आपकी मौत का सटीक तारीख बता देगी ये 'मशीन', 90 फीसदी तक सच होती हैं भविष्यवाणियां

इस मशीन की खासियत ये है कि यह केवल मौत को लेकर ही भविष्यवाणी नहीं करती बल्कि यह आपको ये भी बता देती है कि आपको हार्ट-अटैक कब आ सकता है.

News18Hindi
Updated: May 13, 2019, 7:21 PM IST
आपकी मौत का सटीक तारीख बता देगी ये 'मशीन', 90 फीसदी तक सच होती हैं भविष्यवाणियां
इस मशीन की खासियत ये है कि यह केवल मौत को लेकर ही भविष्यवाणी नहीं करती बल्कि यह आपको ये भी बता देती है कि आपको हार्ट-अटैक कब आ सकता है.
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Updated: May 13, 2019, 7:21 PM IST
एक हालिया अध्ययन में दावा किया गया कि एक ऐसा अप्लीकेशन बना लिया है जो इंसान की मौत का दिन-तारीख बता देगा. यह ऐप अपनी आर्टिफ‌िशियल इंटेल‌िजेंस और आधुनिक उपकरणों की सहायता बेहद महीन डाटा एनॉलिसिस के बाद अपनी भविष्यवाणी करता है. इसका नाम मशीन लर्निंग है. शोध का दावा है कि मशीन द्वारा बताए गए समय में करीब 90 फीसदी तक सच्चाई है.

इसे ऐसे समझिए कि अगर मशीन किसी शख्स की मौत की डेट किसी महीने की 10 तारीख को बताता है तो उसका अंतिम ‌दिन नौ या फिर 11 तारीख हो सकता है. मशीन लर्निंग पर किए गए अध्ययन को द इंटरनेशन कॉन्फ्रेंस ऑन न्यूक्लियर कार्डियोलॉजी एंड कार्डियक सीटी (ICNC) 2019 में प्रस्तुत किया गया.



मौत ही नहीं हार्ट अटैक आने का दिन-तारीख भी बताएगी मशीन
इस मशीन की खासियत ये है कि यह केवल मौत पर ही भविष्यवाणी नहीं करती बल्कि ये भी बता सकती है कि आपको हार्ट-अटैक कब आ सकता है.

मशीन को कैसे चलता है पता
यह मशीन बेहद गणितीय नियमों पर आधारित है. यह किसी शख्‍सियत की महीन से महीने जानकारी अपने पास रखती है और उसके विश्लेषण के आधार पर अपनी भविष्यवाणियां करती है. असल में आप ऐसी मशीनों से लगातार घिरे हुए हैं और अपने डाटा उन्हें दे रहे हैं. चाहे वो आपके गूगल सर्च हों, चाहे फोन पर फेस रिकग्निशन, खुद से चलने वाली कार या नेटफ्लिक्स को दी गई जानकारियां, ये मशीनें एक-एक यूजर की जानकारियां रखने के बाद उन्हें अपने हिसाब चीजें दिखानी शुरू कर दे रही हैं. इसका सीधा आशय है आप अंदाजा लगाए जाने योग्‍य हैं.

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कैसे हुआ ये शोध
असल में हाल ही में 950 मरीजों के ऊपर उनके जीवन से जुड़ी 85 चीजों के ऊपर शोध किया गया. इसके बाद उनके साथ करीब छह सालों तक काम करने के बाद एक एल्गोरिथम बनाया गया. इस एग्लोरिथ्म में एक खास बात सामने आई. उन मरीजों में कई ऐसी बातें थी जिनके बारे में पहले ही बताया जा सकता था. इनमें सबसे खास बात उनकी मृत्यू और उनके आने वाले हार्ट अटैक की डेट थी.

फिनलैंड के टुर्कू पीईटी सेंटर डॉ. लुइस एडुराल्डो जुअरेज ओर्जोको ने इस स्टडी को लिखा है. उन्होंने बताया, "हमारे पास बहुत से डाटा उपलब्‍ध होता है. लेकिन हम उनकी उस तरह से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे. इसलिए हमने इस विचार पर काम किया. यह मशीन दूसरी तकनीकों से एक कदम और आगे जाकर डाटा एनॉसिस करती है."

उनके अनुसार, "डॉक्टर आपके इलाज के लिए भी अपने अनुभव के आधार पर एक तरह का जोखिम उठाते हुए आपको कुछ दवाइयां देता है. उसे विश्वास होता है कि आमुक लक्षण हैं तो आमुक दवा काम करेगी. लेकिन यह मशीन पूरी तरह से साफ दिखने वाले डाटा पर आधारित होगी."

उन्होंने यह भी कि ‌मौत और हार्ट अटैक पहले से बताने के लिए डाटा को बहुत गराई से परखना होता है. यह इंसानी रिसोर्स से नहीं हो पाएगा. ऐसे डेटा को समझने में काफी कठिनाई आती है. लेकिन छह सालों में इसे पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है.

यहां किया गया शोध, लोगिटबूस्‍ट होगा नाम
सामाचार एजेंसी एएनाई की एक खबर के मुताबिक 950 सीने के दर्द से परेशान लोगों के साथ यह शोध शुरू हुआ था. छह साल के शोध में इसमें से 24 लोगों को हार्ट अटैक आए और 49 लोगों की मौत हो गई. शोध के दौरान उनमें से ज्यादातर लोगों की हार्ट अटैक और मौत की तारीख का अंदाजा पहले ही लगाया जा चुका था. इस शोध को लोगिटबूस्ट कहा गया.

शोध के दौरान उनके 17 ऐसी चीजें थी जिन्होंने इसमें सबसे ज्यादा भविष्वाणी में भूमिका अदा की. इनमें उनके सेक्स, उम्र, स्मोकिंग, डायबिटीज आदि. जबकि उनकी जिंदगी 85 चीजों पर काम किया जा रहा था. सबके आधार हर शख्स की जिंदगी का एग्लोरिथम बना हुआ है. उसका शरीर उसी तरह से रिएक्ट करता है. यह दावा शोध करता है.

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