जानिए आखिर क्यों टल रही है मंगल पर नासा के हेलीकॉप्टर की उड़ान

नासा ने पहली बताया है कि इंजेन्युटी हेलिकॉप्टर (Ingenuity Helicopter) की उड़ान टल क्यों रही है. (तस्वीर :  NASA JPL-Caltech)

नासा ने पहली बताया है कि इंजेन्युटी हेलिकॉप्टर (Ingenuity Helicopter) की उड़ान टल क्यों रही है. (तस्वीर : NASA JPL-Caltech)

नासा (NASA) के पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) को मंगल ग्रह पर पहुंचे डेढ़ महीने का समय हो गया है फिर भी उसके इजेन्युटी हेलीकॉप्टर (Ingenuity Helicopter) की उड़ान दूसरी बार टल गई है.

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नासा (NASA) का पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) मंगल ग्रह पर 18 फरवरी को जजीरो क्रेटर पर उतरा था. रोवर के साथ वहां पर नासा का एक इंजेन्युटी हेलीकॉप्टर (Ingenuity Helicopter) भी भेजा गया है जो रोवर के उतरते ही वहां उड़ने में सक्षम बताया गया था. लेकिन इसकी उड़ान का कार्यक्रम दूसरी बार टाल दिया गया है. अब नासा ने इसके टलने की वजह बताई है.

अभी रोवर से ही जुड़ा है इंजेन्युटी

नासा के जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी की पर्सिवियरेंस की कंट्रोल टीम मंगल पर इस पहली उड़ान की लगातार तैयारी कर रही है. टीम ने अब उन चुनौतियों की जानकारी दी है जो इंजेन्युटी की उड़ान में बाधा डाल रही हैं. नासा ने हाल ही में इंजेन्युटी की एक तस्वीर जारी की है जिसमें हेलीकॉप्टर के चारों पैर दिखाई दे रहे हैं लेकिन वह पर्सिवियरेंस रोवर के पेट से अब भी चिपका हुआ है.

बैटरी चार्जिंग के साथ तापमान नियंत्रण भी
अभी तक पर्सिवियरेंस इंजेन्युटी की बैटरी चार्ज कर रहा था और साथ ही अपनी ऊर्जा के द्वारा एक थर्मोस्टैट हीटर का उपयोग कर इंजेन्युटी के तापमान को भी नियंत्रित कर रहा था. शुक्रवार को इस प्रजोक्ट के प्रमुख इंजीनियर बॉब बालाराम ने एक  ब्लॉग पोस्ट में बताया कि हीटर इंजेन्युटी के हिस्सों की पर्याप्त सुरक्षा कर रहा है.

संवेदनशील हिस्सों का तापमान

इंजेन्युटी के कुछ हिस्से संवेदनशील होते हैं इसलिये बहुत ही ज्यादा ठंडा तापमान उन्हें बहुत नुकसान पहुंचा सकता है. बालाराम बताते हैं कि यह हीटर जहां मंगल का तापमान रात को -90 डिग्री तक पहुंच जाता है, हीटर इंजेन्युटी के अंदर का तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक रख सकता है.



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इस उड़ान को मंगल (Mars) के तापमान की चुनौती मिल रही है. (Tweet: @NASAJPL)


रोवर से अलग होने की प्रकिया

इंजेन्युटी एक बार रोवर से अलग हो गया तो उसे अपने ही हीटर और बैटरी के साथ उड़ना होगा. इससे पहले कि इंजेन्युटी उड़ान भरे, पर्सिवियरेंस उसकी बैटरी को 100 प्रतिशत चार्च करने का प्रयास करेगा. फिर पर्सिवियरेंस इंजेन्युटी को छोड़ने के बाद दूर चला जाएगा. उसके बाद हेलिकॉप्टर जल्द से जल्द अपने उच्च तकनीकी के सौर पैनल खोल देगा.

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पहली रात होगी मुश्किल भरी

पृथ्वी की सतह पर जितनी सौर ऊर्जा पहुंचती है मंगल पर पहुंचने वाली सौरऊर्जा उसकी आधी ही होती है, लेकिन फिर भी यह सौर पैनलों को चार्ज करने के लिए काफी होती है. लेकिन इंजेन्युटी को पहली रात को खुद को बचाए रखना एक चुनौती होगा. उसे अपना तापमान -15 डिग्री के आसपास तक कायम रखना होगा.

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फिलहाल इंजेन्युटी हेलिकॉप्टर पर्सिविरयरेंस रोवर (Perseverance Rover) से जुड़ा हुआ है. . (तस्वीर: NASA/JPL-Caltech)


फिर होगी जांच

टीम इसके बाद अगले दिन तापमान जांचेगी और देखेगी कि यह कितना कम है और बैटरी के कार्यनिष्पादन अगे दिन तक देखा जाएगा. इसके लिए जरूरी है कि हेलिकॉप्टरसे रोवर पर बेस स्टेशन के साथ संचार समुचित तरह से सुनिश्चित किया जाए. बालाराम का कहना है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो फिर अगले कदम उठाए जाएंगे. रोटर ब्लेड का ताला खोला जाएगा और मोटर्स और सेंसर्स की टेस्टिंग होगी.

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अब यह उड़ान 11 अप्रैल को तय की गई है. उल्लेखनीय है कि इंजेन्युटी का प्रयोग मात्र एक मामूली तकनीकी प्रयोग है. खास तौर जिस तरह के प्रयोग पर्सिवियरेंस को मंगल ग्रह पर करने हैं यह प्रयोग उतना अहम नहीं कहा जा सकता है, लेकिन इसकी सफलता आगे बहुत सारे आयाम खोल सकती है. इंजेन्युटी जैसे हेलिकॉप्टर मंगल के कठिन और दुर्गम इलाकों में भी भेजे जा सकते हैं.
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