लॉकाडाउन का असर- जानिए क्यों अमेरिका में नर गौरैया ने बदला अपने गाने का अंदाज

सैन फ्रांसिस्को में लॉकडाउन (lockdown) के कारण कम हुए ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) का असर गौरैया (Sparrows) की आवाज पर पड़ा है. (तस्वीर: Pixabay)
सैन फ्रांसिस्को में लॉकडाउन (lockdown) के कारण कम हुए ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) का असर गौरैया (Sparrows) की आवाज पर पड़ा है. (तस्वीर: Pixabay)

लॉकडाउन (Lockdown) के कारण कम हुए ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) को देखते हुए अमेरिका में गौरैयाओं (Sparrows) ने अपने गाने धीमी आवाज (Lower Volume) में गाने शुरू कर दिए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 27, 2020, 4:04 PM IST
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कोविड-19 (Covid-19) महामारी ने इंसानों (humans) को घर में समेट कर रख दिया है. इसका दुनिया के कई शहरों (cities) में  रहने वाले जीवों पर भी असर हुआ है. लॉकडाउन (Lockdown) में इंसानी गतिविधियां कम होने का कुछ जीवों (creatuers) का फायदा भी मिला है. लॉकडाउन के कारण सबसे अधिक असर ध्वनि प्रदूषण (Noise pollutions) पर हुआ है जो उल्लेखनीय रूप से कम हो गया है. एक अध्ययन ने इस बात का खुलासा किया है कि इसी बदलाव के कारण कुछ नर गौरैया (Male sparrows) अपनी मादा (Females) को आकर्षित करने के लिए जो ‘गाना’ (Song) गाते थे उसमें उन्होंने बदलाव किए हैं.

कहां हुआ यह अध्ययन
अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर की गलियां महामारी के चलते लगे लॉकडाउन के कराण शुरुआती महीनों में खाली हो गई थीं. इस वजह से शोर बहुत कम होने से वहां के नर गौरैया ने भी बदलते हालात के अनुसार अपने गाना की आवाज धीमी कर दिया और वे और ज्यादा नजाकत और बेहतर अंदाज में मादा गौरैया को आकर्षित करने के लिए गाने लगे हैं.

गौरैया सहित अनेक जानवरों में बदलाव
इस शोध में बताया गया है कि कैसे  व्हेल से लकर काइयोट जैसे छोटे भेड़िए भी कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन की वजह हुए बदलावों के लिए खुद को ढाल रहे हैं. इसमें सफेद सिर वाली गौरैया (white-crowned sparrow) भी शामिल है. इन जानवरों ने इंसान के घर में घुसने का कारण हुए एंथ्रोपॉज नाम के बदलाव के कारण बदलते हालातों के मुताबिक अपने बर्ताव में भी बदलाव कर दिया है.



ध्वनि प्रदूषण कम होने का असर
टेनेसी यूनिवर्सीट की बिहेवियरल इकोलॉजिस्ट और इस अध्ययन की अगुआई करनेवाली  एलिजाबेध डेरीबेरी बताया, “जब शहर में शोर ज्यादा था तो उन्हें तेज आवाज में गाना पड़ता था. लेकिन जब ट्रैफिक रुकने से ध्वनि प्रदूषण कम हुआ और ध्वनि स्तर 50 प्रतिशत तक कम हो गए.” यह अध्ययन साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

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नर गौरैया (Male Sparrows) की आवाज की मात्रा (volume) करीब एक तिहाई तक कम हो गई है जिससे शोधकर्ता हैरान हैं. (तस्वीर: Pixabay)


अब धीमी आवाज में गाने लगे हैं नर गौरैया
शोधकर्ताओं का कहना है कि सैन फ्रांसिस्को शह के गोल्डन गेट ब्रिज पर गाड़ियों की संख्या का स्तर 1954 के स्तर तक पहुंच गया है. शोधकर्ताओं ने पक्षियों के गाने के आंकड़ों को अपने अध्ययन में शामिल किया जो उन्होंने पिछले कुछ सालों से जमा किए थे और कुछ साइड्स ने अप्रैल और मई 2020  को दौरान रिकॉर्ड किए गए थे. गौरैया अब धीमी आवाज में गाने लगे हैं और निचले सुर लगा पा रहे हैं. जिससे उनकी रेंज बढ़ गई है और उनकी परफॉर्मेंस भी बेहतर हो गई है.

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शोर का असर
आवाज में शोर के कारण बदलाव काफी कुछ बदल सकता है. अगर आप किसी पार्टी में जाते हैं. उससे पहले तो आप सामान्य मात्रा में अपनी आवाज रखते हैं, लेकिन पार्टी के शोर के बीच आपको अपनी आवाज की मात्रा बढ़ानी पड़ती है. डेरीबेरी का कहना है कि जब आप किसी कॉकटेल पार्टी में चिल्लाकर बात करते हैं तो आपकी आवाज सर्वश्रेष्ठ नहीं होती.

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लॉकडाउन (lockdown) का असर अमेरिका (US) ही नहीं पूरी दुनिया के देशों में हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


आवाज हुए बेहतर
डेरीबेरी ने बताया कि जब ध्वनि प्रदूषण कम हुआ तो उनका गाने की आवाज बेहतर हो गई और उनकी ज्यादा मादक सुनाई देने लगे. वे बेहतर प्रतिद्वंदी है और वे अपनी मादाओं के लिए बेहतर साथी नजर लगे.“ वैज्ञानिकों इस बात से हैरान थे कि इन गौरैयाओं का आवाज का मात्रा कितनी ज्यादा गिर गई थी. उन्होंने पाया की यह करीब एक तिहाई तक हो गई है.

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आवाज की मात्रा में इतनी गिरावट के बाद भी गौरैयाओं को लॉकडाउन से पहले सुनी जा सकने वाली दूरी के मुकाबले आज केवल दोगुनी दूरी से सुना जा सकता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि उनका अध्ययन दर्शाता है कि पक्षी बदलते वातारवण में खुद को कितनी तेजी से ढाल सकते हैं. उन्होंने सुझाया कि ध्वनि प्रदूषण को रोकने का लंबा समाधान उच्च प्रजातियों के विविधता के लिए बहुत ही उपयोगी साबित हो सकता है.
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