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महर्षि महेश योगी: जिन्‍होंने बीटल्स को योग सिखाया और यूरोप में चलाई राम नाम की मुद्रा

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Updated: February 5, 2019, 4:59 AM IST
महर्षि महेश योगी: जिन्‍होंने बीटल्स को योग सिखाया और यूरोप में चलाई राम नाम की मुद्रा
महर्षि महेश योगी

महर्षि महेश योगी कहते थे कि वे अपने भक्तों को उड़ना सिखाते हैं. उनके द्वारा शुरू किए गए ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन में भक्त फुदकते हुए उड़ने की कोशिश करते थे.

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5 फरवरी को ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन की शुरुआत करने वाले महर्षि महेश योगी की पुण्यतिथि है. साल 2008 में नीदरलैंड स्थित अपने आवास पर महर्षि महेश योगी का निधन हुआ था. उस वक्त वह 91 साल के थे. महर्षि महेश योगी को योग और ध्यान को दुनियाभर में फैलान का श्रेय जाता है.

महर्षि महेश योगी का जन्म 12 जनवरी 1918 को छत्तीसगढ़ के राजिम शहर के पास पांडुका गांव में हुआ था. उनका मूल नाम महेश प्रसाद वर्मा था. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक की डिग्री ली. महर्षि योगी ने 13 साल तक ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती के सान्निध्‍य में शिक्षा ग्रहण की. स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने ही उन्हें बाल ब्रह्मचारी की उपाधि देकर उन्हें महर्षि महेश योगी का नाम दे दिया.

महर्षि महेश योगी ने ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन के जरिए दुनियाभर में अपने लाखों अनुयायी बनाए थे. उन्होंने योग और ध्यान से बेहतर स्वास्थ्य और आध्यात्मिक ज्ञान का वायदा किया और पूरी दुनिया से कई मशहूर लोग उनसे जुड़ गए. वह 60 के दशक में मशहूर रॉक बैंड बीटल्स के सदस्यों के आध्यात्मिक गुरु बने. बैंड के सदस्य उनके साथ वीकेंड बिताया करते थे. हालांकि बाद में बीटल्‍स उनसे अलग हो गए थे.

महर्षि महेश योगी कहते थे कि वे अपने भक्तों को उड़ना सिखाते हैं. उनके द्वारा शुरू किए गए ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन में भक्त फुदकते हुए उड़ने की कोशिश करते थे. 'फ्लाइंग योगा' को महर्षि ने 'ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन सिद्धि प्रोग्राम' का नाम दिया था. उनका कहना था कि यह थिअरी रिसर्च के बाद विकसित की गई है. हालांकि बाद में कई लोगों ने आरोप लगाया था कि महर्षि ने उड़ने के दावे से मूर्ख बनाया.

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(फाइल फोटो)


महर्षि महेश योगी ने राम नाम की मुद्रा भी चलाई थी. उनकी संस्था 'ग्लोबल कंट्री वर्ल्ड ऑफ पीस' ने 2002 में इस मुद्रा को जारी किया था. साल 2003 में नीदरलैंड्स ने इसे कानूनी मान्यता दे दी. राम नाम की मुद्रा में 1, 5 और 10 के नोट थे. उस वक्त नीदरलैंड्स के कुछ गांवों और शहरों के 100 से भी ज्यादा दुकानों में ये नोट चलते थे. इसके अलावा अमेरिका के आइवा के महर्ष वैदिक सिटी में भी राम मुद्रा का प्रचलन था. इसके अलावा 35 अमेरिकी राज्यों में राम पर आधारित बॉन्डस शुरू किए गए थे.1960-70 के दशक के दौरान करीब 60 लाख लोग महर्षि महेश योगी के शिष्य थे. निधन से पहले 11 जनवरी 2008 को उन्होंने ये कहकर रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी कि अब उनका काम पूरा हो गया है.

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First published: February 5, 2019, 4:16 AM IST
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