भारतीय मूल के वैज्ञानिकों ने ISS पर खोजे नए Bacteria, जानिए कितने हैं ये अहम

इंटरनेशल स्पेस स्टेशन (ISS) में नए बैक्टीरिया (Bacteria) के पाए जाने से वैज्ञानिक काफी आशांवित हैं. (तस्वीर: shutterstock)

इंटरनेशल स्पेस स्टेशन (ISS) में नए बैक्टीरिया (Bacteria) के पाए जाने से वैज्ञानिक काफी आशांवित हैं. (तस्वीर: shutterstock)

भारतीय मूल के वैज्ञानिकों ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर चार नए बैक्टीरिया (Bacteria) की मौजूदगी पाई है जो मंगल ग्रह (Mars) पर पौधों को उगाने में काम आ सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 8:59 AM IST
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इस समय नासा (NASA) सहित दुनिया के बहुत सारी स्पेस एजेंसी लंबी अंतरिक्ष यात्राओं की तैयारी कर रही है. इसके लिए यात्रियों को लंबे समय तक अंतरिक्ष में सुरक्षित और स्वस्थ रख पाने के लिए शोध किए जा रहे हैं. ये शोध पृथ्वी पर ही नहीं बल्कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में भी हो रहे हैं. इनमें सबसे खास शोध सूक्ष्मजीवों को लेकर हो रहे हैं. भारतीय मूल के वैज्ञानिकों के ताजा अध्ययन के मुताबिक वैज्ञानिकों ने ISS पर बैक्टीरिया (Bacteria) के चार ने स्ट्रेंस खोजे हैं. बताया जा रहा है कि मंगल ग्रह (Mars) पर ये बैक्टीरिया पौधे उगाने के काम आ सकते हैं.

भारतीय मूल के वैज्ञानिकों ने किया शोध

हाल ही में वैज्ञानिक जर्नल फ्रंटियर्स इन माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित यह शोध नासा की कैलिफोर्निया के पैसाडेना स्थित जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी के कस्तूरी वेंकटेश्वरनऔर नितिन कुमार सिंह ने किया है. इस अध्ययन में भारत की हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया और कॉर्नल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता भी इस अध्ययन में शामिल थे.

8 अलग-अलग जगहों से लिए नमूने
पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित ISS में बहुत सारे अंतरिक्ष यात्री सूक्ष्म गुरुत्व के हालातों में प्रयोग कर रहे हैं. पिछले छह सालों में उन्होंने स्टेशन के आठ अलग अलग जगहों से नमूने जमा किए हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी की पड़ताल की है. इस अध्ययन में पाया गया है कि पाए गए चार बैक्टरिया में से एक से तो वैज्ञानिक पहले से ही परिचित हैं, लेकिन बाकी तीन पूरी तरह से नए हैं.

कहां पाए जाते हैं ऐसे बैक्टीरिया

शोधकर्ताओं का कहना है कि ये सभी चार बैक्टीरिया एक ही परिवार के हैं. सीएनएन रिपोर्ट के मुताबिक पाए गए सभी बैक्टीरिया मिथाइलबैक्टीरासिया (Methylobacteriaceae)परिवार के हैं. इस परिवार के बैक्टीरिया केवल मिट्टी और ताजे पानी में पाए जाते हैं, लेकिन अभी तक वैज्ञानिक केवल मिथाइलोरूब्रम रोडेसियानम नाम के बैक्टीरिया से ही परिचित थे.



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इंसान (Humans) को पृथ्वी (Earth) से बाहर कहीं भी भेजने के लिए सूक्ष्मजीवों का उन हालातों में पनपना बहुत जरूरी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


खास हैं ये बैक्टीरिया

शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया है कि खोजे गए तीन नए बैक्टीरिया मिथाइलबैक्टीरियम इंडिकम के संबंधी हैं. यह बैक्टीरिया चावल से अलग किया गया था. यह मीथेनॉल या मीथेन जैसे एक कार्बन वाले यौगिकों का उपयोग अपने भोजन के स्रोत के तौर पर करता है. इतना ही नहीं यह बैक्टीरिया रोगाणुओं को भी दूर रख सकता है. वहीं शोधकर्ताओं ने अपना मत दिया है कि इन नए बैक्टीरिया का नाम भारतीय वैज्ञानिक अजमल खान के नाम पर रखा जाए. उन्होंने इनके ले मिथाइलोबैक्टीरियम अजमली नाम सुझाया है.

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उपयोगी हो सकते हैं बैक्टीरिया

ये बैक्टीरिया नाइट्रोजन फिक्सेशन में भूमिका निभाते हैं जिसमें हवा की आणविक नाइट्रोजन को लेकर वे उसे अमोनिया में बदलते हैं और पौधों की वृद्धि में सहयाक होते हैं. वैज्ञानिकों को लगता है कि ये बैक्टीरिया अंतरिक्ष में पौधों को उगाने में मददगार हो सकते हैं. यह लंबी अंतरिक्ष यात्रा के लिए बहुत ही ज्यादा उपयोगी होंगे.

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इन बैक्टीरिया (Bacteria) का इन हालातों में पनपना मंगल ग्रह (Mars) पर मानव अभियानों के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


मंगल ग्रह पर भी उपयोगी

वैज्ञानिकों का कहना है कि नए स्ट्रेन्स जैविकतकनीकी रूप से जैनिकनिर्धारक हो सकते हैं, लेकिन  विपरीत स्थितियों में पौधों के पनपने में मददगार होने वाले इन बैक्टीरिया को अलग-अलग रखना जरूरी है. उल्लेखनीय है ये बैक्टीरिया मंगल ग्रह जैसी जगहों पर भी पौधों के पनपने में सहायक हो सकते हैं. इससे मंगल ग्रह पर इंसानों के रहने के लिए अनुकूल हालात बनाने उम्मीद को बल मिला है.

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इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पौधों को उगाने संबंधी प्रयोगों पर बहुत जोर दिया गया है. नासा के अलावा रूसी अंतरिक्ष यात्री भी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में कुछ पौधे उगाने में सफलता पाई है. इतना ही नहीं कुछ पौधों को स्टेशन के बाहर के माहौल में भी रख कर उन पर विकिरणों के  प्रभाव  का अध्ययन किया गया है.
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