सदियों से इन देशों में खाए जाते रहे हैं टिड्डे, अब क्यों बरती जा रही सावधानी

सदियों से इन देशों में खाए जाते रहे हैं टिड्डे, अब क्यों बरती जा रही सावधानी
चीन में टिड्डों को फ्राई करके बड़े चाव से खाया जाता है

दुनिया के कई हिस्सों में सैकड़ों हजारों सालों से टिड्डियों, कीड़े-मकोड़ों को खाए जाने का वर्णन है. इसमें प्रोटीन से लेकर पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं लेकिन अब केमिकल छिड़काव आदि के कारण उन्हें खाने से पहले सावधानी बरतने की हिदायत दी जा रही है

  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
देश में इन दिनों टिड्डियों के आक्रमण की खबरें सुर्खियों में हैं. ये हर साल अफ्रीका से खाड़ी के देशों और फिर दक्षिण एशिया में घूमती हैं. लेकिन इस बार टिड्डियों का हमला ज्यादा बड़ा है. इससे बड़े नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है. फसलों, अर्थव्यवस्था और जीवन के लिए उन्हें बड़ा खतरा माना जा रहा है. ये खतरा अभी कई हफ्ते तक बना भी रह सकता है.

कई देशों में जहां टिड्डियों का खतरा लगातार बना रहता है, वहां ये सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या इन्हें खाने या पशु आहार में बदला जा सकता है. लेकिन एक बड़ा खतरा ये है कि उन पर बड़े पैमाने पर केमिकल का छिड़काव भी होता है. ये टिड्डियों को जहरीला बना रहा है. लेकिन कई जगहों पर उन्हें खाया जाता है. दरअसल रिसर्च से पता चला है कि बहुत से कीड़े मकोडे़ और टिड्डे प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों का अच्छा सोर्स होते हैं.

80 के दशक में कुवैत के लोग इसे खाने लगे
1980 के दशक के आखिर में कुवैत पर बड़े पैमाने पर टिड्डियों का हमला हुआ. तब स्थानीय निवासियों ने उन्हें इकट्ठा किया और खाना शुरू कर दिया. हालांकि इन टिड्डों पर कीटनाशकों का छिड़काव किया गया था. हालांकि रिसर्च से पता चला कि इन केमिकल्स के छिड़काव के कारण इनमें फास्फोरस और अन्य केमिकल तत्व बने रहते हैं. इससे मानव शरीर पर प्रतिकूल असर पड़ता है. किडनी, लीवर और हृदय पर खराब असर पड़ सकता है. आस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी हो सकती है.



लातीनी देश उन्हें भोजन में शामिल करते रहे हैं


हाल फिलहाल में पूर्वी अफ्रीका में जब टिड्डियों का हमला हुआ तो वहां एक अभियान चलाकर कहा गया कि कोई भी उन्हें नहीं खाए. चाहे वो जिंदा हों या मृत. क्योंकि कीटनाशक कई बार कीटों को तुरंत नहीं मारते. अफ्रीका और एशिया के कई देशों में टिड्डियों को स्वादिष्ट माना जाता है.

80 के दशक में जब कुवैत में टिड्डियों का बड़ा हमला हुआ तो वहां के लोगों ने इसे खाना शुरू कर दिया


हालांकि टिड्डियों को खाना हमेशा खतरनाक नहीं होता था. अफ्रीका में तो जैसे ही इनका प्रकोप शुरू होता था. लोग उन्हें इकट्ठा करके खाने में इस्तेमाल करते थे. मध्य पूर्व में खाड़ी देशों और दक्षिण एशियाई देशों में भी ऐसा होता रहा है. यहां तक कि लातीनी अमेरिकी देशों में भी उन्हें खाया जाता रहा है. चूुंकि टिड्डियों का खतरा प्राचीन काल से ही बना रहा है, लिहाजा मनुष्य उन्हें भोजन में तब्दील करते रहे हैं. सदियों से अमेरिका के मूल निवासी टिड्डियों और अन्य कीटों को भोजन में शामिल करते रहे हैं.

इजरायल में इसे चाव से खाते हैं
मध्य पूर्व खासकर इजरायल में इसे खाया जाता रहा है. वो इसे क्रंची और क्रिस्पी फूड मानते हैं. कई मुस्लिम देशों में लोग इसे अपने खाने में अकेले हलाल कीट भोज पदार्थ के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.

अफ्रीका में खुद खाते हैं पशुआहार भी बनाते हैं
अफ्रीका के भी कई हिस्सों में इसे सैकड़ों सालों से खाया जाता रहा है. आज भी ऐसा ही होता है. मेडागास्कर में जब फसलों पर टिड्डियों का हमला हुआ और वो फसलों को चट कर गए तो स्थानीय लोगों ने उन्हें पकड़कर खाने के तौर पर इस्तेमाल किया. इसे पशुआहार भी बनाया. वो आज भी ऐसा ही करते हैं.
अफ्रीका के कई देशों में तो इसे खाने में बहुत स्वादिष्ट माना जाता है और बहुत चाव से खाया जाता है. इसको वे कई तरीके से खाते हैं- इसमें इसे फ्राई करना और भूनना आदि शामिल है.

वाराणसी न्यूज, यूपी न्यूज, टिड्डी, किसानों के फसल का नुकसान, Varanasi News, UP News, UP News in Hindi, Locusts, Farmers, Crop Loss
दुनिया के कई हिस्सों में टिड्डियों को सैकड़ों सालों से खाया जाता रहा है और इसे पोषक भी मानते हैं


बाइबल में भी जिक्र
बाइबल में तो ये कहा गया है कि जॉन नाम का क्राइस्ट का एक शिष्य जब जंगलों में रहा तो वो टिड्डियों  और मधुमक्खियों को खाता था. कुछ लोग ये तर्क देते हैं कि ये वेजेटेरियन फूड हैं. इस्लाम में इसे हलाल खाने में रखा गया है. सऊदी अरब और यमन में भी इसको पुराने समय में खाने के प्रमाण मिलते हैं. मोरक्को, मिस्र और फिलिस्तीन में इसको खाए जाने का वर्णन है.

ये भी पढ़ें :-

फूंक मारने पर 1 मिनट में रिजल्‍ट देगी कोरोना किट, बिना लक्षण वालों की करेगी सटीक जांच
29 मई 1953 : वो दिन जब हिलेरी और नोर्गे ने फतेह कर लिया था एवरेस्ट
भारत-मलेशिया की 'नई दोस्ती' तो हो गई है लेकिन जाकिर नाईक का प्रत्यर्पण नहीं आसान
स्वीडन के इतिहास में छिपा है लॉकडाउन न करने का राज, जानें पूरी कहानी
रिपोर्ट में खुलासा: पाकिस्तान से दोस्ती की बड़ी कीमत वसूल रहा है चीन
जानिए पांच वजहें, कैसे अमेरिका में कोरोना से 1 लाख लोगों ने जान गंवाई
कैसे कोरोना वायरस ने बदल दिया हमारे गूगल सर्च का पैटर्न...

 
First published: May 29, 2020, 3:24 PM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading