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कोरोना से बचाव के लिए सीक्रेट दफ्तर बनाकर काम कर रही हैं कंपनियां

News18Hindi
Updated: March 26, 2020, 7:21 PM IST
कोरोना से बचाव के लिए सीक्रेट दफ्तर बनाकर काम कर रही हैं कंपनियां
साल 2001 में अमेरिका में दो बड़ी व्यवासायिक इमारतों पर हुए आतंकी हमलों ने कंपनियों को गोपनीय दफ्तर या बैकअप प्लान तैयार रखने के लिए प्रेरित किया.

कोरोना वायरस (Corona Virus) के वैश्विक फैलाव के बीच कंपनियां इन सीक्रेट दफ्तर को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं.

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  • Last Updated: March 26, 2020, 7:21 PM IST
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कोरोना वायरस (Corona Virus) की वजह से दुनिया के कई देशों में चल रहे लॉकडाउन (Lock Down) के बीच वर्क फ्राम होम कंपनियों के लिए सबसे मुफीद साधन साबित हो रहा है. ज्यादातर दफ्तरों के कर्मचारी अपने घरों से ही काम निपटा रहे हैं. इससे उन्हें कोरोना वायरस के संक्रमण से बचे रहने में भी मदद मिल रही है. लेकिन कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं जो इस आपातकालीन स्थिति में कर्मचारियों से वर्क फ्राम होम न करवा कर सीक्रेट दफ्तरों के जरिए अपना बिजनेस चला रही हैं. कुछ लोग इसे घोस्ट ऑफिस भी कहते हैं. पहले भी आतंकी हमलों, प्राकृतिक आपदाओं और हां महामारियों के वक्त भी कंपनियां ऐसे तरीके अपनाती रही हैं.

बीबीसी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक ये दफ्तर इतने गोपनीय तरीके से चलाए जा रहे हैं कि कई बार बगल से निकलने वालों को भी अंदाजा नहीं होता कि उनके इर्द गिर्द लोग छिपकर काम कर रहे हैं. अब जबकि कोरोना वायरस की क्राइसिस तकरीबन सभी ताकतवर मुल्कों को अपनी गिरफ्त में ले चुकी है तब कई बड़ी कंपनियां, जिनमें बैंक भी शामिल हैं, इस तरह के गोपनीय दफ्तरों के जरिए काम निपटा रही हैं. इसके पीछे आइडिया यह है कि अगर कंपनी का मुख्य दफ्तर किसी वजह से वायरस से संक्रमित हो जाए तो बैकअप प्लान के जरिए वहां से काम चालू रहे.

इसे वर्क फ्राम होम का विकल्प भी माना जा रहा है. लेकिन यह सभी कर्मचारियों के लिए नहीं होता है. कई बार कंपनियां किसी आपातकालीन स्थिति में कर्मचारियों को बांट देती हैं. कुछ को इन गोपनीय दफ्तरों के जरिए तो कुछ को वर्क फ्राम होम देकर काम निपटाया जाता है. गोपनीय दफ्तरों में मुख्य रूप से उन्हीं कर्मचारियों या अधिकारियों को रखा जाता है जो व्यवसायिक रूप से संवेदनशील जानकारियां रखते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर




इन दफ्तरों में कैसी होती है व्यवस्था
कंपनियां आपातकालीन स्थिति भांपकर मुख्य दफ्तर से अलग एक गोपनीय दफ्तर तैयार करती हैं जिसमें कर्मचारियों के लिए पूरी तैयारी पहले से ही होती है. मतलब कंप्यूटर से लेकर इंटकॉम तक सारी तरह की सुविधाएं. माना जा रहा है कि अगर कोरोना वायरस लंबे समय तक बना रहा तो कंपनियों को इन दफ्तरों के जरिए अपना काम चालू रखने में बहुत ज्यादा मदद मिलेगी.

बीबीसी की रिपोर्ट में एक बड़ी कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट पैट्रिक मोर्ले ने बताया कि हमारे कस्टमर दुनियाभर में फैले हुए हैं. हमें इस वक्त जरूरत से ज्यादा डिमांड आ रही है ऐसा शायद पहली बार हो रहा है जब हम किसी भी वक्त काम नहीं रोक सकते. इसमें बैकअप ऑफिस हमारी मदद करता है. मोर्ले जिस कंपनी के लिए काम करते हैं उसके 60 बैकअप ऑफिस यूके, युएस और इंडिया में हैं. ज्यादातर इमारतें यूके में हैं.

हालांकि बैकअप ऑफिस या सीक्रेट ऑफिस को लेकर एक्सर्ट की राय अलग है. कई एक्सपर्ट का मानना है कि कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के समय में वर्क फ्राम होम से बेहतर कोई दूसरा विकल्प नहीं है. संभव है कि बैकअप ऑफिस में भी कोई एक संक्रमित व्यक्ति मौजूद हो, जो कंपनी का पूरा प्लान चौपट कर दे.

फाइनेंशियन सर्विस एजेंसी और बैंक विशेषतौर पर इन सीक्रेट ऑफिस का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि इन्श्योरेंस, पैट्रो केमिकल्स और रियलस्टेट के धंधों में काम कर रही कंपनियां भी बैकअप ऑफिस का काम इस्तेमाल करती हैं. सुरक्षा कारणों की वजह से कंपनियां सामान्य तौर पर अपने इन दफ्तरों के पते का खुलासा नहीं करतीं.

गोपनीय दफ्तर चलाने का प्लान मूल तौर पर दुनिया में 9/11 के हमले के बाद शुरू हुआ. साल 2001 में अमेरिका में दो बड़ी व्यवासायिक इमारतों पर हुए आतंकी हमलों ने कंपनियों को गोपनीय दफ्तर या बैकअप प्लान तैयार रखने के लिए प्रेरित किया. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नाम से मशहूर न्यूयॉर्क की ये दोनों इमारतें व्यापार का वैश्विक केंद्र थीं. माना जा सकता है कि इस आतंकी हमले ने दुनिया को गोपनीय दफ्तरों के लिए सजग रहने का आइडिया दिया.

प्रतीकात्मक तस्वीर


अमेरिका के ऑक्लाहोमा राज्य में कंपनियां अक्सर प्रकृतिक आपदाओं से बचने के लिए गोपनीय दफ्तरों की व्यवस्था रखती हैं. तूफान की वजह से इस राज्य में जब भी मुश्किलें आती हैं तो कंपनियां इन गोपनीय दफ्तरों के जरिए ही काम करती हैं.

मुश्किल वक्त में वरदान
इन गोपनीय दफ्तरों को व्यापार के लिहाज से आपातकालीन समय में वरदान माना जाता रहा है. कई कंपनियां गोपनीय दफ्तरों के लिए बड़ी मात्रा में पैसा खर्च करती हैं. इनमें विशेष रूप से बैंक और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियां होती हैं.
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First published: March 26, 2020, 6:58 PM IST
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