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महाराष्ट्र में बीजेपी को क्यों नहीं आए मनमुताबिक नतीजे

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Updated: October 24, 2019, 3:43 PM IST
महाराष्ट्र में बीजेपी को क्यों नहीं आए मनमुताबिक नतीजे
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे बीजेपी के मनमुताबिक नहीं आए हैं.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election) के नतीजे बीजेपी (BJP) के मनमुताबिक नहीं आए हैं. ऐसा क्या हुआ कि लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने वाली बीजेपी विधानसभा चुनाव में 2014 में जीती सीटों तक नहीं पहुंच पाई...

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  • Last Updated: October 24, 2019, 3:43 PM IST
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महाराष्ट्र (Maharashtra) में बीजेपी (BJP) के मनमुताबिक नतीजे नहीं आए हैं. 2014 के विधानसभा चुनाव (assembly election) में बीजेपी को 122 सीटें मिली थीं. वहीं शिवसेना ने 63 सीटों पर जीत हासिल की थी. 2014 के चुनाव में अलग-अलग लड़कर भी बीजेपी ने 122 सीटें जीती थीं. इस बार बीजेपी-शिवसेना गठबंधन करके चुनाव में उतरी थी लेकिन फिर भी उसे पिछले चुनाव की तुलना में करीब 20 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है.

शिवसेना के लिए नतीजों की टैली पिछले चुनाव के करीब ही है. पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना अकेले सभी सीटों पर लड़ी थी और 63 सीटों पर जीत हासिल की थी. इस बार 124 सीटों पर लड़कर तकरीबन उतनी ही सीटें जीतती दिखाई दे रही हैं.

गठबंधन में शिवसेना का पलड़ा भारी

बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में शिवसेना का पलड़ा भारी होता दिखाई दे रहा है. तभी नतीजों के रुझान आने के साथ ही शिवसेना की तरफ से सीएम पद के डिमांड की खबर तैरने लगी. सवाल है कि आखिर बीजेपी से कहां चूक हुई कि उसे नुकसान सहना पड़ा?

2019 के लोकसभा चुनाव तक में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया था. बीजेपी ने महाराष्ट्र की 48 सीटों में से 23 सीटों पर जीत हासिल की थी. फिर विधानसभा के चुनाव में ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी के मनमुताबिक नतीजे नहीं आए. महाराष्ट्र की कुल 288 विधानसभा सीटों में बीजेपी को उम्मीद थी कि कम से कम आधी सीटों पर बाजी मार ले जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं हो सका है. बीजेपी की उम्मीदों पर पानी फिरा है.

maharashtra assembly election 2019 why bjp and devendra fadnavis could not match 2014 election result tally
गठबंधन में शिवसेना का पलड़ा भारी होगा


देवेंद्र फडणवीस का राजनीतिक कद घटेगा?
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देवेंद्र फडणवीस के लिए ये बड़ा झटका है. उन्हें उम्मीद थी कि वो 2014 से ज्यादा सीटें जीतने के साथ सत्ता में वापसी करेंगे. बीजेपी ने अपने मनमुताबिक टैली पाने के लिए रणनीति भी बनाई थी. पूरा महाराष्ट्र चुनाव राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर लड़ा गया. बीजेपी को लग रहा था कि इन दो मुद्दों पर उसे जनता का साथ मिलेगा.

बीजेपी ने आर्थिक मंदी और घटते रोजगार की वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे से करने की रणनीति बनाई थी. लेकिन लगता है कि महाराष्ट्र की जनता सिर्फ इन दो मुद्दों के आधार पर वोट नहीं कर पाई.

दूसरे दल के नेता बीजेपी में आकर नहीं जीत पाए

दूसरे दलों के माहिर राजनेताओं को तोड़कर बीजेपी में लाने की रणनीति भी काम नहीं कर पाई. जो बड़े नेता दूसरी पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए थे, उन्हें भी जीत के लिए तरसना पड़ा. सतारा लोकसभा सीट छोड़कर उदयन राजे भोसले बीजेपी में शामिल हुए थे. लेकिन उपचुनाव में वो भी पिछड़ते दिख रहे हैं.

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2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 122 सीटें मिली थी.


छत्रपति शिवाजी महाराज की पीढ़ी से आने उदयन एनसीपी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. उदयन के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी रैली भी की थी. उदयन के बारे मे कहा जाता है कि वो इस इलाके में काफी लोकप्रिय हैं और वो चाहे जिस पार्टी से चुनाव लड़े उनकी जीत तय मानी जाती है. उदयन 2009 में कांग्रेस और 2014 में एनसीपी के टिकट से सांसद चुने गए थे. लेकिन इस चुनाव में उनकी भी नहीं चल पाई. बीजेपी के लिए भी ये रणनीतिक हार है.

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First published: October 24, 2019, 3:43 PM IST
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