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क्या महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना फिर अलग होकर लड़ेंगे चुनाव?

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: September 20, 2019, 9:20 AM IST
क्या महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना फिर अलग होकर लड़ेंगे चुनाव?
चुनावों से ठीक पहले बीजेपी और शिवसेना के बीच टिकट बंटवारे पर फिर टकराव की स्थिति बन गई है

Maharashtra assemblye election 2019: महाराष्ट्र में चुनावों की आहट के बीच बीजेपी और शिवसेना (BJP-Shivsena) के बीच टिकट बंटवारे को लेकर टकराव शुरू हो चुका है. हालात एक बार फिर 2014 के विधानसभा चुनाव की तरह बन गए हैं...

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  • Last Updated: September 20, 2019, 9:20 AM IST
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Maharashtra Assemblye Election 2019: महाराष्ट्र (Maharashtra) में विधानसभा चुनावों (assembly election 2019) को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है. कुछ दिनों में चुनाव की तारीखों का ऐलान हो जाएगा. बीजेपी (BJP) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा महाराष्ट्र दौरे पर हैं. प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) अगले बुधवार को नासिक में एक बड़ी रैली कर चुनावी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं. ये 2019 में बीजेपी की भारीभरकम जीत के बाद पीएम मोदी की महाराष्ट्र में पहली बड़ी रैली होगी.

महाराष्ट्र में चुनावी सरगर्मी बढ़ने के साथ ही बीजेपी-शिवसेना (BJP-Shivsena) के बीच गठबंधन को लेकर तकरार भी बढ़ गई है. दोनों पार्टियों के बीच टिकट बंटवारे का मसला अटका पड़ा है. बीजेपी शिवसेना को आधे का साझीदार बनाने को तैयार नहीं है और शिवसेना अपने को किसी भी तरह से बीजेपी से कम मानने को राजी नहीं है.

उद्धव ठाकरे ने शुरू कर दी है प्रेशर पॉलिटिक्स

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रेशर पॉलिटिक्स की शुरुआत कर दी है. उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के जरिए बीजेपी नेतृत्व तक संदेश पहुंचाने की कवायद शुरू कर दी है. उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि बात नहीं बनने की स्थिति में वो सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी रखें. इसी प्रेशर पॉलिटिक्स के चलते 2019 के लोकसभा चुनाव में आखिरी वक्त में जाकर बीजेपी-शिवसेना के बीच गठबंधन बन पाया था.

इस साल के लोकसभा चुनाव के पहले तक कई मुद्दों पर शिवसेना, बीजेपी को घेरती रही थी. राज्य सरकार में साझीदार होते हुए भी शिवसेना ने बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी पर तीखे हमले किए थे. पुलवामा अटैक के बाद शिवसेना ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि अमेरिका और यूरोप की तरफ देखने के बजाए अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी.

maharashtra assembly election 2019 has bjp shivsena separted their way before poll
2014 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी-शिवसेना का 25 साल पुराना रिश्ता टूट गया था


राफेल डील पर भी शिवसेना ने मोदी सरकार पर हमले किए थे. पार्टी की तरफ से कहा गया था कि जब चोरी हुई ही नहीं तो फिर जांच में डर किस बात का. यहां तक की दिसंबर 2018 में एक रैली में उद्धृव ठाकरे ने यहां तक कह डाला था कि आजकल चौकीदार ही चोर है. उस वक्त कांग्रेस चौकीदार चोर है के नारे का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर ले रही थी.
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2014 के बाद बीजेपी-शिवसेना के तीखे-मीठे रिश्ते

हालांकि केंद्र सरकार पर तीखे हमले के बावजूद शिवसेना महाराष्ट्र की सरकार में साझीदार बनी रही और बीजेपी भी शिवसेना का हाथ झटकने का जोखिम मोल न ले पाई. लोकसभा चुनाव में भी सीटों के बंटवारे को लेकर पेंच फंसा था. आखिर में महाराष्ट्र की कुल 48 सीटों पर हो रहे चुनाव में बीजेपी 25 और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ने पर राजी हुई थी. गठबंधन ने मिलकर कुल 48 सीटों में से 41 सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजेपी 23 सीटें झटकने में कामयाब रही, वहीं शिवसेना ने भी 18 सीटों पर जीत हासिल की.

लेकिन अब विधानसभा चुनाव से ऐन पहले बराबरी के फॉर्मूले पर फिर बात अटक गई है. बीजेपी का कहना है कि 2014 की तुलना में इस साल हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट शेयर बढ़ा है. इसलिए उसे ज्यादा बड़ी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए. पार्टी के एक नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे का फायदा शिवसेना तक को मिला है. लोकसभा चुनाव में शिवसेना को 18 सीटों पर पीएम मोदी के चेहरे का फायदा मिला.

maharashtra assembly election 2019 has bjp shivsena separted their way before poll
2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शिवसेना से करीब दुगुनी सीटें जीती थीं


बीजेपी चाहती है कि राज्य में वो बड़े भाई की भूमिका में रहे. लेकिन शिवसेना बीजेपी का दर्जा बढ़ाने को तैयार नहीं है. बताया जा रहा है कि शिवसेना को बराबरी से नीचे का फॉर्मूला मंजूर नहीं है. इस फॉर्मूले के मुताबिक शिवसेना चाहती है कि कुल 288 विधानसभा सीटों में से बीजेपी और शिवसेना 135-135 सीटों पर चुनाव लड़े और बाकी की 18 सीटें सहयोगियों के लिए छोड़ दी जाएं. हालांकी बीजेपी, शिवसेना को 100-110 सीटों से ज्यादा देने को तैयार नहीं दिख रही है.

2014 के विधानसभा चुनाव में क्या हुआ था?

2014 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी-शिवसेना 25 साल के गठबंधन साझीदार थे. लेकिन 2014 का चुनाव आते-आते बात बिगड़ गई. उस वक्त भी सीट बंटवारे पर ही पेंच फंसा था. 2014 के लोकसभा चुनाव नतीजों से उत्साहित बीजेपी अपने लिए ज्यादा सीटों की मांग कर रही थी. लेकिन शिवसेना 2014 के मोदी लहर का गवाह बनने के बावजूद बीजेपी को बड़ा भाई मानने को तैयार नहीं थी.

शुरुआत में बीजेपी 114 सीटें मांग रही थी. बाद में उसने अपने रुख में नरमी लाते हुए 130 सीटों की डिमांड रखी लेकिन शिवसेना उसे 119 सीटों से ज्यादा देने को राजी नहीं थी. शिवसेना अपने पास 151 सीटें रखकर बीजेपी को 119 और बाकी सहयोगियों के लिए 18 सीटें छोड़ रही थीं.

maharashtra assembly election 2019 has bjp shivsena separted their way before poll
उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फड़णवसी के बीच अच्छे रिश्तों की वजह से अब तक बनी है गठबंधन की संभावना


इस फॉर्मूले पर बात नहीं बन पाई और दोनों का 25 साल पुराना रिश्ता टूट गया. बीजेपी और शिवसेना ने अलग-अलग होकर चुनाव लड़ा. 2014 के चुनाव में बीजेपी ने 122 सीटों पर जीत हासिल की. जबकि शिवसेना को सिर्फ 63 सीटों पर जीत हासिल हुई. हालांकि अलग-अलग लड़ने के बाद भी चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी-शिवसेना की गठबंधन सरकार बनी और शिवसेना सरकार में शामिल हुई.

एक बार फिर 2014 जैसे ही हालात हैं. 2014 के बाद लगातार दूसरी बार बीजेपी अपनी सबसे मजबूत स्थिति में है. 2014 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर भी बीजेपी ज्यादा बड़ी हिस्सेदारी की वाजिब मांग रख रही है. लेकिन शिवसेना इसके बावजूद कम पर मानने को तैयार नहीं है.

महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के गठबंधन की संभावना के लिए अच्छी बात ये है कि महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस के साथ शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के अच्छे संबंध हैं. लेकिन सीट बंटवारा पेंचीदा मसला है. ये इसलिए भी और पेंचीदा हो गया है कि पिछले दिनों कांग्रेस और एनसीपी के बहुत सारे बड़े नेता ने बीजेपी का दामन थामा है. बीजेपी के भीतर टिकट दावेदारों की फौज है, जिससे निपटना आसान नहीं है.

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First published: September 20, 2019, 9:19 AM IST
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