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क्या गांधी परिवार से सिख दंगों का दाग हटाना चाहते हैं मनमोहन सिंह

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Updated: December 5, 2019, 8:58 PM IST
क्या गांधी परिवार से सिख दंगों का दाग हटाना चाहते हैं मनमोहन सिंह
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पी.वी. नरसिम्हा राव के रोल पर तो सवाल खड़े किए लेकिन राजीव गांधी के बारे में कुछ नहीं कहा.)

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) ने पी.वी. नरसिम्हा राव (P. V. Narasimha Rao) को जिम्मेदार तो ठहरा दिया लेकिन दंगे का कारण नहीं बताया था.

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  • Last Updated: December 5, 2019, 8:58 PM IST
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देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1984 के सिख दंगों के बारे में बयान देकर करीब 35 साल पूर्व हुए नरसंहार के बारे में लोगों की यादें ताजा कर दी हैं. मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर तत्कालीन गृह मंत्री पीवी नरसिम्हा राव (Narsimha Rao) ने इंद्र कुमार गुजराल (IK Gujaral) की सलाह मानी होती, तो दिल्ली में सिख नरसंहार को टाला जा सकता था. पूर्व प्रधानमंत्री ने ये बातें गुजराल की 100वीं जयंती पर आयोजित एक समारोह में कहीं.

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा, 'दिल्‍ली में जब 84 के सिख दंगे हो रहे थे, गुजराल जी उस समय के गृह मंत्री नरसिम्हा राव के पास गए. उन्‍होंने राव से कहा कि हालात बेहद गंभीर है और सरकार को जल्द से जल्द सेना को बुलाने की जरूरत है, लेकिन तत्कालीन सरकार ने गुजराल की सलाह पर गौर नहीं किया.' मनमोहन सिंह के 1984 के सिख दंगे पर दिए बयान को लेकर नरसिम्हा राव का परिवार बेहद नाराज़ है. राव के पोते एनवी सुभाष ने कहा है कि मनमोहन सिंह को तुरंत बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए.

मनमोहन सिंह सिख दंगों को लेकर संसद में भी माफी मांग चुके हैं. अब उन्होंने इसे लेकर फिर एक बयान दिया है जिसमें पीवी नरसिम्हा राव को जिम्मेदार ठहराया है. लेकिन उन्होंने उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम का जिक्र नहीं किया. मनमोहन सिंह के इस बयान का यह भी मतलब निकाला जा रहा है कि वो सिख दंगों का कलंक गांधी परिवार पर से धोना चाहते हैं. हालांकि यह बात सच है कि दंगों के समय देश के गृह मंत्री पीवी नरसिम्हा राव थे. उन पर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी थी विशेषतौर पर दिल्ली की. क्या उन पर कोई दबाव काम कर रहा था?

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पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल


राव को किया गया था इशारा
विनय सीतापति द्वारा लिखी गई पीवी नरसिम्हा राव की बायोग्राफी द हाफ लायन के मुताबिक राव को उस शाम एक कांग्रेसी नेता का फोन आया था जो राजीव गांधी के साथ अपनी नजदीकियों के लिए विख्यात था. उसने राव को फोन पर ही इशारा किया था कि दंगे और हिंसा से जुड़े सभी मामलों की रिपोर्ट सीधा प्रधानमंत्री कार्यालय को होगी. यानी पीवी नरसिम्हा राव के लिए संदेश बिल्कुल स्पष्ट था.

हालांकि लेखक विनय सीतापति ने इस समय के लिए नरसिम्हा राव की आलोचना भी की है. उन्होंने लिखा है कि उस वक्त राव आदेश नहीं मानकर सिखों को बचा सकते थे. संभव है कि इसकी वजह से उनका पद चला जाता लेकिन ये फिर भी सम्मानजनक होता. उन्होंने सिखों के नरसंहार और 'कांग्रेस आलाकमान की सुनने' के बीच दूसरा वाला विकल्प चुना. नैतिक तौर पर ये उनके जीवन का सबसे कमजोर समय था.दंगों की स्थिति पर कार्रवाई
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 31 अक्टूबर 1984 की शाम को दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर (साउथ) चंद्र प्रकाश ने महसूस किया कि दंगों की स्थिति काबू से बाहर निकल गई है. उन्होंने नई दिल्ली रेंज के अतिरिक्त कमिश्नर गौतम कौल को सलाह दी कि कर्फ्यू लगाकर सेना बुला लेनी चाहिए. गृह मंत्रालय को लिखे एक नोट में उन्होने लिखा कि कौल ने मेरी सलाह यह कहते हुए नहीं मानी कि इसे लेकर पीएम के घर पर पहले ही मीटिंग हो चुकी है. कौल का कहना था कि उस मीटिंग में गृहमंत्री (यानी नरसिम्हा राव) भी मौजूद थे. कौल ने सीधे तौर चंद्र प्रकाश को संदेश दे दिया था कि पीएम की मीटिंग में जो फैसला हुआ उसमें गृह मंत्री की भी मर्जी शामिल है. प्रकाश चंद्र इसे लेकर उलझन में थे क्योंकि दिल्ली पुलिस के कमिश्नर की रिपोर्टिंग गृह मंत्री को होती है.

क्या नरसिम्हाराव पर कोई दबाव था
इसके बाद एक नवंबर को दिल्ली में सिखों की कई जगह हत्याएं हुईं. पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल ने इस दिन के बारे में अपनी डायरी में लिखा है- 'मैंने सलाह दी थी कि सेना बुला लेनी चाहिए लेकिन तब के दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर पीसी गवई ने कहा कि इससे खलबली मच जाएगी और लोगों में भय फैलेगा. तो मैंने कहा कि आप खलबली की बात कर रहे हैं, शहर तो पहले से ही जल रहा है. क्या गवई ने ये निर्णय अकेले लिया होगा? कहा जाता है कि ये निर्णय पीवी. नरसिम्हा राव ने उन्हें मना किया था. लेकिन क्या पीवी. नरसिम्हा राव पर पीएमओ से कोई दबाव नहीं काम कर रहा था?'

सिख दंगों पर राजीव गांधी की प्रतिक्रिया
सिख दंगों पर देश के तत्कालीन राजीव गांधी ने विवादास्पद बयान दिया था. उन्होंने कहा था-गुस्से में उठाया गया कोई भी कदम देश के लिए घातक होता है. कई बार गुस्से में हम जाने-अनजाने ऐसे ही लोगों की मदद करते हैं जो देश को बांटना चाहते हैं'. लेकिन इसके बाद उन्होंने जो कहा वो चौंकाने वाला था. उन्होंने आगे कहा, 'हमें मालूम है कि लोगों के अंदर कितना क्रोध है, लेकिन जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो आसपास की धरती हिलती है.'

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First published: December 5, 2019, 6:53 PM IST
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