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आखिर किस बीमारी से जूझ रहे हैं मनोहर पर्रिकर, जानें पूरी डीटेल

आखिर किस बीमारी से जूझ रहे हैं मनोहर पर्रिकर, जानें पूरी डीटेल

मनोहर पर्रिक

मनोहर पर्रिक

मनोहर पर्रिकर अपनी इस बीमारी का इलाज कराने पहले विदेश गए. फिर दिल्ली के एम्स में आईसीयू में शिफ्ट किए गए. अब वापस एयर एंबुलेंस के जरिए उन्हें गोवा ले जाया जा चुका है. अब भी उनकी हालत नाजुक है.

    गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर काफी लंबे समय से एक ऐसी बीमारी से जूझ रहे हैं, जिससे उनकी हालत दिनों दिन बिगड़ती ही जा रही है. वो इसका इलाज कराने पहले विदेश गए. फिर दिल्ली के एम्स में आईसीयू में शिफ्ट किए गए. अब वापस एयर एंबुलेंस के जरिए उन्हें गोवा ले जाया जा चुका है. अब भी उनकी हालत नाजुक है. दरअसल पर्रिकर पेनक्रियाज़ (अग्नाश्य) संबंधी बीमारी से जूझ रहे हैं. केंद्रीय मंत्री श्रीपद नाइक कह चुके हैं कि पर्रिकर दशहरे के बाद अपने 'बहुत से' विभागों की जिम्मेदारी से मुक्त हो सकते हैं. जानिए क्या है पेक्रियाज़ की बीमारी, ये कितनी गंभीर होती है. पर्रिकर इस बीमारी में जिस स्टेज पर हैं, उसमें क्या होता है.

    पेनक्रियाज़ को हिंदी में अग्नाश्य कहते हैं, ये पाचन तंत्र का मुख्य अंग और छोटी आंत का पहला भाग होता है. अग्‍नाशय 6-10 इंच लंबी ग्रंथि होती है जो आमाशय के पीछे पेट में पायी जाती है. अग्‍नाशय खाना पचाने में मदद करने वाले हार्मोन और एंजाइम को छोड़ता है. अग्‍नाशय इंसुलिन, ग्लुकागोन, व सोमाटोस्टाटिन हार्मोन बनाने वाला शरीर का सबसे अहम हिस्सा है, जो शरीर के सारे सिस्टम को बेहतर रखने का काम करता है. अग्नाश्य बहुत से पाचक एंजाइम्स का भंडार भी है. इसमें पाचक किण्वक होते हैं जो कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन व वसा को तोड़ते हैं. अग्नाश्य ठीक से काम न करे तो कई बीमारियां हो सकती हैं. जिसमें अग्नाश्य कैंसर, गैस, मधुमेह, अग्नाशयशोथ भी शामिल हैं. कैंसर होना पेनक्रियाज़ के लिए सबसे खतरनाक स्थिति मानी जाती है.

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    पेनक्रियाज़ मुख्य रूप से दो काम करता है. खाने को ऊर्जा के रूप में बदलता है ताकि कोशिकाएं उसका इस्तेमाल कर सकें. यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए इन्सुलिन का निर्माण करता है.



    मीडिया रिपोर्ट्स में मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल और गोवा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के हवाले से बताया गया है कि मनोहर पर्रिकर अग्नाशय कैंसर की एडवांस स्टेज से जूझ रहे हैं.

    जानिए अग्नाशय कैंसर के बारे में-
    पेनक्रियाज़ कैंसर होने के सटीक कारण अब तक साफ नहीं है. माना जाता है कि धूम्रपान और ज्यादा मात्रा में शराब लेने से इसका खतरा बढ़ता है.

    पेनक्रियाज़ कैंसर की कितनी स्टेज
    स्टेज 0:
    इस स्टेज पर कैंसर पेनक्रियाज़ कोशिकाओं की ऊपरी परतों तक होता है. ये इमेज टेस्ट में दिखाई नहीं देता.
    स्टेज I: इस स्टेज तक कैंसर, पेनक्रियाज़ कोशिकाओं से 2 सेंटीमीटर आगे बढ़ता है. जिसे स्टेज IA कहा जाता है. जब यह 4 सेंटीमीटर फैलता है तो इसे स्टेज IB कहा जाता है.
    स्टेज II: यहां आने तक कैंसर, पेनक्रियाज़ से बाहर की ओर फैलने लगता है.
    स्टेज III: इस स्टेज तक पहुंचने के बाद कैंसर तेजी से फैलता है. ट्यूमर ब्लड वेसल्स और नर्व्स तक फैल चुका होता है.
    स्टेज IV: इस स्टेज पर कैंसर अग्नाशयी अंगों में अंदर तक भी फैल चुका होता है.

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    शरीर के बाकी अंगों को प्रभावित करता है पेनक्रियाज़ कैंसर?
    पेनक्रियाज़ कैंसर में, पेनक्रियाज़ के अंदर कैंसर सेल्स तेजी से बनने और फैलने लगती हैं. जो ट्यूमर के बढ़ने की वजह है. स्टेज 4 को एडवांस स्टेज भी कहते हैं, यहां तक पहुंचने के बाद कैंसर पेनक्रियाज़ के आस-पास के अंगो तक फैल जाता है. जिसमें ये लिम्प नोड्स और पेनक्रियाज़ टिश्यू को चपेट में लेता है.

    शरीर के बाकी अंगों पर प्रभाव की बात करें तो वो इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर कहां है और कैसे फैला है. ये भी मायने रखता है कि ट्यूमर कितना बढ़ चुका है. अगर ट्यूमर लिवर में बनने वाले बाइल के फ्लो को ब्लॉक करता है तो पीलिया भी हो सकता है. अगर ट्यूमर पाचन तंत्र के अंगों को ब्लॉक करता है तो उससे उल्टी आना, जी मिचलाना और पाचन से जुड़ी दिक्कतें पेश आने लगती हैं.

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    पेनक्रियाज़ कैंसर के लक्षण-
    - त्वचा और आंखों में पीलापन
    - मूत्र में गाढ़ापन
    - इस वजह से पीलिया (jaundice) भी हो जाता है
    - कमजोरी महसूस करना
    - पेट में तेज दर्द होना
    - पेट पर सूजन आना
    - जी मिचलाना
    - पीला या भूरा मल आना
    - मल में अतिरिक्त वसा होना

    जांच और इलाज कैसे
    इसके लक्षण अत्यधिक बढ़ जाने पर दिखते हैं. इसका इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी, विकिरण के आधार पर होता है. पेनक्रियाज़ टेस्ट में पेनक्रियाज़ के अंदर मौजूद द्रव की जांच की जाती है, जिसमें पेनक्रियाज़ स्थितियों व लक्षणों को देखा जाता है. पेनक्रियाज़ कैंसर का इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी, विकिरण के आधार पर होता है. पेनक्रियाज़ टेस्ट बायोप्सी के जरिए भी किया जाता है. जिसमें पेनक्रियाज़ टिश्यू का एक छोटा टुकड़ा परीक्षण के लिए भेजा जाता है.

    पेनक्रियाज़ के इलाज में इसका ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) भी शामिल है. ट्रांसप्लांट एक तरह की सर्जरी है. जिसमें जिसमें मृत व्यक्ति के स्वस्थ पेनक्रियाज़ को दूसरे व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया जाता है.

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    पेनक्रियाज़ को हेल्दी रखने के लिए सावधानियां-

    स्वस्थ पेनक्रियाज़ बनाये रखने के लिए हाइड्रेटेड रहना ज़रूरी है.
    हाइड्रेटेड रहने के लिए हर दिन कम से कम दो लीटर पानी पीना जरूर है.
    अग्नाशयी दर्द से आराम के लिए अंगूर का रस, सेब और करोंदा में से एक आहार 1 से 2 दिनों तक लें.
    शराब से परहेज करें.
    एक दिन में 20 ग्राम से ज्यादा वसा लेने से बचें.

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    Tags: AIIMS, Goa, Health News, High-cost chronic disease like cancer, Manohar parrikar, Protect from cancer

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