधी अपने ससुर राजगोपालाचारी के साथ (फाइल फोटो)


गांधीजी ने पत्र लिखा
अब क्या किया जाए. देवदास की हालत गांधीजी से भी देखी नहीं जा रही थी. उन्होंने इसे लेकर एक पारिवारिक मित्र को पत्र लिखा, जिसका देवदास पर भी असर था और वो राजगोपालाचारी के भी करीब था.
गोपालकृष्ण गांधी की किताब "माई डियर बापूः लेटर्स फ्राम सी राजगोपालाचारी टू मोहनदास करमचंद गांधी " में इस पत्र के बारे में बताया गया है, ये पत्र सुरेंद्र को लिखा गया था,

"लक्ष्मी पर तो कोई असर नहीं पड़ा है लेकिन देवदास की हालत जरूर खराब है. वो बार बार लक्ष्मी का नाम लेता है. राजाजी भी इसके पक्ष में नहीं हैं. अगर देवदास इतना नाम भगवान का ले तो संत बन जाएगा. वो मेरी बात मान तो रहा है लेकिन उसकी आत्मा उससे विद्रोह कर रही होगी. उसे लग रहा होगा कि मैं इस शादी के खिलाफ खड़ा हो गया हूं. इसलिए वो मुझसे नाराज भी हो रहा होगा." 

"मैं नहीं जानता कि फिलहाल वो कब इस हाल से निकलेगा, कोशिश करो कि तुम उसकी मदद कर सको. उसे शांत करो. उसे अपने धर्म के बारे में बताओ. हो सकता है कि मैं उसे समझ नहीं पाया हूं और मुझसे अन्याय हुआ हो, देखो तुम उसे कैसे शांत कर सकते हों. मैं उसे भी एक पत्र लिख रहा हूं. उसके दिमाग में जो लालसाएं पल रही हैं, वो बहुत सी बीमारियों की जड़ हो सकती हैं. अशुद्ध लालसाएं व्यक्ति को खत्म कर देती हैं." 

गांधीजी ने इसी पत्र में आगे लिखा, "प्यार करना खराब नहीं लेकिन उसका दिमाग यौन लालसाओं से भरा है. अभी वो इसे साफतौर पर नहीं देख पा रहा है लेकिन सेक्सुअल लालसाएं उसे खत्म कर देंगी. "

देवदास गांधी (फाइल फोटो)


पांच साल दूर रहने को कहा
गांधीजी ने ये पत्र श्रीलंका से लिखा था. इस बीच उनका पत्राचार सी राजगोपालचारी से भी हुआ. दोनों में ये सहमति बनी कि फिलहाल इस शादी को टालने के लिए देवदास के सामने पांच साल तक लक्ष्मी से दूर रहने और उससे कोई संपर्क नहीं रखने की शर्त रख देते हैं. अगर तब तक भी दोनों टस से मस नहीं होते तो फिर तब देखा जाएगा कि क्या करें.

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जब गांधीजी श्रीलंका से लौटे तो ओडिशा के टूर पर चले गए. उसके साथ गईं बा वर्धा आश्रम आ गईं, जहां देवदास थे. देवदास का ऑपरेशन हुआ था. बा अपने बेटे की तीमारदारी में जुट गईं. वैसे बा खुद भी अंतरजातीय विवाह के पक्ष में नहीं थीं.

गांधीजी ने मन बदला तो राजगोपालाचारी भी हुए सहमत
देवदास ने पांच साल वाकई खुद को लक्ष्मी से एकदम अलग रखा. लक्ष्मी अगर गांधीजी के आश्रम में आती भी थीं तो देवदास उनसे नहीं मिलते थे. इस बीच अंतरजातीय विवाह को लेकर गांधीजी का नजरिया भी बदल चुका था.

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अब वो मानने लगे थे कि विवाह में ऐसी पाबंदियां हिंदू धर्म को कमजोर ही करेंगी, लिहाजा हमें इन दीवारों को तोड़ना चाहिए. चूंकि गांधीजी ने मन बदल लिया था, लिहाजा राजगोपालाचारी ने भी इस शादी का विरोध खत्म कर दिया. वो भी देवदास को दामाद के रूप में देखने लगे.

पांच साल अलग रहने के बाद आखिर देवदास और लक्ष्मी की शादी हो गई (फाइल फोटो)


सादे तरीके से हो गई शादी
जून 1933 में आखिर गांधीजी और राजगोपालाचारी ने दोनों का विवाह करने का फैसला किया. देवदास और लक्ष्मी के लिए इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती थी. गांधीजी अब अपने बेटों की शादी में तमाम पाबंदियां लगाते आए थे लेकिन इस बार उनका रुख भी बदल चुका था.

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रही बात कस्तूरबा गांधी यानि बा की, तो उन्होंने अपनी पुरानी मान्यताओं को किनारे रखकर इस शादी पर रजामंदी दे दी थी. बाद में बा दिल्ली में ज्यादातर देवदास और लक्ष्मी के घर पर ही रहती थीं.

देवदास हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक बने
शादी पुणे में हुई. सादे तरीके से हुई. इसमें दोनों परिवारों के अलावा कांग्रेस के कुछ सीनियर लीडर्स भी मौजूद थे. शादी के बाद देवदास और लक्ष्मी का जीवन अच्छा गुजरा लेकिन 57 साल की उम्र में 3 अगस्त 1957 को देवदास की मृत्यु हो गई. इससे पहले वो हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक रहे. एक पत्रकार के तौर पर लोग उनकी तारीफ करते थे.

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देवदास का परिवार
देवदास के तीन बेटे और एक बेटी थीं-गोपालकृष्ण गांधी, राजमोहन, रामचंद्र और तारा गांधी. गोपालकृष्ण बंगाल के राज्यपाल थे. वो वैंकेयानायडु के खिलाफ यूपीए के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

राजमोहन लेखक और पत्रकार रहने के साथ राज्यसभा के सदस्य भी रहे. रामचंद्र गांधी दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर थे. वहीं बड़ी बेटी तारा ने अर्थशास्त्री ज्योति भट्टाचार्य से शादी की. वो गांधी स्मृति से जुड़ी हुई हैं. गांधीजी की तीसरी और चौथी पीढ़ी में लव मैरिज बहुत सामान्य रही. उनके कई पड़पोते और पड़पोतियों ने विदेशों में भी शादियां कीं.

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First published: August 3, 2019, 8:54 AM IST
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