Love Story : जब कैंब्रिज में सोनिया गांधी को पहली ही नजर में राजीव से प्यार हो गया

सोनिया और राजीव का विवाह 1968 में हिंदू रीतिरिवाज से नई दिल्ली में हुआ

आज सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) का जन्म दिन है. वो इटली (Italy) में पैदा हुईं. कभी सोच ही नहीं सकती थीं कि उनकी शादी इटली से बाहर भारत में गांधी-नेहरू परिवार में होगी. कैंब्रिज (Cambridge) में पढ़ाई के दौरान उन्हें राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) से प्यार हो गया. हालांकि इस प्रेम कहानी में उतार चढ़ाव भी आए लेकिन दोनों आगे बढ़े और उनकी शादी हुई. कैसी थी ये लव स्टोरी...

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सोनिया 07 जनवरी 1965 को कैंब्रिज पहुंचीं. आमतौर पर यहां काफी विदेशी युवा पढ़ाई के लिए आते हैं. लंदन का ये इलाका सुरक्षित भी है और साफसुथरा भी. उन्होंने यहां के दो मुख्य लैंग्वेज स्कूल में से एक में खुद को एनरोल किया. तब कैंब्रिज में ये व्यवस्था थी कि अगर आप विदेशी हैं तो वो आपके ठहरने के लिए किसी फैमिली के घर पर व्यवस्था भी करते थे. सोनिया को भी एक घर अलॉट हुआ

वहां का खाना उन्हें अच्छा नहीं लग रहा था और शुरुआत में अंग्रेजी बोलने में भी उन्हें दिक्कत थी. खैर उन्हें इसी कैंपस में एक ग्रीक रेस्तरां मिला, जो इतालवी खाना भी खिलाता था. उसका नाम था वर्सिटी. ये यूनिवर्सिटी के युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय था. सोनिया ने नियमित तौर पर यहीं खाना शुरू कर दिया. इसके दाम भी ऐसे थे कि स्टूडेंट इसको बर्दाश्त कर पाएं. राजीव गांधी भी अक्सर अपने दोस्तों के साथ यहां आया करते थे.

जब पहली बार सोनिया ने राजीव को देखा
यहीं सोनिया ने राजीव को देखा. वो शांत और सुंदर थे. साथ ही बेहद विनम्र भी. दूसरों से अलग. एक दिन जब सोनिया वहां लंच ले रही थीं तब राजीव उनके कॉमन मित्र क्रिस्टियन वॉन स्टीगलिज के साथ दाखिल हुए. तभी पहली बार उनका आपस में एक-दूसरे से परिचय हुआ.

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सोनिया ने अपनी बॉयोग्राफी "सोनिया गांधी-एन एक्स्ट्राआर्डिनरी लाइफ, एन इंडियन डेस्टिनी" की लेखिका रानी सिंह से कहा, "उन्हें पहली ही नजर में राजीव से प्यार हो गया. ऐसा ही राजीव के लिए भी था, क्योंकि राजीव ने ये बात उनसे बताई भी. उन्होंने क्रिस्टियन से पहले ही उनका सोनिया से परिचय कराने को कहा था."

रानी सिंह द्वारा लिखी गई सोनिया गांधी की बॉयोग्राफी sonia gandhi an extraordinary life an indian destiny


राजीव मां को पत्र में सोनिया का जिक्र करने लगे
इसके बाद उनमें दोस्ती हुई. दोनों एक दूसरे से घनिष्ठ होने लगे. जैसी कि नेहरू-गांधी परिवार में लंबे पत्र लिखने की परंपरा रही है. उसी का अनुकरण राजीव भी करते थे. वो अपनी मां इंदिरा गांधी को जब भी पत्र लिखते थे, तब उन्हें कैंपस, पढ़ाई, लाइफ, रूटीन सारी बातें लिखते थे. जल्दी ही उनके पत्रों में सोनिया भी शामिल हो गईं. वो अपनी मां से उनका जिक्र करने लगे.

उन दिनों राजीव के पास लाल रंग की पुरानी कार थी
दोनों अपने परिवारों से दूर थे. तनाव मुक्त और आजाद. उन दिनों राजीव के पास एक लाल रंग की पुरानी वॉक्सवैगन कार थी. उससे वो तकरीबन रोज सोनिया के पास वहां आया करते थे, जहां वो रहती थीं. अक्सर वो और सोनिया अन्य मित्रमंडली के साथ छुट्टी के दिन कार से सैर के लिए दूर निकल पड़ते. ईंधन का पैसा सभी मिलकर शेयर करते. कभी कभी वो सोनिया के साथ कार रेसिंग देखने सिल्वरस्टोन चले जाते थे.

राजीव एक्स्ट्रा इनकम के लिए बेकरी में काम करते थे
उन दिनों कैंब्रिज में पढ़ने वाले सभी छात्रों को घर से कम पैसा आने के कारण आर्थिक तंगी रहती थी. वो इसके चलते खाली समय में छिटपुट काम करते थे. राजीव एक कॉपरेटिव बेकरी में काम करते थे. वो ब्रेड सेक्शन में थे.

70 के दशक में इंडिया गेट के पास राजीव गांधी और सोनिया आइसक्रीम ठेले पर.


किताब में लिखा है," सोनिया ऐसी थीं, जिनके पास पर्याप्त पैसा होता था, खासकर तब भी उनके पास पैसा होता था, जब उनके दूसरे दोस्तों की जेब महीने के आखिर में खाली हो जाती थी." किताब में राजीव के कैंब्रिज के जमाने के दोस्त ताहिर जहांगीर ने कहा, "सोनिया हमेशा वेल ड्रेस्ड रहती थीं और हमेशा खुशमिजाजी से मिलती थीं."

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सोनिया कैंब्रिज की सबसे खूबसूरत युवती थीं
उस समय कैंब्रिज में पुरुष और महिला स्टूडेंट का अनुपात 12 और 01 था. लंबे घने और काले बालों वाली स्लिम सोनिया उन दिनों कैंब्रिज टाउन में सबसे खूबसूरत युवती थीं. उन्हें अपने अच्छे लुक का अहसास भी था. राजीव को फोटोग्राफी का शौक था. वो सोनिया की बहुत तस्वीरें खींचते थे. राजीव उनके लिए सबसे खास बन गए थे लेकिन वो जानते थे कि वो दो अलग दुनिया से थे. लेकिन ये उनकी जिंदगी का सबसे खुशनुमा समय था. वो मुक्त थे, खुश थे. अपनी जिंदगी का आनंद ले रहे थे.

इंदिरा पहली बार लंदन में सोनिया से मिलीं
अब राजीव ने मां इंदिरा को लिखी चिट्ठी में पहली बार सोनिया के प्रति अपनी भावनाओं का इजहार किया. राजीव ने पहली बार ये व्यवस्था की कि उनकी मां सोनिया से मिल सकें. वो तब लाल बहादुर शास्त्री की सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री थीं. सोनिया इस मुलाकात को लेकर नर्वस थीं. ये मुलाकात लंदन में ही हुई. इसके बाद दूसरी मुलाकात फिर लंदन में केनिंगटन पैलेस गार्डन स्थित भारतीय हाईकमिश्नर के घर पर हुई.

जब सोनिया गांधी 1966 में लंदन में इंदिरा गांधी से मिलीं तो वो काफी नर्वस हो रही थीं, तब इंदिरा ने उन्हें कंफर्टेबल करने की काफी कोशिश की.


सोनिया नर्वस थीं, फ्रेंच में हुई बातचीत 
इंदिरा ने इस मुलाकात में सोनिया को काफी रिलैक्स करने की कोशिश की. उन्होंने सोनिया से फ्रेंच भाषा में बात की, क्योंकि उन्हें मालूम था कि सोनिया इंग्लिश की तुलना फ्रेंच में ज्यादा सहजता महसूस करती हैं. उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा. हालांकि राजीव और उनकी मां इंदिरा के साथ ये रिश्ता जितना सहज लगने लगा था, वैसा सोनिया के घरवालों के साथ नहीं था.

सोनिया के घरवालों ने साफ मना कर दिया
सोनिया ने राजीव के साथ प्यार की बात और रिश्ते में आगे बढ़ने की बात अब तक अपने घर में नहीं बताई थी. इस बात को लेकर राजीव ने इंदिरा को पत्र में लिखा, " वो समझ नहीं पा रहे कि सोनिया अब तक ऐसा क्यों नहीं कर रही." खैर सोनिया वास्तव में राजीव के साथ जिंदगी में आगे बढ़ने का मन बना चुकी थीं. जब वो ओरबासानो में अपने घर गईं तो तय करके गईं कि अबकी बार घर वालों से बात करेंगी..लेकिन घरवाले खुश नहीं थे, वो बुझे दिल से वापस कैंब्रिज लौटीं. हालांकि ये सब जानने के बाद घरवाले नहीं चाहते थे कि वो वापस कैंब्रिज जाएं.

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भविष्य को लेकर शंकित था युवा जोड़ा
राजीव अब मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर्स के लिए इंपीरियल कॉलेज लंदन में दाखिला ले चुके थे, लिहाजा दोनों की मुलाकात अब सप्ताहांत में ही होती थी. दोनों युवा तय कर चुके थे कि वो अपनी आगे की जिंदगी साथ बिताएंगे. हालांकि भविष्य को लेकर कभी कभी शंकित भी हो जाते थे. सोनिया को अपने सख्त मिजाज पिता से अब भी डर लगा रहता था. लेकिन धीरे धीरे दोनों ने तय कर लिया कि वो शादी करेंगे और भारत में रहेंगे.

सोनिया इटली लौट गईं
जुलाई 1966 में सोनिया फिर इटली लौटीं. राजीव ने भी सोनिया के पिता स्टेफनो से मिलने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने एक भवन निर्माण साइट पर काम करके पर्याप्त पैसे कमाए. सोनिया और राजीव दोनों रोज एक दूसरे को खत लिखते थे. हालांकि राजीव अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर पायलट का लाइसेंस लेने की ट्रेनिंग लेने लगे थे.

सोनिया गांधी (Reuters)
सोनिया गांधी ने जब अपने घर में राजीव से प्यार की बात बताई तो शादी की अनुमति मांगी तो घरवालों ने इस पर नाखुशी जताते हुए मना कर दिया. फिर जब राजीव गांधी इटली जाकर सोनिया के पिता स्टेफनो से मिले तो भी उन्होंने शादी के लिए हां तो नहीं की लेकिन एक कंडीशन जरूर रख दी. (Reuters)


राजीव इटली जाकर सोनिया के पेरेंट्स से मिले लेकिन हां नहीं हुई
नवंबर 1966 में राजीव इटली गए. वो सोनिया के पेरेंट्स से मिले ताकि उन्हें अपने रिश्ते के प्रति आश्वस्त कर सकें. खैर राजीव वहां उनके पेरेंट्स को पसंद आए. उन्हें महसूस हुआ कि राजीव नेक शख्स हैं. उनकी मंशा अच्छी है. हालांकि इसके बाद भी स्टेफनो शादी के लिए हां नहीं कर पा रहे थे, उनको लग रहा था कि उनकी बेटी विदेश में कैसे रहेगी. अगर वो शादी के लिए हां कह देते हैं तो शायद एक अच्छे पिता का कर्तव्य पूरा नहीं करेंगे.

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सोनिया ने किताब की लेखिका से कहा, "पिता ने उन्हें इस रिश्ते में आगे नहीं बढ़ने के लिए बहुत ज्यादा मनाने की कोशिश की. जब उनको लगा कि सोनिया टस से मस नहीं होने वाली, तब उन्होंने एक शर्त रखी कि दोनों शादी के लिए कम से कम एक साल का इंतजार करें. और तब तक अगर उनका प्यार बना रहेगा तब वो सोनिया को राजीव के देश जाने की आज्ञा दे देंगे लेकिन अगर शादी में कभी कोई गड़बड़ होगी तो उनको ब्लेम नहीं कर सकतीं."

एक साल बाद सोनिया दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरीं
सोनिया ने 12 महीने इंतजार किया. स्टेफनो को लगता था कि बेटी सालभर जब उनके पास इटली में रहेगी तो राजीव को भूल जाएगी लेकिन ऐसा हो नहीं सका. 13 जनवरी 1968 को सोनिया दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरीं. उन्हें लेने के लिए राजीव अपने भाई संजय के साथ आए थे. सोनिया को अमिताभ बच्चन के परिवार के साथ ठहराया गया. फिर वहीं उनकी शादी हुई.

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