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इस वजह से ग्‍लानि में थे गांधी जी, करना चाहते थे आत्‍महत्‍या

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: October 14, 2019, 9:48 PM IST
इस वजह से ग्‍लानि में थे गांधी जी, करना चाहते थे आत्‍महत्‍या
गुजरात में 9वीं कक्षा की एक परीक्षा में महात्मा गांधी को लेकर पूछे गए एक सवाल पर हंगामा मचा है

बचपन में वो अपनी कई हरकतों के बाद खुद को अपराधबोध से ग्रस्त भी पाते थे. किशोर उम्र में एक समय ऐसा था, जब उनकी सोहबत सही नहीं थी, जिसमें उन्होंने कई गलत काम किए.

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  • Last Updated: October 14, 2019, 9:48 PM IST
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गुजरात में 9वीं कक्षा की एक परीक्षा में महात्मा गांधी को लेकर पूछे गए एक सवाल पर हंगामा मचा है. दरअसल छात्रों से पूछा गया कि 'महात्मा गांधी ने आत्महत्या के लिए क्या किया था?' इस पर कई लोगों ने आपत्ति जताते हुए सवाल को गलत बताया. उनका कहना है कि गांधी ने आत्महत्या नहीं की थी. लोगों की आपत्ति के बाद जांच के आदेश दे दिए गए. हांलांकि यहां यह जानना जरूरी है कि महात्मा गांधी ने अपनी युवावस्था के दौरान सच में एक बार आत्महत्या का इरादा किया था. हालांकि फिर वह अपने कदम से पीछे हट गए. महात्मा गांधी की जीवनी में इस पूरी घटना का जिक्र है.

महात्मा गांधी  (Mahatma Gandhi) जब किशोर थे, तब वो अजीबोगरीब कुंठाओं से घिरे रहते थे. कमजोर और दब्बू भी थे. कई बार उन्होंने जाने-अनजाने में ऐसी हरकतें की इससे खुद अपराधबोध से ग्रस्त हो गए. किशोर उम्र में एक समय ऐसा था, जब उनकी सोहबत सही नहीं थी, जिसमें उन्होंने कई गलत काम भी किए.

गांधीजी को तब मोहनदास (Mohandas Karamchand Gandhi) के रूप में जाना जाता था. उन्होंने अपनी आत्मकथा में इन कामों को स्वीकार किया. गांधी के जीवनी लेखकों ने भी इस पर लिखा.

किशोर मोहनदास ने तब चोरी की. सिगरेट पी. आत्महत्या करने के बारे में सोचा. एक दिन वो वेश्या के कोठे पर भी पहुंच गए. पोरबंदर और राजकोट में वो दिन उनके लिए अजीब से ही थे.

महताब से दोस्ती और अजीबोगरीब प्रयोग
स्कूल के दिनों में मोहनदास की दोस्ती और जान-पहचान नहीं के बराबर थी. दब्बू होने के कारण वो किसी से बात नहीं कर पाते थे. परिवार में ही इतने हमउम्र थे कि उनका समय ज्यादातर उन्हीं के बीच गुजरता था.

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परिवार के बाहर पहली बार उनका जो दोस्त बना, उसका नाम शेख महताब था. उससे भी उनकी जान पहचान इसलिए हो पाई, क्योंकि वो उनके बड़े भाई कर्णवदास का मित्र था. शेख महताब निडर और साहसी था.

मोहनदास गांधी अपने इस मुसलमान मित्र की निडरता और ताकत से प्रभावित थे. उसके जैसा बनना चाहते थे.

किशोर गांधी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर अजीबोगरीब काम किए, जिसने उन्हें ग्लानि से भर दिया


महताब ने उन्हें बताया कि मांस खाने से वो अपनी ताकत बढ़ा सकते हैं. गांधीजी का परिवार विशुद्ध शाकाहारी परिवार था. मांस खाने की बात तो दूर रही, उसके बारे में बात करना भी पाप था. लेकिन गांधीजी उसकी बातों से इतने प्रभावित हो गए कि उन्होंने मांस खाने की कोशिश की ताकि ताकत बढ़ाई जा सके, लेकिन वो अपने इस प्रयोग में बुरी तरह विफल रहे.

प्रयोग कोठे पर जाने का
फिर महताब ने मोहनदास पर दबाव डाला कि उन्हें अपना पुरुषत्व देखने के लिए वेश्यालय चलना चाहिए. उसने आश्वस्त किया कि इसमें कोई बुराई नहीं है, बल्कि इस प्रयोग के बाद वह खुद को गजब का पुरुष महसूस करने लगेंगे.

समस्या ये हुई कि गांधीजी के पास पैसा नहीं था. पैसा महताब की जेब से निकला. दोनों साथ में कोठे पर पहुंचे. वहां महताब किसी वेश्या के साथ अलग कमरे में चला गया. किशोर गांधी को एक अन्य महिला के हवाले कर दिया.

किशोर गांधी का व्यक्तित्व महात्मा गांधी से एकदम अलग था


थर-थर कांप रहे थे गांधी
मोहनदास कोठे में महिला के साथ कमरे में चले तो गए. उस एकांत ने उनके होश उड़ा दिए. वह एक कोने में सहमे बैठे रहे.

एकाध बार जब उस महिला ने उन्हें हाथ लगाया तो वह थर-थर कांपने लगे. थोड़ी देर तक जब यही स्थिति बनी रही तो वो महिला ऊब गई. उसने धक्का देकर उन्हें कमरे से बाहर निकाल दिया.

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अपराधबोध और बढ़ गया
मोहनदास यकीनन उस प्रयोग से सकुशल बच गए. लेकिन कोठे पर जाने के इस कदम ने उनके अपराध बोधों में एक और वृद्धि हो गई.

अब उन्हें लगने लगा कि उन्होंने वेश्यालय जाकर अपने पुरुषत्व को चोट पहुंचाई है. चूंकि ये कदम उन्होंने कस्तूरबा से शादी के बाद उठाया था, लिहाजा वह ज्यादा ग्लानि से भी भर उठे थे. कस्तूरबा से हालांकि ये बात उन्होंने कभी नहीं बताई. लेकिन उन्हें लगने लगा कि महताब की बातों में आकर वो गलतियां कर रहे हैं. उन्होंने खुद को फिर उससे दूर कर लिया.

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किशोरवय में गांधीजी को सिगरेट पीने की लत लगी, जिसके लिए उन्होंने पैसे भी चुराए


चोरी कर सिगरेट पीते थे
महताब की दोस्ती से पहले मोहनदास जब हाईस्कूल में थे तो उन्हें सिगरेट पीने की लत लग गई. अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर वह खूब सिगरेट पीते थे, जिन्हें वो दोनों अपने चाचा के यहां से चुराते थे.

जब सिगरेट खत्म हो जाती तो हरी सब्जियों के पत्तों की सिगरेट बनाकर पी लेते. कभी कभी नौकरों के पैसे चुराकर असली सिगरेट खरीद लाते.

नौकरों के यहां जब ज्यादा चोरियां होने लगीं तो दोनों अपराधबोध से भर गए. उन्होंने अपराध स्वीकार तो नहीं किया बल्कि अपराध से छुटकारे के लिए आत्महत्या करने का फैसला किया.

जब आत्महत्या करने निकले
दोनों आत्महत्या करने जंगल गए. धतूरा ढूंढने लगे. उस समय माना जाता था कि धतूरा खाने पर मौत हो जाती है. धतूरा मिलने के बाद वो दोनों एक मंदिर गए. मृत्यु से पहले के संस्कार पूरे किए. उसके बाद एक सुनसान स्थान पर धतूरे के बीज खाए, लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो आगे के कदम पर बहस करने लगे. वो सोच रहे थे कि अगर धतूरे से भी नहीं मरे तो आगे क्या करेंगे.

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गांधीजी ने धतूरा खाकर अपने भाई के साथ आत्महत्या की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो पाए(तस्वीर : getty)


अगला सवाल मन में आया- क्या आत्महत्या करनी बहुत जरूरी है. इस सवाल पर गंभीरता से विचार करने के बाद दोनों मंदिर में पूजा कर घर लौट आए. तब जीवित रहने के लिए मोहनदास के पास एक और महत्वपूर्ण कारण था. कुछ ही समय में उनका विवाह होने वाला था.

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First published: October 14, 2019, 11:26 AM IST
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