चीन का वो छोटा कस्बा कौन सा है, जहां जापान के लिए आधे से ज्यादा ताबूत तैयार होते हैं

चीन का वो छोटा कस्बा कौन सा है, जहां जापान के लिए आधे से ज्यादा ताबूत तैयार होते हैं
चीन का एक शहर है, जो ताबूत तो बनाता है लेकिन केवल जापान के लिए

चीन के शेंडोंग (Shandong) प्रांत के एक शहर Caozhou में ताबूत तैयार होते हैं, जो जापान (Japan) की लगभग 90% ताबूत की जरूरत पूरी करते हैं. चूंकि जापान की बड़ी आबादी उम्रदराज है इसलिए वहां हर साल भारी मात्रा में ताबूतों की जरूरत पड़ती है.

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साल 1990 में दुनिया की अर्थव्यवस्था (global economy) एक-दूसरे के लिए खुलने के साथ ही चीन (China) ने तय किया कि उसके सारे शहर अलग-अलग चीजों की मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) करेंगे. जैसे वहां कई शहर सिर्फ गोल्फ खेल से जुड़े सामान बनाते हैं, कुछ सिर्फ मोजे तैयार करते हैं तो कई में दुनियाभर के लिए वायलिन (violin) बनता है. वहीं एक शहर ऐसा भी है, जहां सिर्फ और सिर्फ ताबूत (coffin) बनते हैं. Caozhou शहर जिसे हेज सिटी के नाम से भी जाना जाता है, ऐसा ही एक शहर है, जो ताबूत तो बनाता है लेकिन केवल जापान के लिए.

माना जाता है कि यहां से केवल साल 2018 में 1.37 मिलियन जापानी आबादी के लिए ताबूतों का निर्यात हुआ था.

कहां से हुई शुरुआत
चीन की वेबसाइट Yicai.com के मुताबिक यहां पर जापान के लिए ताबूत बनाने का काम साल 1990 से शुरू हुआ. शुरू-शुरू में यहां पर उत्पादन उतना सही नहीं था और ताबूत बनाने के लिए लकड़ी की सप्लाई की जाती थी लेकिन जल्दी ही शहर के लोगों ने खुद ताबूत तैयार करने की सोची. वे पहले चीनी और जापानी शैली का मिला-जुला ताबूत बनाते, जो भारी होते और जिनपर नक्काशी का काम होता. लेकिन जापान में इसे पसंद नहीं किया गया. वहां के लोग हल्के ताबूत चाहते थे, जिनपर नक्काशी की जगह कशीदाकारी किया हुआ कपड़ा लिपटा हो. तब हेज शहर ने इसी में महारत हासिल कर ली.



जापान में ताबूतों की जरूरत इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि वहां की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है




चीन की ऑर्डर लेने की तकनीक
अब यहां पर हर साल कम से कम साढ़े 7 लाख ताबूत तैयार होते हैं, जिनकी कीमत उनपर काम के अनुसार 5,329 रुपए से लेकर 21,317 या इससे भी ज्यादा होती है. ज्यादा कीमत वाले ताबूत खास ऑर्डर पर बनवाए जाते हैं. काम फल-फूल सके, इसके लिए व्यावसायिक दिमाग वाले शहरी अपने बच्चों को जापान में पढ़ाई के लिए भेज रहे हैं ताकि वहां रहते हुए वे साथ में जापानी भाषा और वहां की संस्कृति को करीब से देख सकें और स्थानीय लोगों के साथ मेल-जोल बढ़ा सकें. इससे भविष्य में ऑर्डर लेने में आसानी हो सकती है. कई चीनी कंपनियों में जापान में अपनी टीमें तैनात कर रखी हैं, वो वहां मौत के ट्रेडिशन को समझें ताकि ताबूत बनाने के अलावा दूसरी चीजें जैसे यादगार के प्रतीक बनाए जा सकें.

अंधविश्वास भी आ रहा आड़े
हालांकि पीढ़ी-दर-पीढ़ी लगातार ताबूत बनाने के काम के कारण परिवारों में कई मुश्किलें भी आ रही हैं. जैसे वीक इन चाइना की रिपोर्ट के अनुसार ताबूत बनाने वाले परिवारों में लोग अपनी बेटियों की शादी नहीं करना चाहते हैं. उन्हें डर होता है कि ऐसे परिवारों में मौत जल्दी होती है या शादीशुदा जोड़े के साथ कोई दुर्घटना हो सकती है. यही वजह है कि ताबूत निर्माण से जुड़े लोग अपने काम का विज्ञापन नहीं करते हैं और अपनी फैक्ट्रियों को क्राफ्ट बिजनेस बताने लगे हैं.

जापान में ताबूत पर भी बारीकी से ध्यान दिया जाता है कि वो स्थानीय शैली के मुताबिक है या नहीं


ऐसे दिखते हैं ताबूत
जापान के लिए ताबूत तैयार करना कोई हंसी-खेल नहीं. यहां बारीकी से ध्यान दिया जाता है कि वो स्थानीय शैली के मुताबिक है या नहीं. वे छोटी से छोटी डीटेल को देखते हैं. शहर में ताबूत बनाने वाली एक कंपनी Dehong Wood Product Company के मुताबिक कई जापानी क्लाइंट इंची टेप से मापते हैं और माइक्रोस्कोप लेकर कशीदाकारी देखते हैं कि कहीं कोई चीनी स्टाइल तो नहीं दिख रही. आमतौर पर हल्की लड़की वाले बॉक्स प्रेफर किए जाते हैं, जिनपर रेशमी कपड़ा होता है. सफेद कपड़े पर नीले, हल्के पीले या गुलाबी रंग के जापानी शैली के बेल-बूट और घास बनी होती है. मौसम के हिसाब से भी ताबूत बनते हैं, जैसे चेरी ब्लॉसम (जापान का राष्ट्रीय फूल) के वक्त में कपड़े पर उसी तरह का काम करते हैं.

मौसम के हिसाब से भी ताबूत बनते हैं, जैसे चेरी ब्लॉसम (जापान का राष्ट्रीय फूल) के वक्त में कपड़े पर उसी तरह का काम करते हैं


क्यों चाहिए जापान को ज्यादा ताबूत
जापान में ताबूतों की जरूरत इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि वहां की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है. देश के Ministry of Internal Affairs and Communications के मुताबिक साल 2018 में जापान में 35.57 मिलियन सीनियर सिटीजन थे, जिनकी उम्र 65 से ज्यादा थी. ये आबादी पूरी आबादी का 28 प्रतिशत से भी ज्यादा थी. उसी साल जापान में मृत्युदर दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे ज्यादा रही. खुद जापान के Ministry of Health, Labor and Welfare के हिसाब से अकेले 2028 में वहां 1.37 मिलियन बुजुर्ग आबादी की मौत हुई. इस पूरी आबादी से लिए चीन से ताबूत गए.

वैसे जापान में मौत के बाद अंतिम संस्कार पर काफी जोर है. यहां तक कि पालतू जानवरों जैसे कुत्ते-बिल्ली की मौत के बाद उन्हें भी ताबूत में दफनाया जाता है. चीन का हेज शहर पालूत जानवरों के लिए भी ताबूत तैयार करने लगा है.

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