क्या कहती है मंगल ग्रह के वायुमंडल में पृथ्वी के जैसे बादलों की मौजूदगी

मंगल (Mars) के ये बादल पृथ्वी (Earth) के बादलों की तरह दिखते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

मंगल (Mars) के ये बादल पृथ्वी (Earth) के बादलों की तरह दिखते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

मंगल ग्रह (Mars) पर उड़ते हुए बादलों (clouds) का वीडियो वायरल हो रहा है जो वास्तव में मंगल ग्रह के क्यूरियोसिटी रोवर (Curiosity Rover) के कैमरों की तस्वीरों से बना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 1:03 PM IST
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मंगल ग्रह (Mars) पर हमारे वैज्ञानिक जीवन के संकेतों (Signs of Life) और संभवनाओं की तलाश कर रहे हैं. वहां पर इंसानी बस्ती बसाने की योजनाएं तो चल ही रही हैं, फिलहाल जो वहां मानव जीवन के प्रतिकूल हालात हैं उन्हें अनुकूल बनाने के उपाय खोजे जा रहे हैं. ऐसे में मंगल ग्रह का एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें मंगल ग्रह पर उड़ते हुए बादल (Floating Clouds) दिखाई दे रहे हैं. इस वीडियो की खास बात यह है कि यह ‘फेक’ नहीं, बल्कि नासा (NASA) के क्यूरोसिटी रोवर (Curiosity Rover) के तस्वीरों से बना है.

किसने शेयर किया है ये वीडियो

क्यूरियोसिटी एक कार के आकार का रोवर है जो साल 2012 में मंगल ग्रह पर पहुंचा था.  क्यूरियोसिटी ने ये तस्वीर उसके शीर्ष पर लगे कैमरों से ली हैं. जिससे ये पांच मिनट का वीडियो बन सका है जिसमें उड़ते हुए बादल दिखाई दे रहे हैं. इसे नॉर्थ कैरोलीना स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ पॉल बर्ने ने शेयर किया है.

कैसे बना है ये
यह वीडियो क्यूरियोसिटी के नेवीगेशन कैमरे के आठ अगल-अलग विज्यूल्स को मिला कर बनाया गया है. यह बादल इतनी ज्यादा ऊंचाई पर है कि इसे सूर्य की रोशनी रात को भी चमका देती हैं. ये बादल पृथ्वी के बादलों की तरह दिखाई दे रहे हैं, लेकिन वे रिपोर्ट बताती है कि दोनों ही ग्रहों के वायुमंडल में बहुत ज्यादा फर्क है.

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मंगल ग्रह (Mars) के बादल का वीडियो वहां ली गईं तस्वीरों से मिलाकर बनाया गया है. (तस्वीर: Tweet-@ThePlanetaryGuy)


क्या अंतर है दोनों वायुमंडलों में



मंगल और पृथ्वी के वायुमंडल का अंतर बताता है कि ये बादल वैसे नहीं बने होंगे जैसे की पृथ्वी के  बादलों की तरह नहीं बने होंगे, भले ही वे वैसे ही क्यों ना दिखते हों. मंगल का वायुमंडल पृथ्वी के मुकाबले बहुत पतला है. यूरोपीय स्पेस एजेंसी के अनुसार, जहां पृथ्वी के वायुंडल में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की बहुलता है, वहीं मगंल के वायुमंडल में कार्बनडाइऑक्साइड की बहुलता है.

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पानी नहीं कार्बन डाइऑक्साइड

द इंडिपेंडेंट के मुताबिक साल 2008 में नासा के फोनिक्स लैंडर की सतह पर बर्फ पाई गई थी. लेकिन पृथ्वी की तरह यह बर्फ पानी की नहीं थी, बल्कि यह बर्फ कार्बन डाइऑक्साइड की थी. मगंल का पतला वायुमंडल में हलके बादल बनाता है जबकि पृथ्वी के ज्यादातर बादल बहुत घने होते हैं. इसके अलावा अंतरिक्ष से आने वाली धूल और अवशेष को भी यहां के बादलों के निर्माण के लिए जिम्मेदार माना जाता है.

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पृथ्वी (Earth) पर बादल बनने की प्रक्रिया बहुत ही अलग तरह की होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


पृथ्वी पर कैसे बनते हैं बादल

पृथ्वी पर बादल बनने की प्रक्रिया बहुत ही अलग तरह की होत है जिसमें यहां के ही खास हालात को योगदान होता है. यहां बादलों के बनने के लिए पानी के अणुओं का कणों के आसपास संघनित होना जरूरी है. पृथ्वी पर हवा से ऊपर ले जाए गए धूल के कण इसमें मदद कर पाते हैं, लेकिन मंगल पर इतना मोटा वायुमंडल नहीं हैं जिससे इस तरह से बादल बन सकें.

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तो फिर क्या होता है मंगल पर

मंगल पर बादलों के निर्माण के पीछे अंतरिक्ष से आई धूल को भी जिम्मेदार माना जाता है. इनसे वहां के वायुमंडल में वे कण आ जाते हैं जिनके आसपास अणु संघनित हो सकें. लेकिन ये अणु पानी के नहीं बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड के होते हैं. इतना ही नहीं मंगल का पतला वायुमंडल भी इस बात के लिए जिम्मेदार है कि मंगल के ये बादल पृथ्वी के बादलों की तरह ही घूमते दिखते हैं.
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