मैटर से तो ऊर्जा बनती है, लेकिन क्या ऊर्जा से बन सकता है मैटर? शोध ने कहा- हां

मैटर से तो ऊर्जा बनती है, लेकिन क्या ऊर्जा से बन सकता है मैटर? शोध ने कहा- हां
वैज्ञानिकों ने पाया है कि शक्तिशाली लेजर और गामा विकिरण से पदार्थ के कण पैदा किए जा सकते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया है कि प्रकाश (Light) यानि ऊर्जा (Energy) से पदार्थ (Matter) पैदा किया जा सकता है.

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नई दिल्ली:  हम सभी जानते हैं कि पदार्थ यानि कि मैटर (Matter) से ऊर्जा (Energy) बन जाती है. लेकिन अभी तक ऊर्जा से पदार्थ नहीं बनाई जा सकी है. आज से सौ साल से भी पहले महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी पदार्थ को ऊर्जा में बदलने वाली अपना समीकरण (Equation) दिया था, E=mc2. इसके बाद से हम पदार्थ से ऊर्जा बनाकर बिजली भी बनाने में सफल हो गए, लेकिन अभी तक ऊर्जा या प्रकाश से पदार्थ बनाने का तरीका नहीं मिल सका था. ताजा शोध ने इस मामले में उम्मीद जगाई है.

एक सिम्यूलेशन ने जगाई आशा
वैज्ञानिकों के इस शोध में दो प्रकाश ऊर्जाओं के टकराने से पदार्थ के कणों को बनाने की संभावना मिली है. अमेरिका के सैन डिएगो के एलेक्से एरेफीव की एक टीम ने ऐसे सिम्यूलेशन बनाए हैं जो ऐसी संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं जिससे प्रकाश से पदार्थ बनाया जा सकता है.

कैसे बनेगा पदार्थ



इस सिम्यूलेश के मुताबिक एक शक्तिशाली लेसर से न्यूट्रॉन तारे जितना शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड पैदा किया जाता है. इससे गामा किरणें उत्सर्जित होने लगती हैं जो लेसर से टकराती है. इस पूरी प्रक्रिया मे बहुत ही कम समय के लिए मैटर और एंटी मैटर कणों के जोड़े पैदा हो जाते हैं.



यूरोप में हो सकता है इसका प्रयोग
यह शोध फिजिकल रीव्यू एप्लाइड में प्रकाशित हुआ था. शोधकर्ता ऐरेफीव का मानना है कि इस अध्ययन से पूर्वी यूरोप में स्थित Extreme Light Infrastructure (ELI)की सुविधाओं का उपयोग कर प्रयोग किया जा सकता है. और एक दो सालों में वास्तविक नतीजे हासिल किए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि उनके नतीजे वैज्ञानिकों को पहली बार इस तरह का प्रयोग करने की स्थिति में ला रहे हैं.

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कम्प्यूटर सिम्यूलेशन तकनीक ने इस प्रयोग की संभावना दिखाई है. (प्रतीकात्मक फोटो)


इस अध्ययन में यह लक्ष्य था शोधकर्ताओं का
ऐरेफीव और उनके साथी शोधकर्ता कई सालों ने ऊर्जा और विकिरण की सघन निर्देशित बीम पैदा करने के तरीकों को बनाने में लगे हैं.  उन्होंने पाया कि इसका एक तरीका यह होगा कि अतिशक्तिशाली लेजर को किसी निशाने पर लगाया जाए जिसे बहुत शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड बन जाए को अतितीव्र ऊर्जा उत्सर्जित करने लगे.

बन सकते हैं करोड़ों मैटर और एंटीमैटर कण
इस प्रयोग से एक दिलचस्प नतीजा सामने आएगा वह होगा इलेक्ट्रॉन और पोजीट्रॉन के जोड़ों का उत्पादन जो कि मैटर और एंटीमैटर कणों की जोड़ी होते हैं. ये कण दो गामा किरणों की बीम के टकराने से भी पैदा हो सकते  हैं, ऐसा ही नजीता एक गामा किरण बीम के ब्लैक बॉडी (वह वस्तु जो अपने ऊपर पड़ने वाले विकरण को पूरी तरह उत्सर्जित कर देती है) के उत्सर्जन के साथ टकराने से भी मिल सकता है. एक टकराव से लाखों करोड़ों जोड़े बन सकते हैं.

ब्रह्माण्ड के पैदा होने के समय के सवालों के भी मिल सकेंगे जवाब
इस प्रयोग के शोधकर्ताओ को ब्रह्माण्ड के शुरूआती समय के हालात के बारे में भी अध्ययन करने का मौका मिलेगा. शोधकर्ता इससे एंटीमैटर का भी अध्ययन कर सकेंगे जो आज भी ब्रह्माण्ड के रहस्यों में से एक हैं. वैज्ञानिक विशेष तौर पर यह जानना चाहते हैं कि हमारे ब्रह्माण्ड में एंटीमैटर के मुकाबले मैटर ज्यादा क्यों है? जबकि दोनों को समान मात्रा में होना चाहिए.

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इस प्रयोग से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति से संबंधित कुछ सवालों के जवाब मिल सकेंगे. (प्रतीकात्मक फोटो)


इस अध्ययन के शोधकर्ताओं को ऐसे सिम्यूलेशन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया क्योंकि इस तरह के प्रयोग किए जाने अब संभव है. इस तरह का प्रयोग करने की सुविधा अमेरिका में नहीं हैं. लेकिन ELI में यह प्रयोग हो सकता है. ELI के शोधकर्ताओं के लिए भी इस स्तर की लेजर पैदा करना एक बड़ी चुनौती ही है. लेकिन यह नामुमिकन नहीं है. इस अध्ययन के शोधकर्ता भी इस प्रयोग का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं.

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