कमजोर हो रही है पृथ्वी की Magnetic Field, हमारे satellites के लिए है खतरनाक

पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड सबसे ज्यादा अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में हुई है.
पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड सबसे ज्यादा अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में हुई है.

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के क्षेत्रों में कमजोर हो गया है जिसका असर हमारे सैटेलाइट (Satellites) और अंतरिक्ष यानों पर पड़ा है.

  • Share this:
नई दिल्ली:  पिछले कुछ समय में पृथ्वी (Earth) में कई बदलाव दिखाई दे रहै हैं. जलवायु परिवर्तन तो पहले से ही अपना असर स्पष्ट तौर पर दिखा ही रहा है, लेकिन पृथ्वी सतह के अंदर भी बदलाव हो रहे हैं जिनके बारे में वैज्ञानिकों को पता चला है. अब वैज्ञानिकों को एक और बदलाव केबारे में पता चला है जो दो सौ सालों से धीरे धीरे हो रहा था. हमारी पृथ्वी की चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) की शक्ति कम होती जा रही है.

क्या काम आता है यह चुंबकीय क्षेत्र
यह चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field)  हमारे बहुत ही ज्यादा काम का है. आम लोगों को इसका पता नहीं चलता, लेकिन यह हमारी रक्षा करता है. अंतरिक्ष में खास तौर पर सूर्य से आने वाली हानीकारक शक्तिशाली चुंबकीय तरंगे, अति आवेशित कण इसी चुंबकीय क्षेत्र के कारण धरती पर नहीं पहुंच पाते हैं जिनसे हमें काफी नुकसान हो सकता है.

कहां हो रहा है यह कमजोर
यह चुंकबकीय क्षेत्र खास तौर पर अफ्रीका से दक्षिण अमेरिका के क्षेत्रों में धीरे धीरे कमजोर हो रहा है. वैज्ञानिक इसका कारण जाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इससे हमारी पृथ्वी का चक्कर लगा रहे हमारे सैटेलाइट में कुछ तकनीकी खराब आने लगी है.



कौन कर रहा है इसका अध्ययन
वैज्ञानिक यूरोपीय स्पेस एजेंसी से हासिल किए गए स्वार्म सैटेलाइट समूह के आंकड़ों का अध्ययन कर रहे हैं और प्रभाव के कारणों को जानने का प्रयास कर रहे हैं. इस प्रभाव को ‘साउथ एटलांटिक एनामोली’ (South Atlantic Anomaly) कहा जा रहा है.

Interior of earth
क्रोड़ की गतिविधि के कारण हो रहा है ऐसा


कैसे बनता है यह चुंबकीय क्षेत्र
यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मुताबिक, यह चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की सतह के नीचे की बाह्य क्रोड़ (Outer Core) वाली  परत में बह रहे गर्म तरल लोहे के कारण बनता है. यह परत हमारी पृथ्वी की सतह के 3 हजार किलोमीटर नीचे है. हाल ही में हमारे वैज्ञानिकों ने इस परत में बहुत स्पष्ट बदलाव देखा था. उन्होने पाया था कि पृथ्वी की क्रोड़ की परतें सतह की तुलना में घूमने लगी हैं.

लेकिन  यह भी है चुनौती
जर्मन शोधकर्ता जुर्गेन माट्ज्का का कहना है कि ऐसा प्रभाव पिछले दशक में दिखा था, लेकिन हाल के वर्षों में यह तेजी से विकसित हो रहा है. अच्छी बात यह है कि यह स्वार्म सैटेलाइट समूह के आंकड़ों से इस एनामोली का अध्ययन कर पा रहे हैं. लेकिन चुनौती यह है कि हम कैसे समझें कि वह कौन सी प्रक्रिया है जिसकी वजह से हमारी धरती के अंदर ये बदलाव हो रहे हैं.

इससे पहले यह भी खोजा था वैज्ञानिकों ने
शोधकर्ताओं का मानना है कि चुंबकीय क्षेत्र के कमजोर होने से ही हमारे चुंबकीय ध्रुव अपना स्थान बदल रहे हैं. लेकिन ध्रुवों का स्थान बदलना पृथ्वी के लिए कोई नई घटना नहीं है. लेकिन इसका बदलाव का कारण भी वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के अंतर के क्रोड़ की सतहों के घूमने को बताया था.

Earth, Life on Earth
मैग्नेटिक नॉर्थे पिछले कुछ सालो में तेजी से खिसक रहा है.


तो क्या होगा असर इस एनामोली का
लेकिन चुंबकीय क्षेत्र का कमजोर होने से अंतरिक्ष से आने वाले आवेशित कण वहां स्थित हमारे उपग्रहों में घुस कर उनके काम पर असर डाल सकते हैं. उपकरणों को खराब कर सकते हैं. अभी वैज्ञानिक यह बता पाने की स्थिति में तो नहीं हैं कि यह असर कितना व्यापक होगा, लेकिन उनका मानना है कि यह निश्चित है कि सबसे पहले उपग्रहों पर ही असर हो सकता है.

यह भी पढ़ें:

साल के शुरू में हुआ था दो बड़े Neutron तारों का टकराव, अब पता चला कैसे

खगोलविदों को मिली दुर्लभ तस्वीरें, पता चला कैसे पैदा होते हैं ग्रह

क्या सूरज की खामोशी लाएगी पृथ्वी पर हिम युग', नासा वैज्ञानिकों ने दिया जवाब

मिल गया पृथ्वी पर दूसरा ब्रह्माण्ड, क्यों कह रहे हैं नासा के वैज्ञानिक ऐसा
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज