मुश्किलों में मजबूती से खड़े होने की भी है सचिन पायलट प्यार की कहानी

सचिन पायलट अगर सियासत में जुझारू अंदाज दिखाते रहे हैं तो जिंदगी में भी हालात का डटकरर सामान करने में यकीन रखते हैं
सचिन पायलट अगर सियासत में जुझारू अंदाज दिखाते रहे हैं तो जिंदगी में भी हालात का डटकरर सामान करने में यकीन रखते हैं

सचिन पायलट (Sachin pilot) सुर्खियों में हैं. राजस्थान में अशोक गहलौत(Rajasthan chief minister Ashok Gehlot) की कांग्रेस सरकार के खिलाफ उन्होंने विद्रोह कर दिया. माना जा रहा है कि वो अपने विधायकों को लेकर अलग हो गए हैं. सचिन हमेशा से जुझारू प्रवृत्ति के रहे हैं. चाहे ये उनकी जिंदगी हो या फिर राजनीति-हर जगह उन्होंने दिखाया है कि वो प्रतिकूल हालात के खिलाफ बखूबी डटकर खड़े होते रहे हैं. उनकी जिंदगी में प्यार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है

  • Share this:
वर्ष 2004 में मकर संक्रांति के बाद दिल्ली में ठंड कम होने का नाम नहीं ले रही थी.  केनिंग लेन एक बंगलेमें काफी गहमागहमी थी. शादी की तैयारियां चल रहीं थीं. 15 जनवरी को इस घर में शादी की शहनाइयां गूंज उठीं. दूल्हा थे सचिन पायलट (Sachin Pilot) और दूल्हन सारा अब्दुल्ला. बंगला था कांग्रेस सांसद रमा पायलट का. लोग कम थे. सुरक्षा ज्यादा. वर पक्ष से हरकोई शादी में मौजूद था तो वधू पक्ष से किसी ने इसमें शिरकत नहीं की.

वधू पक्ष यानि कश्मीर का प्रसिद्ध अब्दुल्ला परिवार. पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला लंदन में थे. भाई उमर अब्दुल्ला अंपेडिसाइटस के इलाज के लिए दिल्ली के बत्रा हास्पिटल में भर्ती हो चुके थे. ये शादी अब्दुल्ला परिवार को मंजूर नहीं थी. जिस देश में रोज धर्म और जातियों के नाम पर तलवारें खिंचती हों, उसमें ये शादी खास थी. क्योंकि लड़का हिन्दू था और लड़की मुसलमान.

शादी हुई. सचिन और सारा पति-पत्नी बन गए. शादी को अब 16 साल हो चुके हैं. दोनों के दो बेटे हैं. कभी सियासत में कदम नहीं रखने की बात करने वाले सचिन राजस्थान के उपमुख्यमंत्री हैं और कांग्रेस के विद्रोही नेता. उनकी शादी को आज भी फिल्मी स्टाइल वाली शादी कहा जाता है.



आसान नहीं थी ये प्रेमकहानी 
ये प्रेम कहानी इतनी आसान थी नहीं. मोड़ टेढ़े-मेढे़ और मुश्किल थे. उन पर संतुलन बनाकर चलना और मंजिल तक पहुंच पाना और भी मुश्किल. सारा और सचिन को शादी के कुछ ही महीनों बाद "रॉन्डिवू विद सिमी ग्रेवाल" शो में आमंत्रित किया गया. दोनों शादी के बाद पहली बार किसी टीवी शो पर गए थे. सारा ने कहा, 'हम दोनों के परिवारों में दोस्ताना था. मेल-मुलाकातें होती थीं. लिहाजा हम दोनों एक दूसरे को बचपन से ही जानते थे.'

सचिन और सारा की फाइल फोटो


कब शुरू हुई ये कहानी
ये प्रेम कहानी शुरू कब हुई? शायद वर्ष 2004 से तीन साल से कुछ अधिक समय पहले. दोनों लंदन में थे. किसी पारिवारिक क्रार्यक्रम में मिले थे. और तब दोनों ने एक दूसरे के प्रति आकर्षण महसूस किया. दोनों नजदीक आए. रोमांस शुरू हुआ. तब तक सचिन लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी कर भारत आ चुके थे. सारा पढ़ाई के लिए लंदन में ही थीं.

ये भी पढ़ें - क्यों अब देश में बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं कोरोना केस और पीक?

इस तरह होने लगीं बातें 
दूरियां थीं तो क्या हुआ. रोमांस पंख लगाकर गुलाबी आसमां में उड़ रहा था. रिश्ता गहरा होता जा रहा था. सिमी ग्रेवाल शो में सारा ने कहा, “हम दोनों फोन, मैसेज, ईमेल से एक दूसरे के संपर्क में रहते थे. फोन पर लंबी बातें होती थीं. बिल बहुत ज्यादा आ जाता था.”

दोनों परिवारों में हुआ प्रेम और शादी का विरोध
दोनों ने महसूस किया कि वो एक दूसरे के लिए ही बने हैं. उन्हें लगने लगा कि अब शादी कर लेनी चाहिए. ये बात अब घर में बतानी थी. उन्हें अंदाजा तक नहीं था कि जब वो अपने परिवारों के सामने ये सब बताएंगे तो किस कदर इसका विरोध होने वाला है.

सारा ने सिमी ग्रेवाल से कहा, “हम दोनों के पिता अच्छे दोस्त थे. लंबे समय से एक दूसरे को जानते थे. लेकिन दिक्कतें शुरू हो गईं. दोनों परिवारों में विरोध हुआ. सबकुछ बहुत कठिन हो गया था. ऐसा लगने लगा कि शायद हम शादी कर ही नहीं पाएं. हमें भी नहीं मालूम था कि क्या कुछ कैसे होगा. कैसे रास्ता बनेगा. हम कुछ गलत नहीं कर रहे थे. हमारे सामने दो रास्ते थे या तो सबको खुश करें और इंतजार करें या फिर ये तय करें कि जो करना है तो कर लिया जाए.''


सचिन पायलट और सारा अब्दुल्ला


सचिन ने इस शो में कहा, 'मैं भाग्य और डेस्टिनी में विश्वास करता हूं. ये मेरी और सारा की जिंदगी का सवाल था. हम जानते थे कि शादी करके हम खुश रहेंगे. इससे ज्यादा महत्वपूर्ण मेरे लिए कुछ नहीं था.”

सचिन ने तो परिवार को मना लिया लेकिन ...
सचिन तो अपने परिवार को मनाने में सफल हो गए, लेकिन सारा के लिए ये बिल्कुल नहीं कर पाईं. उनके पिता और भाई दोनों ने लवमैरिज की थी. पिता ने कैथोलिक क्रिश्चियन महिला से शादी की थी तो भाई ने सिख से. उनके घर में धार्मिक कट्टरता जैसा माहौल नहीं था, लेकिन पिता और भाई को ये रिश्ता मंजूर नहीं था. हालांकि सचिन को अब्दुल्ला परिवार में पसंद किया जाता था.

इसे भी पढ़ें :- रहस्य बन चुका है पद्मनाभस्वामी मंदिर का सातवां दरवाजा, अब तक नहीं खोल सका कोई

एक कश्मीरी पत्रकार कहते हैं, “अब्दुल्ला परिवार को शायद लग रहा था कि जम्मू कश्मीर के मुसलमान पसंद नहीं करेंगे कि उनके परिवार की लड़की एक हिन्दू से शादी करे.”


फिर धीरे धीरे खत्म हुई कड़वाहट
यहां तक की अब्दुल्ला परिवार के मित्रों के लिए ये हैरानी की बात थी, क्योंकि इस परिवार को हमेशा से खुले दिमाग वाला माना जाता रहा था. मित्रों के लिए ये अचरज की बात थी कि फारूक शादी के इतने खिलाफ क्यों हैं. मीडिया में तब यहां तक खबरें आईं कि फारूक शादी होने पर बेटी से रिश्ता तोड़ लेंगे. हालांकि अब्दुल्ला परिवार की कड़वाहट कुछ ही महीनों में खत्म हो गई. दोनों परिवारों में रिश्ते सामान्य हो गए. फारूक उसके बाद कई बार सचिन के साथ राजनीतिक मंच पर भी नजर आए.

सचिन और फारूक अब्दुल्ला की फाइल फोटो


शादी के बाद राजनीति में आए सचिन
शादी के समय सचिन एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम कर रहे थे. समय का फेर देखिए कि शादी के कुछ ही महीनों बाद लोकसभा चुनाव हुए. सचिन को राजनीति में आना पड़ा. उन्होंने राजस्थान की दौसा सीट से चुनाव लड़ा. 26 साल की उम्र में वह बड़े अंतर से जीत हासिलकर लोकसभा पहुंचे. यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल में वह कारपोरेट मामलों के मंत्री बनाए गए.

ये भी पढ़ें:- नॉर्थ कोरिया में लीडर की मौत पर रोना जरूरी, वरना मिलती है सजा

मंत्रालय में तब उनके पर्सनल सेक्रेटरी (नाम नहीं देने का अनुरोध) रहे एक शख्स ने इस दंपति को करीब से देखा. वह कहते हैं, “ऐसा लगता है कि दोनों एक दूसरे को खूब समझते हैं. आमतौर पर राजनीति में रहने पर परिवार के लिए समय बहुत कम मिल पाता है, लेकिन मैंने कभी सारा मैडम को शिकायत करते नहीं देखा.”

सारा योग इंस्ट्रक्टर हैं
सारा और सचिन के दो बेटे हैं- आरान और विहान. सारा ने पिछले कुछ सालों में महिलाओं के लिए समाजसेवा करके अपनी एक पहचान बनाई है. वह जानी मानी योगा इंस्ट्रक्टर भी हैं.  वरिष्ठ पत्रकार निर्मल पाठक कहते हैं, “सचिन काफी मिलनसार और घुलने मिलने वाले राजनीतिज्ञों में हैं. हालांकि उनके पिता राजेश पायलट भी काफी दोस्ताना थे, लेकिन सचिन उनसे भी आगे हैं.”
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज