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क्या मंगल पर मानव अभियान भेजने में लगेगा 20-30 साल का वक्त?

मंगल (Mars) पर जाने के लिए अभी वैज्ञानिकों को बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

मंगल (Mars) पर जाने के लिए अभी वैज्ञानिकों को बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

मंगल (Mars) पर मानव अभियान (Human Mission) भेजने की तैयारी दुनिया (Countries) के कई देश अगले ही दशक के लिए कर रहे हैं. लेकिन एक वैज्ञानिक का दावा है कि इसमें 20-30 साल का समय और लग जाएगा.

  • News18Hindi
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    मंगल (Mars) पर इंसान को भेजने के लिए दुनिया के कई देश तैयारी कर रहे हैं. इसमें अमेरिका (USA) और चीन ने इसकी खुले तौर पर घोषणा भी की है. वहीं निजी क्षेत्र से एलन मस्क भी मंगल पर बस्ती बसाने की योजना पर काम कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने अपने महत्वाकांक्षी टाइमलाइन तक का ऐलान कर रखा है. लेकिन मंगल पर जाने के लिए ऐसी बहुत सारी चुनौतियां हैं जिनका हल नहीं निकला है. इस बीच एक वैज्ञानिक का दावा है कि मंगल पर मानव अभियान (Human missions) पहुंचने में 20 से 30 साल का समय लगेगा.

    कई चुनौतियां कायम
    मंगल पर जाने की तस्वीर तभी बनने लगी थी जब मानव ने चंद्रमा पर अपने पहला कदम रखा था. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने 2033 तक मंगल पर मानव अभियान भेजने का इरादा जताया है, तो वहीं चीन ने भी ऐसी ही डेडलाइन तय कर ली है. नासा और चीन दोनों के रोवर मंगल पर इस सिलसिले में कुछ प्रयोग भी कर रहे हैं. वहीं अब तक मगंल ग्रह पर जाने को लेकर कुछ समस्याएं सुलझा ली गई हैं तो काफी चुनौतियों का समाधान निकालना अभी बाकी है जो कब होगा यह भी तय नहीं है.

    बदल रही है धारणाएं
    अभी तक सबसे बड़ी चुनौती मंगल पर जाने के लिए आने वाले खर्चे की रही है. इसके अलावा भी बहुत सारी व्यवहारिक समस्याएं हैं. कुछ निजी और व्यवसायिक प्रयासों से पुनः उपयोग में लाए जा सकने वाला रॉकेट अस्तित्व में आए हैं और साथ ही अंतरिक्ष पर्यटन का क्षेत्र खुल ही सा गया है. इससे मंगल के लिए धारणाओं में भी बदलाव देखने को मिला है.

    शुरुआत हो चुकी है पर समय लगेगा
    न्यूजटॉक की रिपोर्ट के मुताबिक फ्लोरीडा स्पेस इंस्टीट्यूट के ग्रह विज्ञानी डॉ फिलिप मेट्जगर का कहना है, “मुझे लगता है कि 20 साल बात शुरुआत हो जाएगा यहां में ऐसा होना संभव मानने लगूंगा. मुझे नहीं लगता है कि हमें अगले 20 साल से पहले वहां पहुंच पाएंगा. वास्तव में इसमें 30 साल भी लग सकते हैं. लेकिन मुझे लगता है कि हम उस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं.”

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    मंगल (Mars) पर कई रोवर वहां के हालात का अध्ययन कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर:NASA_JPL-Caltech)

    हो रही है बहुत सी तरक्की
    वर्तमान प्रगति केबारे में बात करते हुए मेट्जगर ने बताया कि कई संस्थान मंगल पर जाने पर ध्यान दे रहे हैं, तकनीक में जबर्दस्त विकास हुआ है. अंतरिक्ष उड़ान की कीमतें भी नीचे आ रही हैं. मंगल पर जाने वाले और अभियान कई समस्याओं का समाधान सुझाएंगे, लेकिन कुछ समस्याएओं का समाधान जैसे की सौर ऊर्जा का उपयोग कैसे किया जाए, मंगल पर सही से काम नहीं करेगा.

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    कितना वक्त लगेगा
    जहां हाल के कुछ सालों में मंगल पर शोधकार्य तेजी से बढ़ा है. मेट्जगर का विश्वास है कि मंगल पर मानव अभियान पहुंचने में अब भी 20 से 30 सालों की दूरी है. अब भी ऐसे बहुत सारी चुनौतियां है जिनका हल निकालने में समय लग सकता है. ये समस्याएं छोटी से लेकर बहुत बड़े स्तर की हैं. मेट्जगर ने इनमें से कुछ समस्याओं पर रोशनी भी डाली है.

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    मंगल (Mars) पर लैंडिंग करना सबसे बड़ी चुनौती होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: SpaceX)

    धूल और मिट्टी की समस्या
    मेट्जगर  बताते हैं कि मंगल पर जाने में एक बड़ी समस्या धूल और मिट्टी की वजह से मंगल के भूभाग और वातावरण के लिए समस्याओं से आएगी. भूगर्भीय समयावधि में धूल केवल जमा होगई जिससे वह हर जगह है, और यह खुरदुरी भी है इसलिए यह तकनीक को खराब भी करेगी. लेकिन धूल से ज्यादा समस्या मिट्टी पैदा करेगी. जो लैंडिंग में एक चुनौती पैदा करेगी.

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    क्या होगा लैंडिंग में
    लैंडिंग में समस्या होगी रॉकेट एक्जॉस्ट, यानि रॉकेट से निकलने वाली आग. मंगल के गुरुत्व के हिसाब से बड़ा एक्जॉस्ट चुनना होगा. लेकिन इसमें दिक्कत यह आएगी कि वह बहुत प्रभावी गड्ढा करने वाला उपकरण बन जाएगा. इसके साथ वह हर तरफ धूल के साथ मिट्टी भी फैला देगा जो बहुत तेज गति से बिखरेगी. जो आपके आउटपोस्ट के साथ रॉकेट के निचले हिस्से तक को नुकसान पहुंचा देगी. इसमें 50 तरह की तकनीकी समाधानों पर काम हो रहा है.

    मेट्जगर का कहना है कि प्रभावी लॉन्चिंग पैड और लैंडिंग साइट बनाने में दशकों का समय लगेगा. इसमें दूसरे से या स्वचलित तकनीक से काम करने वाले बड़े हिस्सों को विकसित करना होगा. इसके लिए बहुत सारे मिशन लगेंगे. डॉ मेट्जगर का कहना है कि वैसे बिना लॉन्चिंग पैड की तकनीक पर भी काम हो रहे हैं, लेकिन हम वहां तक पहुंच नहीं सकेंगे और अंततः लॉन्चिंग पैड का ही सहारा लेना होगा जिस पर अभी तक काम भी शुरू नहीं हुआ है.

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