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नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी की प्रेम कहानी, जब उन्हें अपनी ही स्टूडेंट से प्यार हो गया

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: October 16, 2019, 7:21 AM IST

उनकी पहली शादी अपने बचपन के प्यार से हुई, जिसे वो बेतरह चाहते थे लेकिन फिर ऐसा लव त्रिकोण बना कि पहली पत्नी से उनका तलाक हुई और फिर दूसरी शादी. अब वो और उनकी मौजूदा पत्नी इकोनॉमिक्स में कपल के रूप में पहले नोबल अवार्ड विजेता हैं

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  • Last Updated: October 16, 2019, 7:21 AM IST
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ऐसा बहुत कम होता है कि पति और पत्नी दोनों को नोबेल पुरस्कार  (Nobel Awards for Economics) मिले. अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee ) और ईस्थर डफलो (Esther Duflo ) पहले पति-पत्नी हैं, जिन्हें इकोनॉमिक्स में पहली बार कपल के रूप में ये अवॉर्ड मिला. लेकिन अभिजीत और डफलो की अपनी एक प्रेम कहानी (Love Story of Abhijit Banerjee and Eshther Duflo) भी है. इस लव स्टोरी का एक ट्राएंगल भी है. अभिजीत को अपनी ही स्टूडेंट से प्यार हो गया. फिर पति, पत्नी और वो के त्रिकोण में पहली पत्नी ने उन्हें तलाक़ दे दिया.

ये कहानी फिल्मों सरीखी है. खासकर इसलिए अनोखी भी है क्योंकि उनकी पहली पत्नी उनका बचपन का प्यार थीं यानि स्कूल में साथ-साथ पढ़ते वो करीब आए थे. अभिजीत बहुआयामी प्रतिभा वाले इकोनॉमिस्ट हैं. वो सुदर्शन व्यक्तित्व वाले हैं.

उन्होंने लोगों के इकोनॉमी देखने और समझने का तरीका बदला. साथ ही इकोनॉमिक्स को केवल थ्योरी के तौर पर किताबों और बड़ी बड़ी बातो में नहीं रखकर गरीबों तक ले गए. खुद इसे एक अभियान भी बनाया.

अभिजीत 58 साल के हैं और उनकी पत्नी ईस्थर डफलो 46 की यानि उम्र में 12 साल का फासला. आप कह सकते हैं कि अभिजीत के जीवन से दो प्रेम कहानियां जुड़ी हुई हैं. दोनों अपने आप में खास और विशिष्ट हैं. दोनों प्रेम कहानियों की अपनी खासियतें, लगाव, भावनाएं, उतार-चढ़ाव और दर्द हैं.



तब वो 21 साल की थी और कुछ यूं महसूस किया 
ईस्थर ने उनके जीवन में 1994 में दस्तक दी. वो फ्रांस से आई थीं. अभिजीत मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर थे. स्टूडेंट्स के चहेते प्रोफेसर. उनकी क्लास में बैठने वाले स्टूडेंट आमतौर पर उनके कायल रहते हैं.1994 में डफलो 21 साल की थीं. वो पहली बार अभिजीत सर की क्लास में आईं तो उनका अनुभव ऐसा था मानो इससे सुखद उनकी जिंदगी अब तक कुछ हुआ ही नहीं हो.

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उन्होंने कहीं लिखा भी, "ये पहली क्लास अनोखी थी. इकॉनोमिक्स को इस तरह पढ़ाया और समझाया जाता है. गरीबों के लिए भी इसके कितने खास मायने हैं, ये मुझे पहली बार महसूस हुआ.  ये लगा कि अभिजीत सर किस कदर अलग हैं. जीवंत प्रोफेसर."

ब्रिलिएंट स्टूडेंट और जीनियस प्रोफेसर करीब आने लगे
इसके बाद तो ईस्थर उनकी क्लास की नियमित स्टूडेंट बन गईं. चूंकि ईस्थर खुद ब्रिलिएंट थीं, लिहाजा वो अभिजीत से जिस स्तर पर जाकर तर्क करती थीं या उनसे सवाल-जवाब करती थीं. वो भी खास ही था. फिर ईस्थर को खास स्टूडेंट बनने में देर नहीं लगी.

1994 में ईस्थर पहली बार एक स्टूडेंट के रूप में प्रोफेसर अभिजीत की क्लास को अटेंड करने आईं. पहली बार में ही अभिजीत से बेतरह प्रभावित हो गईं


ये भी कहा जा सकता है कि अभिजीत खुद इस छात्रा से प्रभावित हो चुके थे और छात्रा के लिए तो वो ऐसे चुंबक बन गए, जिसकी ओर वो लगातार खिंचती चली आ रही थी.

उस भारत दौरे ने दोनों को करीब ला दिया 
ना जाने कैसे 1997 में अभिजीत अपने देश भारत आने वाले थे. अपने घर कोलकाता जाने वाले थे. जब ईस्थर को पता लगा, तो उसने तपाक से कहा, मैं भी भारत घूमना चाहती हूं. कोलकाता तो खासतौर पर. मैने बचपन में टिनटिन की कॉमिक्स में कोलकाता को देखा है. मैं तो बगैर गए ही उस शहर से प्यार करने लगी हूं. ईस्थर की ओर से ये खास प्रस्ताव भी था और प्रोफेसर अभिजीत के लिए विचलन का मोड़ भी. क्योंकि उन्हें भी अंदाज था कि इसके बाद क्या होने वाला है.

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1997 में ईस्थर और अभिजीत भारत आए. कोलकाता में घूमे. ईस्थर यहां अभिजीत के पेरेंट्स से मिलीं. उनके दोस्तों से मिलीं. वो यहां उनके गाइड थे. इंडिया टूर ने उन्हें आपस में और खोला. और करीब लाया. और समय साथ बिताने का मौका दिया. ये दोनों के जीवन में तूफान भी लाने वाला था और नए घुमाव भी.

1997 में भारत दौरे में दोनों और करीब आ गए. इसके बाद अभिजीत की शादी में दरार पड़नी शुरू हो गई


जीवन की पहली प्रेम कथा 
अब यहीं पर ये मौका भी है कि अभिजीत बनर्जी के जीवन की पहली प्रेम कथा का जिक्र किया जाय. क्योंकि ये भी आवश्यक और नितांत जरूरी हिस्सा है. वो मुंबई में पैदा हुए थे. वहां वो अक्सर गरीबों की बच्चों के साथ फुटबॉल खेलते थे. उसके बाद उनके पेरेंट्स कोलकाता चले गए. उनके माता और पिता दोनों बड़े अर्थशास्त्री रहे हैं. मां निर्मला बनर्जी और पिता दीपक बनर्जी. शायद इकोनॉमिक्स को अपने जीवन में अभिजीत ने उन्हीं से आत्मसात किया.

वैसे वो अगर इकोनॉमिस्ट नहीं बनते तो बहुत से करियर में जा सकते थे, वो शेफ से लेकर फिल्म मेकर, सोशल वेलफेयर, राइटर और एकेडमिशियन कुछ भी हो सकते थे. कोलकाता के साउंथ प्वाइंट स्कूल में वो पढ़ने गए. यहीं उनके साथ पढ़ती थीं अरुधंती तुली. दोनों स्कूल में अच्छे दोस्त बने. फिर दोनों ने उच्च शिक्षा के लिए एमआईटी जाने का फैसला किया. दोनों वहीं प्रोफेसर भी बन गए. दोनों के बचपन का प्यार यहीं पर शादी में बदला. अरुंधति अब भी एमआईटी में सीनियर पोजिशन में हैं.

तब बचपन के प्यार के साथ रिश्तों में आने लगी दरार 
1997 में जब अभिजीत भारत गए और ईस्थर को भी साथ ले गए तो अरुंधति के साथ रिश्तों में खिंचाव आना ही था. सो आया भी. स्त्री मन यूं पुरुष साथी के दिलोदिमाग में चल रही हलचल को ज्यादा पढ़ लेता है. पति-पत्नी के बीच दरार आने लगी थी लेकिन शायद दूरियां तब पुख्ता तौर पर बन गईं जबकि 1999 में ईस्थर ने एमआईटी में रिसर्च करने का फैसला किया और प्रोफेसर अभिजीत के अंडर में ऐसा करने का फैसला किया.

अभिजीत बनर्जी की पहली पत्नी अरुंधति उनके साथ कोलकाता के स्कूल में पढ़तीं थीं. बाद में दोनों को प्यार हो गया. वो अब मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी में सीनियर पोजिशन पर हैं


फिर पहली पत्नी से तलाक 
अरुंधति इस स्थिति को रोकने की कोशिश जरूर की लेकिन उन्हें लग गया कि शायद वो ऐसा अब कर नहीं पाएंगी. लिहाजा उन्होंने अपने बचपन के प्यार और पति दोनों को बॉय-बॉय बोलते हुए तलाक ले लिया. हालांकि अभिजीत और अरुंधति का एक बच्चा था लेकिन पिछले दिनों उसका निधन हो गया.

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दूसरी प्रेम कहानी रफ्तार पकड़ने लगी
इस तरह एक प्रेम कहानी के अवसान पर दूसरी प्रेम कहानी गति पकड़ने लगी. अभिजीत और डफलो यकीनन विलक्षण थे. अगर दो उर्वरा दिमाग वाले इकोनॉमिस्ट जीवन में साथ चलने लगें तो उनकी क्रिएटिविटी भी बढ़ जाती है. पहले तो अभिजीत और डफलो लिव-इन में रहे. 2012 में जब उनका बेटा हुआ तो वो उन दिनों लिव-इन में ही थे. इसके बाद उन्होंने शादी करने का फैसला किया. इसी बीच ईस्थर एमआईटी में सबसे युवा फैकल्टी बनीं.

हालांकि इससे पहले दोनों ने फैसला किया कि वो अपनी जिंदगी अर्थशास्त्र के जरिए गरीबों के नाम कर देंगे. ऐसा ही हुआ भी. दोनों मिलकर अब्दुल लतीफ जमील पावर्टी फाउंडेशन चलाते हैं. दोनों ने अपने काम से भारत के पांच लाख बच्चों को कहीं ना कहीं से ऊपर उठाया है. वो अब भी इस काम में लगे हुए हैं.

दोनों ने मिलकर एक किताब लिखी है-"पूवर इकोनॉमिक्स". जब ये किताब प्रकाशित हुई तो जिसने भी इसे पढ़ा, वो सुखद हैरानी से भर उठा. ये सवाल हर शख्स के जेहन में उभरा, " क्या इकोनॉमिक्स में इतनी जीवंत और उम्दा किताब लिखी जा सकती है. आप ये भी कह सकते हैं कि ये किताब नहीं गरीबों की सच्ची कहानियां और उदाहरण हैं."

अभिजीत और ईस्थर डफलो की शादी वर्ष 2015 में हुई.दोनों को एक बेटा है


फिर दूसरी शादी 
2015 में अभिजीत और ईस्थर डफलो ने शादी रचाई. हालांकि दोनों का जीवन गरीबों के लिए ही है. दोनों जीनियस हैं और दोनों अनोखे. उनके लिए इकोनॉमिक्स का मतलब आंकड़े, ग्राफ, गूढ़ थ्योरी, मुनाफा और विकास से ज्यादा इस दुनिया की वो जीवंतता है, जहां पूंजी से हर कोई खिलखिला सके. दोनों की रुचियां भी ऐसी हैं कि वो उन्हें गंभीर इकोनॉमिस्ट से कहीं ज्यादा बेहतर इंसान के रूप में अधिक पेश करती हैं.

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First published: October 15, 2019, 8:56 PM IST
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