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शिवसेना-कांग्रेस के करीब आने से न हों हैरान, भारत में हो चुके हैं इससे भी बेमेल गठजोड़

News18Hindi
Updated: November 12, 2019, 1:43 PM IST
शिवसेना-कांग्रेस के करीब आने से न हों हैरान, भारत में हो चुके हैं इससे भी बेमेल गठजोड़
सरकार बनाने के लिए शिवसेना और कांग्रेस करीब आ रहे हैं

महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार बनाने के लिए शिवसेना (Shiv Sena) और कांग्रेस (Congress) के करीब आने पर सबको हैरानी हो रही है. हालांकि ऐसे बेमेल गठबंधनों का इतिहास रहा है...

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  • Last Updated: November 12, 2019, 1:43 PM IST
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महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार बनाने को लेकर सस्पेंस अभी तक बना हुआ है, लेकिन महाराष्ट्र में सत्ता पाने के लिए जिस तरह का गठबंधन बनने जा रहा है, उससे सबको हैरानी हो रही है. शिवसेना (Shiv Sena), बीजेपी (BJP) का साथ छोड़कर एनसीपी (NCP) और कांग्रेस (Congress) से हाथ मिलाने जा रही है. शरद पवार, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को पार्टी के बड़े नेताओं के साथ दिल्ली में राय मशविरा किया. उन्होंने महाराष्ट्र के नए चुने कांग्रेस विधायकों से भी राय ली है. महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायक जहां कांग्रेस को गठबंधन में शामिल होने की सलाह दे रहे हैं, वहीं दिल्ली में कांग्रेस के सीनियर लीडर इस गठबंधन से हिचक रहे हैं. शिवसेना की सरकार को कांग्रेस का समर्थन किसी के गले नहीं उतर रहा है. हालांकि इस तरह के गठबंधन के कई उदाहरण मिल जाते हैं.

कांग्रेस और बीजेपी तक में हो चुका है गठबंधन
सबसे ज्यादा हैरान करने वाला एक गठबंधन तो कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही हो चुका है. इसकी बाकायदा मिसाल दी जा सकती है. मिजोरम में चकमा स्वायत्त जिला परिषद के गठन के लिए कांग्रेस और बीजेपी के बीच गठबंधन हो चुका है.

चकमा स्वायत्त जिला परिषद के 20 सदस्यों के लिए 2018 में चुनाव हुए थे. इस चुनाव में नॉर्थ इस्ट में बीजेपी की सहयोगी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. मिजो नेशनल फ्रंट के 8 सदस्य चुने गए, कांग्रेस के 7 और बीजेपी के 5 उम्मीदवार विजयी रहे.

इसके बाद जिला परिषद पर कब्जे के लिए कांग्रेस और बीजेपी के बीच चुनाव बाद गठबंधन हुआ. कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने इस बाबत दिल्ली के सीनियर लीडर्स से बात की. कांग्रेस के स्थानीय नेता इस गठबंधन को उचित मान रहे थे. जबकि केंद्रीय नेतृत्व ने बीजेपी के साथ इस पैक्ट को छुपाने के लिए उसका ऐलान नहीं किया. मसले को स्थानीय स्तर पर सुलझाते हुए कांग्रेस बीजेपी का गठबंधन बना.

चकमा स्वायत्त जिला परिषद में कांग्रेस बीजेपी की सरकार बनी. अगस्त 2019 में कांग्रेस के 3 सदस्य बीजेपी में शामिल हो गए. हालांकि बाद में एक सदस्य ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और इस तरह बीजेपी के सदस्यों की संख्या 7 हो गई.
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महाराष्ट्र में शिवसेना अपना सीएम बनाने पर अड़ी है


जब जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी साथ आए
जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी का गठबंधन भी हैरान करने वाला ही था. दोनों पार्टियों की विचारधारा का कोई मेल नहीं, लेकिन सरकार बनाने के लिए दोनों साथ आ गए. 2014 के चुनाव के बाद जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी की गठबंधन सरकार बनी थी.

गठबंधन में जाने से पहले बीजेपी का मत था कि पीडीपी अलगाववादियों का समर्थन करने वाली पार्टी है. चुनावों के दौरान बीजेपी ने पीडीपी पर तीखे हमले किए थे. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना बीजेपी के घोषणापत्र में शामिल है, जबकि पीडीपी की विचारधारा है कि अनुच्छेद 370 की वजह से ही जम्मू कश्मीर भारत के साथ जुड़ा हुआ है. इस स्तर की अलग-अलग विचारधारा रखने के बावजूद जम्मू कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी की गठबंधन सरकार बनी. हालांकि 2018 में ये गठबंधन टूट गया.

जब कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी की सरकार का समर्थन किया
2013 के दिल्ली चुनाव में भी इस तरह का गठबंधन बना था. दिल्ली में कांग्रेस की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए आरटीआई एक्टिविस्ट अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी बनाकर चुनाव में उतर गए थे. उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस सरकार को खूब कोसा. केजरीवाल ने दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार पर तीखे हमले किए.

चुनाव नतीजों में किसी को बहुमत नहीं मिला लेकिन बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई. बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी की सरकार को बाहर से समर्थन देना स्वीकार कर लिया. कांग्रेस के सहयोग से अरविंद केजरीवाल दिल्ली के सीएम बने.

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अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बना चुके हैं


जब कांग्रेस ने कर्नाटक में बीजेपी को रोकने के लिए जेडीएस से हाथ मिलाया

इसी तरह का गठबंधन 2018 में कर्नाटक में बना. कांग्रेस और जेडीएस एकदूसरे के विरोधी दल थे. चुनाव प्रचार के दौरान दोनों ने एकदूसरे के ऊपर तीखे हमले किए. लेकिन चुनाव नतीजों ने दोनों को एकदूसरे के करीब ला दिया. कर्नाटक के चुनाव नतीजों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन बहुमत के आंकड़े को नहीं छू पाई. बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस ने कर्नाटक में जेडीएस की सरकार का समर्थन कर दिया. कांग्रेस के सहयोग से एचडी कुमारस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री बने. हालांकि ये सरकार भी ज्यादा दिन नहीं चल पाई.

बीजेपी के सहयोग से बीएसपी दो बार बना चुकी है यूपी में सरकार

विपरित विचारधारा वाली पार्टियों का परिस्थितिवश एकदूसरे के करीब आने का इतिहास रहा है. कभी सरकार बनाने के लिए बेमेल गठबंधन बने तो कभी किसी खास पार्टी को रोकने के लिए. 1995 में इसी तरह के गठबंधन में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में बीएसपी की सरकार बनवाई थी.

1993 के चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन की सरकार बनी थी. मुलायम सिंह यादव राज्य के मुख्यमंत्री बनाए गए थे. लेकिन लखनऊ के मशहूर गेस्ट हाउस कांड के बाद बीएसपी ने समाजवादी पार्टी की सरकार को दिया समर्थन वापस ले लिया. जिस दिन बीएसपी ने समर्थन वापस लिया, उसी दिन बीजेपी ने बीएसपी की सरकार को समर्थन दे दिया और मायावती राज्य की मुख्यमंत्री बनीं.

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First published: November 12, 2019, 1:11 PM IST
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