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Mahadev Govind Ranade Death anniversary: जस्टिस रानाडे ने क्या दिया था देश को

Mahadev Govind Ranade Death anniversary: जस्टिस रानाडे ने क्या दिया था देश को

महादेव गोविंद रानाडे (Mahadev Govind Ranade) को इतिहास की भी बहुत अच्छी जानकारी थी. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

महादेव गोविंद रानाडे (Mahadev Govind Ranade) को इतिहास की भी बहुत अच्छी जानकारी थी. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

जस्टिस रानाडे (Justice Ranade) के नाम के से प्रसिद्ध महादेव गोविंद रानाडे (Mahadev Govind Ranade) एक समाज सुधारक, भारतीय शिक्षाविद, न्यायविद, लेखक, अर्थशास्त्री और इतिहासकार होने के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्य थे. इतनी योग्यताओं के बाद भी वे धार्मिक और समाज सुधारक (Social Reformer) के रूप में ज्यादा प्रसिद्ध हुए. उन्होंने समाज के अनेक कुरीतियों को खत्म करने के लिए सार्थक प्रयास किए और हिंदू धार्मिक मान्यताओं को सुधारने में योगदान दिया.

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    भारत (India) के स्वतंत्रता प्राप्ति के संघर्ष में बहुत से लोगों ने योगदान देने के साथ समाज सुधार जैसे काम भी किए हैं. उन्हें भारत देश और समाज के निर्माण के लिए ज्यादा जाना जाता है. महादेव गोविंद रानाडे (Mahadev Govind Ranade) जिन्हें जस्टिस रानाडे के नाम से जाना जाता है उन्हीं में से एक थे. समाज और धर्म सुधार से लेकर देश में शिक्षा और उसके इतिहास के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए जस्टिस रानाडे को हमेशा ही याद किया जाता रहेगा. एक शांत और धैर्यशील आशावादी के रूप में प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी जस्टिस रानाडे की 16 जनवरी को पुण्यतिथि है.

    पत्नी को भी किया शिक्षित
    जस्टिस रानाडे का जन्म 18 जनवरी 1842 को महाराष्ट्र में नासिक के निफाड़ कस्बे के कट्टर चितपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनका बचपन कोल्हापुर में बीता था जबां उनके पिता मंत्री थे. उनकी पहली की मृत्यु के बाद उनके समाज सुधारवादी मित्र चाहते थे कि वे विधवा विवाह करें, लेकिन रानाडे ने परिवार की इच्छाओं का ख्याल रखते हुए एक बालिका रामाबाई रानाडे से विवाह किया और उन्हें शिक्षित किया. रामाबाई ने पति की मृत्यु के बाद उनके कार्यों को आगे बढ़ाया.

    उच्च शिक्षा हासिल की
    रानाडे की शुरुआती शिक्षा कोल्हापुर के मराठी स्कूल में हुई और बाद में उन्होंने अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाई की. इसके बाद 14 साल की उम्र में वे बम्बई के एल्फिस्टोन कॉलेज में पढ़ने चले गए. वे बॉम्बे यूनिवर्सिटी के पहले बैच के छात्र थे. 1962 में उन्होंने बीए और फिर चार साल बाद एलएलबी की डिग्री प्रथम श्रेणी में हासिल की.

    जज के पद पर भी पहुंचे
    रानाडे ने अपनी योग्यताओं का देश, समाज और धर्म के उत्थान के लिए भरपूर उपयोग किया.  उन्होंने ने ही बॉम्बे यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में भारतीय भाषाओं को शामिल करवाया. अपनी योग्यताओं के कारण वे बॉम्बे स्मॉल कॉसेस कोर्ट में प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए. 1893 तक वे बॉम्बे हाई कोर्ट के जज बन चुके थे.

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    महादेव गोविंद रानाडे (Mahadev Govind Ranade) ने समाज और धार्मिक कुरीतियों का पुरजोर विरोध किया. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    इतिहास की विशेष जानकारी
    इतना ही नहीं उन्हें एल्फिन्स्टोन कॉलेज में इतिहास का अनुदेशक के रूप में नियुक्त किया गया. इसकी वजह से उनकी भारतीय इतिहास में, खास तौर पर मराठा इतिहास में विशेष रुचि पैदा हुई जिसकी वजह से उन्होंने 1900 तक ‘राइज ऑफ मराठा पॉवर’ पुस्तक भी लिख डाली. इतिहास के विशेषज्ञता के कारण ही वे इस बात से हमेशा चिंचित रहते थे कि भारतीयों में इतिहास के प्रति जरूरी संवेदनशीलता नहीं कभी नहीं रही.

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    समाज के सुधार के लिए
    रानाडे के समाज सुधार के प्रयास हमेशा शिक्षा से प्रभावित दिखाई दिया करते थे. धार्मिक सुधार से लोकशिक्षा  से लेकर वे भारतीय परिवारों के हर पहलू में एक प्रगतिवादी सुधार देखना चाहते थे. बेकार रूढ़िवादी परम्पराओं और मान्यताओं के वे पूरी तरह विरोधी थे. उन्होंने विवाह आडंबरों पर अनावश्यक खर्चों, बाल विवाह, विधवा मुंडन, सागर पार यात्रा पर जातिगतप्रतिबंध जैसी कई कुरीतियों का विरोध किया.

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    महादेव गोविंद रानाडे (Mahadev Govind Ranade को भारत के अर्थशास्त्र का जनक भी कहा जाता है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    हिंदू धर्म के लिए
    रानाडे का हिंदू धर्म के आध्यात्म पक्ष की ओर ज्यादा झुकाव था. उनका मानना था उनके समय हिंदू धर्म कर्माकांडों में ज्यादा उलझा हुआ है. उन्होंने प्रार्थना समाज की स्थापना में योगदान दिया जो ब्रह्म समाज से प्रेरित आंदोलन था. इसके अलावा विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा पर विशेष  कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र कन्या शिक्षा समाज कीस्थापना की.

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    रानाडे  ने पूना सार्वजनिक सभा की स्थापना की और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वे संस्थापक सदस्यों में से एक थे.  इसके अलावा अर्थशास्त्र पर उनके विचार बहुत ही मूल्यवान माने जाते हैं. उन्होंने ही सबसे पहले भारत की आर्थिक समस्याओं को गहराई से समझधा और सभी आर्थिक क्षेत्रों, कृषि, उद्योग आदि की समस्याओं का गहन अध्ययन किया तथा समस्याओं के समाधान भी प्रस्तुत किए. उन्हें कई बार भारतीय अर्थशास्त्र का जनक भी कहा जाता है.

    Tags: Freedom Struggle Movement, History, India

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