न जमीन की जरूरत न पानी की, अब सीधे हवा से मिलेगा खाना

अब तक फूड के लिए खेती लायक जमीन, पानी और अनुकूल मौसम की जरूरत पड़ती थी. लेकिन अब सिर्फ हवा के जरिए फूड हासिल किया जा सकता है. ये एक साइंस के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है..

News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 10:48 AM IST
न जमीन की जरूरत न पानी की, अब सीधे हवा से मिलेगा खाना
अब सीधे हवा से बनाया जा सकेगा सोलीन नाम का प्रोटीन पाउडर
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Updated: July 30, 2019, 10:48 AM IST
कई बार विज्ञान के करिश्मों पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है. क्या आप भरोसा कर सकते हैं कि अब हवा से मिलेगा खाना? सिर्फ हवा के जरिए खाना हासिल किया जा सकता है इस बात पर यकीन करना मुश्किल हो सकता है. लेकिन ये सच है कि अब हवा से खाना मिलना संभव होने जा रहा है.

फिनलैंड की एक कंपनी सोलर फूड बनाने जा रही है. ऐसे फूड के लिए सिर्फ  कार्बन डाइऑक्साइड, पानी और बिजली की जरूरत होगी. हवा, पानी और बिजली से सोलीन (solein) नाम का प्रोटीन पाउडर बनने जा रहा है.

दिखने में आटे जैसा, स्वाद भी आटे जैसा
हवा से बनने वाला सोलीन प्रोटीन पाउडर दिखने में आटे जैसा होगा. हाई प्रोटीन वाले इस फूड में 50 फीसदी प्रोटीन, 5 से 10 फीसदी फैट और 20 से 25 फीसदी कार्ब कंटेट्स होंगे. कंपनी का दावा है कि ये दिखने में भी आटे जैसा होगा और इसका टेस्ट भी आटे जैसा होगा. फिनलैंड की कंपनी हवा से बनाए जाने वाले इस फूड के लिए मार्केट तलाश रही है. इससे कई तरह का खाना बनाया जा सकता है. कंपनी वर्ष 2021 तक इसे मार्केट में उतार सकती है.

ये अपने तरह का पहला प्रयोग है. इसे साइंस के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है. कंपनी का कहना है कि पहले पहल मार्केट में इसे प्रोटीन शेक और योगर्ट के तौर पर उतारा जाएगा. हवा से मिलने वाले फूड सोलीन बनाने का प्रोसेस कॉर्बन न्यूट्रल होगा. कंपनी का कहना है कि दुनिया में पहले से ही ग्रीन हाउस गैसेज़ की वजह से समस्याएं पैदा हो रही हैं. क्यों न इसके इस्तेमाल की बात सोची जाए. सोलीन बनाने की प्रक्रिया इसी दिशा में एक कदम है.

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दिखने में आटे जैसा होगा प्रोटीन पाउडर सोलीन


कैसे बनाया जाएगा हवा से खाना
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सोलीन फूड बनाने के लिए हवा से कार्बन डाइऑक्साइड लिया जाएगा. इसके लिए कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके बाद इसमें पानी, विटामिंस और न्यूट्रीएन्ट्स मिलाया जाएगा. इसके बाद सोलर एनर्जी के इस्तेमाल से सोलीन बनाया जाएगा. इसे बनाने की प्रक्रिया नेचुरल फरमंटेशन की तरह होगी, जिस तरह से यीस्ट और लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया बनाया जाता है.

न जमीन की जरूरत न पानी की
सोलर फूड बनाने के लिए न खेती वाली जमीन की जरूरत होगी और न ही पानी की. पानी भी हवा से ही लिया जाएगा. कंपनी का दावा है कि इससे खेती की जो लिमिटेशंस हैं, वो खत्म हो जाएंगी. खाना पैदा करने की ये नई तकनीक हैरान करने वाली है. आमतौर पर खेती से खाने लायक चीजें मिलती हैं. लेकिन उसके लिए खेती लायक जमीन, पानी और खेती के अनुकूल मौसम की जरूरत पड़ती है. सोलर फूड में इनमें से किसी की आवश्यकता नहीं होगी.

सोलीन नासा का ओरिजनल आइडिया
कहा जा रहा है कि सोलीन नासा का ओरिजनल आइडिया है. लेकिन इस पर अब फिनलैंड की कंपनी काम कर रही है. इसके लिए कंपनी यूरोपियन स्पेस एजेंसी के साथ मिलकर काम कर रही है. ये अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बड़े काम की साबित हो सकती है. इससे उस क्षेत्र में खाना मिलना आसान हो जाएगा, जहां पर खेती की संभावना नामुमकिन है.

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प्रोटीन पाउडर से कई तरह के फूड बनाए जा सकते हैं


बढ़ती आबादी और बदलते मौसम ने हमारी सामने कई तरह की चुनौतियां पेश कर दी हैं. इन्हीं में से एक है पूरी आबादी के लिए जरूरत भर खाना. इस नए प्रयोग से इस दिशा में सामने आई चुनौती से निपटा जा सकता है. बिना खेती किए फूड प्रोडक्ट पैदा किए जा सकते हैं. लोगों के खाने की जरूरतभर का फूड सिर्फ हवा के जरिए बनाया जा सकता है.

प्रोटीन मार्केट में कंपनी की बड़ी योजना
फिनलैंड की कंपनी इस दिशा में जोर-शोर से लगी है. कंपनी सोलीन को 2021 में दुनियाभर के मार्केट में उतार सकती है. उसकी 2 मिलियन मील्स सालाना बनाने की योजना है. इससे कंपनी को साल में करीब 800 मिलियन डॉलर का मुनाफा हो सकता है. साल 2023 तक ये बढ़कर 1.2 बिलियन डॉलर हो जाएगा. कंपनी की योजना है कि वो 2050 तक करीब 9 बिलियन लोगों को सोलर फूड उपलब्ध करवा सके. इससे कंपनी को करीब 500 बिलियन डॉलर सालाना की आमदनी होगी. प्रोटीन मार्केट पर पूरी तरह से इस कंपनी का कब्जा होगा.

सोलीन बनाने पर 2018 से ही काम चल रहा है. इस साल कंपनी तीन चीजों पर फोकस कर रही है. वो पहले सोलीन लॉन्च करेगी. इसके बाद इसे सर्टिफाई करवाया जाएगा. फूड सेफ्टी के पैमानों पर ये कितना खरा उतरता है इसकी जांच होगी. इसके बाद 1000 मिट्रिक टन सालाना सोलीन उत्पादन करने की फैक्ट्री लगाई जाएगी. इससे 500 मिलिय़न मील्स सालाना का उत्पादन हो पाएगा.

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First published: July 30, 2019, 9:32 AM IST
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