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Glaciers ने दिए संकेत और बताया, मंगल पर आए थे कितने हिमयुग

मंगल ग्रह (Mars) के पत्थरों के अध्ययन से वैज्ञानिकों को हिमयुगों (Ice Age) के बारे में जानकारी मिली. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
मंगल ग्रह (Mars) के पत्थरों के अध्ययन से वैज्ञानिकों को हिमयुगों (Ice Age) के बारे में जानकारी मिली. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

मंगल ग्रह (Mars) के ग्लेशियर (Glaciers) की सतह पर पाए जाने वाले पत्थरों के अध्ययन से वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि पिछले 80 करोड़ सालों में लाल ग्रह पर कितने हिमयुग (Ice age) आए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 21, 2021, 8:04 PM IST
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पिछले कुछ समय से वैज्ञानिकों की दिलचस्पी मंगल ग्रह (Mars) में ज्यादा हो गई है. मंगल पर मानव भेजने की योजनाओं ने इन्हें बल दिया है. यही वजह है कि अब पृथ्वी (Earth) के साथ ही मंगल का अध्ययन गहराई से होने लगा है. वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि भले ही आज मंगल पर जीवन के अनुकूल नहीं हैं, लेकिन एक समय जरूर रहे होंगे. ताजा अध्ययन ने बताया है कि मंगल के इतिहास (History of Mars) के बारे में बताया है कि इस लाल ग्रह ने पिछले 800 सालों में कितने हिमयुगों (Ice Ages) का सामना किया है.

कितने हिमयुग आए हैं
इस अध्ययन से पता चला है कि मंगल ग्रह पर पिछले 30 करोड़ सालों में छह हिमयुग आ चुके हैं जबकि पिछले 80 करोड़ सालों में 20 हिमयुग आ चुके हैं. जहां तक पृथ्वी के हिमयुगों की बात है. यहां पिछली बार 2000 साल पहले ही हिमयुग आया था. इस दौरान पूरी पृथ्वी बहुत सारे गलेशियर ढक गई थी, लेकिन धीरे धीरे ये ग्लेशियर ध्रुवों की ओर खिसकते गए.

एक ही जगह पर कायम रहे ग्लेशियर
मंगलग्रह पर हिमयुग के ग्लेशियर ने अपनी जगहों को नहीं छोड़ा क्योंकि लाल ग्रह पर 300 सालों से -63 डिग्री का औसत तापमान रहा और उनकी सतह भी अवशेषों से ढकी रही. न्यूयार्क के कोलगेट यूनिवर्सिटी में जियोलॉजी के एसिस्टेंट प्रोफेसर और प्लैनेटरी जियोलॉजिस्ट तथा इस शोध के लेखक जो लेवी का कहना है कि मंगल पर हिमनदों में बहने वाले सभी पत्थर और रेत बर्फ की सतह पर ही रहे. यह बिलकुल किसी कूलर में उन अवसादों के अंदर बर्फ के रखने जैसे है.



सबसे बड़ा सवाल
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक यह अध्ययन प्रोसिडिग्स ऑफ द नेशनल एकेडमिक्स ऑफ साइंसेस में प्रकाशित हुआ है. शोधकर्ता लंबे समय से यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि मंगल पर ये ग्लेशियर कैसे बने थे. यह शोध इन सवालों के जवाब दे सकता है.

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हिमयुग में मंगल ग्रह (Mars) पर पत्थर गतिमान हो गए थे, इसलिए शोधकर्ताओं ने पत्थरों (Rocks) का अध्ययन किया.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


नासा की तस्वीरों का अध्ययन
लेवी ने पाया कि चूंकि चट्टानें समय के साथ घिसती हैं. एक ही आकार के पत्थरों के टुकड़ों का पहाड़ों के नीचे आना एक हिमयुग की ओर इशारा करता है. लेवी ने बताया कि उन्होंने और कोलगेट यूनिवर्सिटी के 10 छात्रों ने मंगल की सतह पर हिमनदों की 45 तस्वीरों का अध्ययन किया. ये तस्वीरें नासा के मार्स रिकॉनायसेंस ऑर्बिटर ने ली थी.

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दिक्कतें आई अध्ययन में
उच्च विभेदन (High resolution) तस्वीरों अध्ययन से शोधकर्ताओं ने पत्थरों की गिनती के साथ  उनके आकार का भी पता लगाया. तस्वीरों को बड़ा करने से टीम को यह अध्ययन करने में आसानी हुई और वे 60 हजार पत्थर को गिन कर उनका मापन कर सके. यह काम आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस  के जरिए जल्दी हो सकता था, लेकिन उससे ग्लेशियर की सतह पर पत्थरों की पहचान सही से नहीं कर पाता.

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मंगल ग्रह (Mars) की कक्षा में बदलाव होने पर वहां हिमयुग (Ice Age) आते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


छल्लों ने बताई कहानी
शोधकर्ताओं ने पाया  पत्थरों के आकारों में अंतर नियमित नहीं था इसलिए उनके लिए आकार उतना मायने नहीं रख रहा था. उन्हें ज्यादा रुचि उनके समूह बनने या जमा होने में थी. मंगल के ग्लेशियर में पत्थर उनके अंदर बहते हैं,  बाहर नहीं इससे इन पत्थरों में घिसाव नहीं हुआ. लेकिन पत्थर अलग आकारों के छल्लों में दिखाई दिए. इन छल्लों से शोधकर्ताओं को हर हिमयुग के अलग बहाव के संकेत मिले.

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हिमयुग तब आता है जब ग्रह की कक्षा में बदलाव आता है. इसके अलावा अलग अलग हिमयुग वह समय बताते हैं जब मंगल ग्रह अपने कक्षा में डगमगाने लगा होगा . इससे मंगल की जलवायु परिवर्तन पर कुछ रोशनी पड़ेगी. शोधकर्ताओं को लगता है कि अभी इस मामले में काफी विस्तार से अध्ययन की जरूरत है.
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