यूपी की सीएम ने की थी लव मैरिज तो घरवालों ने तोड़ लिया था रिश्ता

महात्मा गांधी ने भी कह दिया था कि जेबी कृपलानी यानी जीवतराम भगवानदास कृपलानी और सुचेता मजूमदार की शादी नहीं हो सकती, लेकिन बाद में शादी हुई भी और लंबी चली भी.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 25, 2019, 5:28 PM IST
यूपी की सीएम ने की थी लव मैरिज तो घरवालों ने तोड़ लिया था रिश्ता
उत्तर प्रदेश की पहली मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: June 25, 2019, 5:28 PM IST
उत्तर प्रदेश की पहली मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी का आज (25 जून) जन्मदिन है. वो यूपी की सफल मुख्यमंत्री साबित हुईं. बंगाली परिवार की सुचेता को जब खुद से 20 साल बड़े एक कांग्रेस नेता से प्यार हुआ और उन्होंने इस बारे में अपने घरवालों को बताया तो उन्हें अपने परिवार वालों के जबरदस्त गुस्से का सामना करना पड़ा. साफ मना कर दिया गया कि वो इस शादी के बारे में सोचे भी मत. यहां तक की महात्मा गांधी ने भी उनकी शादी का विरोध किया.

सुचेता कृपलानी शादी से पहले सुचेता मजूमदार थीं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में जब वो इतिहास की लेक्चरर बनकर नियुक्त हुईं तो इसी डिपार्टमेंट में काम कर रहे जेबी कृपलानी से उन्हें प्यार हो गया. इस प्यार का रंग इतना गहरा चढ़ा कि उन्होंने कृपलानी से शादी करने का फैसला किया. घर में इसका इस कदर विरोध हुआ कि कह दिया गया कि वो अगर शादी करेंगी तो घर से रिश्ता टूट जाएगा. दरअसल घरवालों को जेबी कृपलानी की ज्यादा उम्र भी खासी चुभ रही थी.



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शीर्ष नेताओं में एक थे जेबी कृपलानी

जेबी कृपलानी आजादी की लड़ाई में गांधी के बाद शीर्ष नेताओं में एक थे. वो कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे. जब उन्हें सुचेता से इश्क हुआ तो जिसने सुना हैरान रह गया कि कृपलानी भी किसी के प्यार में कैद हो सकते हैं. वो भी अपने से 20 साल छोटी महिला के साथ. फिर एक बंगाली और एक सिंधी.

आचार्य जेबी कृपलानी और सुचेता, जिनकी शादी का गांधी तक ने किया था विरोध


इश्क का रंग इतना गहरा कि दोनों को लगा कि अब वे एक-दूसरे के बगैर नहीं रह पाएंगे. उन्होंने जब शादी करने का फैसला किया तो भूचाल आ गया. दोनों परिवारों ने फैसला सुनाया कि उन्हें ये शादी मंजूर नहीं. यहां तक कि महात्मा गांधी ने कह दिया कि ये शादी नहीं हो सकती. इश्क का रंग यकायक नहीं चढ़ा था बल्कि धीरे-धीरे गहरा हुआ था. दोनों ने कहीं महसूस किया था कि उन्हें एक दूसरे की जरूरत है.
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बीएचयू में प्यार चढ़ा था परवान
हम जेबी कृपलानी यानी जीवतराम भगवानदास कृपलानी और सुचेता मजूमदार के बारे में बात कर रहे हैं. दोनों इतने प्रखर और दृढ़ थे कि उन्हें उनके निश्चय से हिला पाना मुश्किल था. उनकी पहली मुलाकात कहां हुई ये कहना मुश्किल है. लेकिन ये जरूर कहा जा सकता है कि बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय कहीं न कहीं उनके प्यार की धुरी बना था.

कृपलानी बीएचयू में इतिहास के प्रोफेसर बनकर आए. हालांकि वह यहां एक ही साल रहे. लेकिन वो एक साल ही उस विश्वविद्यालय पर उनका प्रभाव छोड़ने के लिए काफी था. इसके बाद उन्होंने गांधी के असहयोग आंदोलन के लिए नौकरी छोड़ दी. इसके कुछ साल बाद बीएचयू के इतिहास विभाग में सुचेता मजूमदार प्रोफेसर बनकर आईं.

आचार्य कृपलानी और सुचेता का प्यार बनारस हिंदू विश्व विद्यालय के इतिहास विभाग में फला-फूला


बाद में गांधी के साथ काम करते हुए दोनों नजदीक आते गए. लेकिन गांधी यह जानकर हैरान रह गए कि उन्हीं के आश्रम में उन दोनों का प्यार फला-फूला. दोनों कांग्रेस के दिग्गज नेता थे लेकिन आने वाले सालों में उनकी भूमिका ऐसी बदली कि वो विरोधी कैंपों में शामिल हो गए.

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प्रेम ने दी मन पर दस्तक
जब कुछ मुलाकातों के बाद सुचेता ने उनसे गांधी से जुड़ने की इच्छा जाहिर की तो कृपलानी इसमें सहायक भी बने. हालांकि वह उन्हें राजनीति में आने से लगातार हतोत्साहित भी करते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि महिलाओं का राजनीति में दामन साफ बचाकर रखना मुश्किल होता था.
समय के साथ जब दोनों का काफी समय एक दूसरे के साथ बीतने लगा तो वो करीब आने लगे, हालांकि किसी को भी अंदाजा नहीं था कि कृपलानी जैसे शख्स के जीवन में भी प्रेम दस्तक दे सकता है और दबे पांव उनके मन के घर पर कब्जा कर सकता है.

शादी शब्द उनकी डिक्शनरी में नहीं था
कृपलानी सिंध के हैदराबाद में पैदा हुए थे. वह पढ़ने में बेहद कुशाग्र और कुछ अलग तरह से सोचने वाले शख्स थे. ऐसे शख्स भी जो अपने आपमें रहना ज्यादा पसंद करते थे. उनके बारे में कहा जाता था कि वो बहुत आसानी के साथ अपने प्रिय लोगों से खुद को अलग कर लेते थे. कृपलानी को जो भी जानते हैं वो मानते थे वो बेहद अनुशासित और आदर्शों के पक्के शख्स थे. स्त्रियों से खुद हमेशा दूर रखने वाले.

ये माना जाने लगा था कि विवाह उनकी डिक्शनरी में नहीं है. कृपलानी आजादी से पहले लंबे समय तक कांग्रेस के महासचिव रहे और 1947 में जब देश आजाद हो रहा था तब वह इस पार्टी के अध्यक्ष थे. हालांकि आजादी के बाद स्थितियां ऐसी बनीं कि वह कांग्रेस विरोध और विपक्ष की राजनीति करने लगे. आजीवन ऐसा करते रहे. वहीं सुचेता बाद में कांग्रेस में मंत्री भी बनीं और मुख्यमंत्री भी.

कृपलानी बेहद अनुशासित और आदर्शों के पक्के शख्स थे. स्त्रियों से खुद हमेशा दूर रखने वाले. जब उनकी लव स्टोरी सामने आई तो हर किसी को हैरान होना ही था


परिवारवालों ने सुना तो गुस्से से भर गए
कृपलानी लंबे कद के सुदर्शन व्यक्तित्व के धनी थे तो सुचेता साधारण कद काठी वाली. लेकिन कुछ तो था उनके व्यक्तित्व में जिसने कृपलानी जैसी शख्सियत को उनके प्यार में बांध लिया था. दोनों जब एक दूसरे के प्यार में पड़े तो उन्हें कभी उम्र का लंबा फासला अपने बीच महसूस नहीं हुआ. हां, लेकिन जब उन्होंने आपस में शादी करने की इच्छा अपने परिवारों के सामने जाहिर की तो तूफान आ गया. अपने घरों में उन्हें गुस्से और विरोध का सामना करना पड़ा.

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गांधी ने शादी का विरोध किया
सुचेता ने अपनी किताब सुचेता एन अनफिनिश्ड ऑटोबॉयोग्राफी में लिखा, गांधी ने उनके विवाह का विरोध किया था, उन्हें लगता था कि पारिवारिक जिम्मेदारियां उन्हें आजादी की लड़ाई से विमुख कर देंगी. गांधी ने कृपलानी से कहा, अगर तुम उससे शादी करोगे तो मेरा दायां हाथ तोड़ दोगे. तब सुचेता ने उनसे कहा, वह ऐसा क्यों सोचते हैं बल्कि उन्हें तो ये सोचना चाहिए कि उन्हें आजादी की लड़ाई में एक की बजाय दो कार्यकर्ता मिल जाएंगे.

गांधी चाहते थे कि सुचेता किसी और से शादी कर लें
कृपलानी इस बात से नाखुश तो बहुत थे कि गांधी उनके व्यक्तिगत मामलों में दखल दे रहे हैं लेकिन इसके बाद भी उन्होंने उनकी बात करीब-करीब मान ही ली. सुचेता भी इस पर सहमत हो गईं. लेकिन इसके बाद गांधी ने जो कुछ किया, उसने उनके आपस मे शादी करने के विचार को मजबूत कर दिया. सुचेता अपनी बॉयोग्राफी में लिखती हैं, गांधी चाहते थे कि वह किसी और से शादी कर लें. उन्होंने इसके लिए दबाव भी डाला. मैने इसे एक सिरे से खारिज कर दिया. मैंने उनसे कहा, जो प्रस्ताव वह दे रहे हैं वो अन्यायपूर्ण भी है और अनैतिक भी.

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