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मंगल पर पहले था कभी जमीन के नीचे बहुत सारा पानी, जानिए कैसे पता चली यह बात

News18Hindi
Updated: March 31, 2020, 7:44 PM IST
मंगल पर पहले था कभी जमीन के नीचे बहुत सारा पानी, जानिए कैसे पता चली यह बात
मंगल ग्रह की सतह के नीचे सालों पहले पानी होने का पता चला है.

ताजा शोध से पता चला है कि मंगल (Mars) पर करोड़ों साल पहले जमीन के नीचे पानी के दो बहुत बड़े स्रोत थे. ये नतीजे मंगल पर जीवन की संभावनाओं (Life on Mars) के बारे में अहम खोज हो सकती है.

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  • Last Updated: March 31, 2020, 7:44 PM IST
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नई दिल्ली.  इंसान की हमेशा ही कोशिश रही है कि वह इस धरती (Earth) के अलावा भी किसी और ग्रह पर जीवन तलाश कर ले. इस कोशिश में वह चांद (Moon) पर अपनी एक बस्ती बसाने की तैयारी कर रहा है तो इस बात पर भी गहन शोध जारी है कि मंगल (Mars) पर जीवन की कितनी संभावनाएं हैं. अब एक शोध से पता लगा है कि मंगल पर काफी समय पहले जमीन के नीचे पानी के बहुत बड़े स्रोत थे.

मंगल पर पानी को लेकर पहले से ही है कौतुहल
कई वैज्ञानिकों को लगता है कि मंगल पर जीवन संभव है और यहां पहले कभी पानी भी था. उनका मानना है कि जिस तरह से पृथ्वी से मंगल ग्रह की सतह दिखाई देती है, ऐसा लगता है कि वहां कभी पानी बहता था. लेकिन नेचर जियो साइंस में प्रकाशित शोध के मुताबिक वहां की सतह के नीचे करोड़ों साल पहले पानी के दो बड़े स्रोत थे.

क्या पता चला है ताजा शोध में



वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह की सतह के नीचे दो ऐसी जगह के बारे में पता किया है, जिनमें कभी बहुत सारा पानी था. यह मानना मुश्किल है, लेकिन आज जो सूखा और धूल भरा लाल ग्रह है कभी गीला और पानी से भरपूर ग्रह था. खास बात यह है कि ये दोनों जगह बिल्कुल ही अलग हैं यहां तक कि इनकी रासायानिक बनावट भी अलग है.



Cubesat, NASA , Solar Storm
इस समय दुनिया में अंतरिक्ष शोध को लेकर कई बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं.


क्या जानना चाहते हैं लोग
ऐरीजोना यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक डॉ. जेसिका बार्न्स (Jessica Barnes) का कहना है, “ बहुत सारे लोग जानना चाहते हैं कि मंगल पर पानी का क्या इतिहास है. वह वहां कहां से आया, वह वहां की सतह पर कब तक रहा, मंगल के आंतरिक भूभागों में पानी कहां से आया है. इससे उसके निर्माण की कहानी के बारे में क्या पता चलता है.

कैसे पता चला इसके बारे में
इस बारे में मंगल के पत्थरों से पता चला. हम वहां से नमूने नहीं ला सकते और आज तक हमने ऐसा कोई मिशन नहीं बनाया जो मंगल से वहां के नमूने ला सके. लेकिन मंगल हमारे लिए खुद व्यवस्था कर रहा है. मंगल की धरती से उल्कापिंड टूट कर धरती तक समय-समय पर आते रहते हैं. ऐसे ही दो उल्कापिंड यहां आए. एक 1984 में अंटार्टिका में खोजा गया एलन हिल्स 84001 और दूसरा सहारा रेगिस्तान में खोजा गया नॉर्थवेस्ट अफ्रीका 7034 था.

तो क्या पता किया टीम ने
डॉ. बार्न्स की टीम ने इन उल्का पिंड के भीतर हाइड्रोजन के आइसोटोप्स (अलग न्यूट्रॉन्स की संख्या वाले परमाणु) पता किए. उन्हें ड्यूटेरियम और प्रोटियम नाम के दो हाइड्रोजन आइसोटोप मिले. इनकी उपस्थिति एक पानी के जीवाश्म की तरह यह समझने में मदद करती है कि क्या कभी ये पानी के रूप में उस जगह मौजूद थे जहां से यह उल्कापिंड आया था.

इस बार मंगल पर अमरीकी रोवर के साथ 1.09 करोड़ नाम भी जाएंगे. NAS to send 10.9 million names on Mars
इस बार मंगल पर अमेरिकी रोवर के साथ 1.09 करोड़ नाम भी जाएंगे.


ऐसे पता चला मंगल के पानी का इतिहास
इन्हीं दोनों के आइसोटोप्स के अनुपात से मंगल के पानी के इतिहास के बारे में पता लगा और यह भी कि वे किस तरह की रासायनिक प्रक्रियाओं से गुजरे. अंटार्टिका वाले उल्कापिंड पर रेडियोएक्टिव डेटिंग तकनीक के प्रयोग से पता चला कि मंगल पर 3.9 अरब साल पहले पानी था. वहीं अफ्रीकी उल्कापिंड की डेटिंग से पता चला कि मंगल पर 1.5 अरब साल पहले पानी था.

इसकी खास बात यह रही कि दोनों उल्कापिंड में हाइड्रोजन आइसोटोप का अनुपात समान था. हैरानी की बात यह रही कि यह अनुपात मंगल पर गए रोवर ने भी वहां के नमूनों में पाया.

यह नतीजे भी मिले इस शोध से
इतना ही नहीं इससे पहले हुए शोधों से इन नतीजों का मिलान करने पर यह भी पाया गया कि मंगल के अंदर कोई मैग्मा का महासागर नहीं है जैसा कि पृथ्वी के नीचे है. पृथ्वी की सतह उसके नीचे बड़े तरल गरम मैग्मा पर तैर रही है. ऐसा मंगल पर नहीं हैं. इसके अलावा यह भी निषकर्ष निकाला जा सका है कि ये पानी के ये दोनों स्रोत अलग थे और इनका आपस में कोई संबंध नहीं था.

Nasa
नासा आर्टिमस लूनार कार्यक्रम के तहत 2028 तक मानव को मंगल ग्रह पर भेजना चाहता है.


इस शोध के नतीजे मंगल की एस्ट्रोबायोलॉजी और वहां पूर्व में जीवन होने की संभावनाओं को समझने के बहुत अहम माना जा रहा है.

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First published: March 31, 2020, 6:44 PM IST
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