होम /न्यूज /नॉलेज /क्यों लगातार भारत का विरोध कर रहा है मलेशिया, बढ़ा रहा है पाकिस्तान से दोस्ती

क्यों लगातार भारत का विरोध कर रहा है मलेशिया, बढ़ा रहा है पाकिस्तान से दोस्ती

मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद का रुख पिछले कुछ महीनों से भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक का रहा है

मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद का रुख पिछले कुछ महीनों से भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक का रहा है

कुछ सालों पहले तक भारत और मलेशिया के बीच बेहतर रिश्ते हुआ करते थे. पिछले कुछ महीनों से मलेशिया के रुख में बदलाव आया है. ...अधिक पढ़ें

पिछले कुछ समय से एशियाई मुल्क मलेशिया (Malaysia) कश्मीर (Kashmir) और सीएए-एनआरसी (CAA & NRC) जैसे मुद्दों को लेकर सिर्फ भारत का विरोध ही नहीं कर रहा बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पर ये मुद्दे उठाने से बाज नहीं आ रहा है. वहीं अब पाकिस्तान (Pakistan) से उसकी नजदीकियां बढ़ती हुई लग रही हैं. साथ ही उसने भारत में मोस्ट वांटेड जाकिर नाइक को ना केवल पनाह दी हुई है बल्कि उसके प्रत्यर्पण से लगातार मना भी करता रहा है. कुछ साल पहले तक मलेशिया और भारत के रिश्ते (India–Malaysia relations) खासे बेहतर थे लेकिन अब तल्ख होते लग रहे हैं.

मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ( Malaysia Prime Minister Mahathir Mohammad) पिछले कुछ महीनों से भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मोर्चा खोले हुए हैं. भारत की नाराजगी और कड़े कदम उठाने के संकेत देने के बाद भी उनका कहना है कि भारत के खिलाफ स्टैंड से वो पीछे नहीं हटने वाले. एक समय था जब महातिर भारत को अच्छा दोस्त बताते थे. उनके पूर्ववर्ती शासनकाल में भारत और मलेशिया के बीच तमाम समझौते और निवेश के बेहतर कदम उठाए गए थे.

मलेशिया ने करीब तीन साल से ढ़ाका रेस्टोरेंट धमाके के आतंकवादियों को उकसाने के आरोपी मुस्लिम प्रचारक जाकिर नाइक (Zakir Naik) को शरण दे रही है. भारत के बार-बार कहने के बाद भी वो उसे प्रत्यर्पित नहीं कर रहा. नाइक क्वलालंपुर में एक पॉश अपार्टमेंट सुरक्षा के बीच आराम से रह रहा है. यही नहीं उसे मलेशिया के तमाम धार्मिक कार्यक्रमों में बतौर अतिथि आमंत्रित किया जाता है.

नाइक के प्रत्यर्पण से इनकार 
जब भी भारत ने मलेशिया सरकार से नाइक के प्रत्यर्पण के लिए कहा, तब प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने इससे इनकार कर दिया. वो भी तब जबकि भारत और मलेशिया के बीच प्रत्यर्पण संधि है. कहा जाता है कि जाकिर नाइक के महातिर से प्रगाढ़ रिश्ते हैं, उसे कई बार मलेशिया के प्रधानमंत्री आवास में भी देखा गया है.
" isDesktop="true" id="2773723" >

भारत के खिलाफ कई बयान
हालिया महीनों में मलेशिया ने भारत के खिलाफ कई बयान दिए हैं, जो आर्टिकल 370 में बदलाव, CAA और NRC  को लेकर है. मलेशिया ने इन मुद्दों पर मुस्लिम देशों को साथ आने की अपील भी की. उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीर में मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है.

जब अक्टूबर में संयुक्त राष्ट्र संघ में कश्मीर पर मीटिंग हुई तो जिन देशों ने आर्टिकल 370 में बदलाव को लेकर कश्मीर पर भारत के कदम का विरोध किया, उसमें मलेशिया भी था. इसके बाद भारत और मलेशिया के रिश्ते बिगड़ने लगे.

भारत ने पाम ऑयल के आयात पर कड़ाई की
बिगड़ते रिश्तों का असर मलेशिया से बड़े पैमाने पर आयात होने पाम ऑयल पर पड़ा. भारत पाम ऑयल के सबसे बड़े आयातकों में है. मलेशिया से दो-तिहाई तेल भारत आता था. तब भारत में इस तेल के आयात पर सरकार की ओर से कोई पाबंदी नहीं थी. फिर सरकार ने उसे "रिस्ट्रिक्टेड" श्रेणी में डाल दिया, यानि अब अगर किसी व्यावसायी को मलेशिया से पाम ऑयल आयात करना है तो उसे सरकार से लाइसेंस लेना होगा.

पिछले साल सितंबर के बाद मलेशिया से पाम ऑयल के आयात में अभूतपूर्व कमी आई है. माना जाता है कि सरकार ने व्यावसायियों से कहा है कि वो मलेशिया से आयात को घटाकर दूसरे देशों से इसकी आपूर्ति करें.

भारत सरकार ने पिछले दिनों कड़ाई दिखाते हुए मलेशिया से होने वाले पाम तेल के आयात का काफी कम कर दिया है


भारत के कदम से मलेशिया को झटका 
भारत का ये कदम निश्चित तौर पर मलेशिया के लिए बड़ा झटका है. क्योंकि वर्ष 2019 में भारत ने मलेशिया से 40 लाख टन पाम ऑयल का आयात किया था. अब ये 0.9 लाख टन भी नहीं रह गया है. भारत के इस कदम से बौखलाए महातिर ने गलती सुधारने की जगह सिटिजनशिप एमेंडमेंट एक्ट यानि CAA पर भी विरोध का सुर अलापा. उन्होंने CAA और NRC को भारत सरकार का गलत और भेदभाव वाला कदम बताया.

मलेशिया में दूसरे धर्म के लोगों से दोयम दर्जे का व्यवहार 
वैसे असलियत ये है कि मलेशिया का कानून और प्रशासन ऐसा है कि वहां रहने वाले गैर मुस्लिमों से दोयम दर्जे व्यवहार होता है. नौकरियों से लेकर व्यवसाय और अन्य कामों में पग-पग पर अन्य धर्म के लोगों के साथ भेदभाव भरी नीतियां नजर आती हैं.

आखिर महातिर क्यों कर रहे हैं ऐसा 
अगर महातिर लगातार भारत के खिलाफ विद्वेष भरी बातें कह रहे हैं तो क्या कोई इसकी खास वजह है, आखिर क्यों इस कार्यकाल में उनका रुख बदला-बदला है. महातिर पहली बार 1981 से लेकर 2003 तक जब मलेशिया के प्रधानमंत्री थे, तब भारत में मलेशिया ने बड़े पैमाने पर निवेश किया था. बदले में भारतीय कंपनियों ने भी मलेशिया में आईटी से लेकर हेल्थकेयर और बैंकिंग में निवेश के साथ वहां नए वेंचर खोले. तो अब महातिर क्यों ऐसा कर रहे हैं.

अगर मलेशिया ने भारत में बड़े पैमाने पर वित्तीय निवेश कर रखा है तो भारतीय कंपनियों ने भी मलेशिया में आईटी और हेल्थकेयर कंपनियों ने वेंचर खोले हैं


ये कवायद है मुस्लिम देशों का अगुवा बनने की 
जानकार मानते हैं कि इसके पीछे महातिर की सियासी चाल मुस्लिम वर्ल्ड में मलेशिया को अगुवा देश के तौर पर स्थापित करने की है. इस बार सत्ता में आने के बाद से वो लगातार इस प्रयास में लगे हैं. हालांकि ये इतना आसान भी नहीं क्योंकि सऊदी अरब लगातार इसकी काट में लगा है.

मलेशिया में हाल में हुई मुस्लिम देशों का गठबंधन बनाने की कोशिश
कोई एक महीना पहले मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर में वर्ल्ड मुस्लिम समिट का आयोजन हुआ. जिसमें दुनिया के सभी मुस्लिम मुल्कों ने हिस्सेदारी की. हालांकि सऊदी अरब के दबाव में पाकिस्तान ने खुद को इससे अलग कर लिया था लेकिन उसने मलेशिया के इस आयोजन के प्रति समर्थन जरूर जाहिर किया. इस मुस्लिम समिट से नजर आया कि मलेशिया, तुर्की और कतर के साथ मिलकर मुस्लिम मुल्कों का एक मजबूत गठबंधन बनाने में लगा है. कश्मीर को लेकर बयानबाजी और पाकिस्तान के साथ गलबहियों को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है.

क्या इसलिए धर्म का पत्ता खेल रहे हैं महातिर 
अगर मलेशिया की अंदरूनी सियासत की बात करें तो वहां मीडिया में आ रही खबरें बताती हैं कि महातिर को विपक्षी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में वो धर्म का पत्ता खेलने में लग गए हैं. जाकिर नाइक को मलेशिया में सुरक्षित रखने के साथ अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर कश्मीर और सीएए को लेकर भारत विरोध इसी का नतीजा है.

मलेशिया पिछले कुछ समय से मुस्लिम वर्ल्ड का अगुवा देश बनने की कोशिश करता रहा है


वैसे ये भी कहा जा रहा है कि पाम ऑयल मलेशिया की बड़ी इंडस्ट्री है. जिससे मलेशिया को बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा अर्जित होती है. अगर भारत से मिले झटके को मलेशिया नहीं संभाल पाया तो महातिर के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

भारत से मलेशिया को क्या होता है निर्यात
हालांकि महातिर की शह पर मलेशिया में ये मांग भी शुरू हुई है कि अगर भारत ने पाम ऑयल का आयात रोका है तो हमें भी भारत से बड़े पैमाने पर आने वाले चाय, काफी, कॉटन, मशीनरी, आयरन और बिजली के सामान पर रोक लगा देनी चाहिए.

गौरतलब है कि मलेशिया में करीब डेढ़ लाख भारतीय एक्सपर्ट, कुशल और अकुशल कर्मी के तौर पर वहां काम कर रहे हैं. कुछ वहां जाकर बस चुके हैं. अगर मलेशिया का रुख यही रहा और भारत के साथ उसके संबंध बिगड़े तो इसका दोनों देशों के संबंधों और निवेश पर पड़ेगा. फिलहाल मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर का यही कहना है कि भारत के खिलाफ उनका जो रुख है, वो उस पर कायम हैं, किसी भी हाल में नहीं झुकेंगे.

ये भी पढ़ें
दुनिया का कोई भी शिया बन सकता है अयातुल्ला, ये शर्तें करनी होंगी पूरी
हज के बाद बांग्लादेश में लगता है दुनिया का दूसरा बड़ा मुस्लिम जमावड़ा
धरना-प्रदर्शन पर क्या कहता है संविधान, क्या इस पर लगाई जा सकती है पाबंदी
इंटरनेट और सोशल मीडिया ने दुनिया में कैसे बढ़ाई हिंसा और अराजकता
CAA पर केरल ने किस आधार पर दी है सुप्रीम कोर्ट में केंद्र को चुनौती

Tags: Article 370, Kashmir, Kashmir tension, Malaysia, Zakir Naik

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें