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मंगल फेंक रहा है पृथ्वी पर धूल, गुरू पर भेजे गए नासा के जूनो यान से हुआ खुलासा

 वैज्ञानिकों को ग्रहों की बीच धूल के बादलों (Dust Clouds) का स्रोत (Mars) के होने के प्रमाण मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

वैज्ञानिकों को ग्रहों की बीच धूल के बादलों (Dust Clouds) का स्रोत (Mars) के होने के प्रमाण मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

नासा (NASA) के जूनो (Juno) यान से दुर्घटनावश पता चला कि मंगल ग्रह (Mars) से निकले धूल के बादल (Dust Clouds) सूर्य का चक्कर लगा रहे हैं और ये पृथ्वी (Earth) के वायुमंडल तक भी पहुंच रहे हैं.

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    नासा (NASA) के जूनो अंतरिक्ष यान (Juno Probe) ने दुर्घटनावश एक अजीब प्रक्रिया का खुलासा किया है. वैसे तो जूनों को गुरू (Jupiter) और उसके आसपास के इलाकों के अवलोकन के लिए भेजा गया है. लेकिन जूनों ने पता लगाया है कि मंगल ग्रह (Mars) से तेजी से चलने वाले धूल के बादलों (Dust Clouds) की हमारे सौरमंडल के पूरे आंतरिक हिस्सों में बारिश हो रही है जिसमें पृथ्वी (Earth) भी शामिल है.

    कैसे पता लगा धूल के बादलों का
    नासा के वैज्ञानिकों का सबसे पहले इस पर तब ध्यान गया जब उन्होंने जूनो के पास कणों की धारा को देखा. पहले उन्होंने इसे जूनों के ईंधन का रिसाव समझा जो जूनो को तारों का अवलोकन करने वाले कैमरों को धुंधला करता लगा. बाद में पता चला कि यह जूनो से टकरा कर छाने वाली धूल है  मंगल ग्रह के कारण आ रही है.

    उपयोगी होगी यह खोज
    यह खोज नासा और दूसरी स्पेस एजेंसीको सौरमंडल में आपने यान की सुरक्षा के लिए मददगार हो सकती है. वैज्ञानिक पहले से ही जानते थे कि धूल के बादल सूर्य का चक्कर लगाते हैं, लेकिन वे यह मान कर चल रहे थे कि ये बादल सुदूर क्षुद्रग्रह या धूमकेतु  से निकलते हैं और धीरे धीरे सौरमंडल के आंतरिक हिस्से में चले आते हैं.

    जूनो के कैमरो से किया अवलोकन
    नासा का नया शोध हाल ही में जियोफिकल रिसर्च: प्लैनेट, जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने जूनो के कैमरा का उपयोग किया और धूल के बादलों के वितरण और प्रक्षेपपथ का अवलोकन कर पाया कि इसके पीछे मंगल ग्रह जिम्मेदार है. उन्होंने पाया कि यह इतनी ज्यादा धूल है कि यह पृथ्वी के वायुमंडल तक में पहुंच रही है.

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    नासा के जूनो यान (Juno Probe) पर धूल के प्रभाव से वैज्ञानिक यह खोज कर सके. (तस्वीर: vNASA)


    खगोलीय धूल से निपटने में सहायक
    राहत की बात यह है कि जूनो और उसके सौर पैनल ठीक हैं जबकि बहुत ही तेजी से आती धूल ने उसने नुकसान पहुंचाने की बहुत कोशिश की. जूनो का अनुभव नासा को भविष्य के लिए सुरक्षित अंतरिक्ष यान बनाने में सहायक हो सकता है. अब नासा बेहतर समझ रहा है कि खगोलीय धूल से कैसे निपटा जा सकता है.

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    खतरनाक हो सकते हैं ये धूल के बादल
    यह जानने के बाद कि यह धूल कहां से और कैसे आ रही है, अंतरिक्ष यान की सुरक्षा काफी ना हो, छोटे महीन कण अंतरिक्ष यानों को गंभीर क्षति पहुंचा सकते हैं. लेकिन इतना तो तय है कि स्पेस एंजेसी अब इस शोध के मद्देनजर ही अपने अगले अभियान मंगल या उसके आगे भेजेंगी.

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    मंगल (Mars) से आई धूल के कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    क्या पता लगा
    वैज्ञानिकों ने पाया है कि ज्यादातर धूल पृथ्वी और क्षुद्र्ग्रह की पट्टी के बीच से आई है जिस पर गुरू ग्रह के गुरुत्वाकर्षण का असर है. अब तक वैज्ञानिक इस धूल के वितरण को नहीं समझ पा रहे थे. वे इसे केवलतारों के बीच के हिस्से की धूल समझ रहे थे. जूनो के वैज्ञानिकों ने यह भी पता लगाया कि यह धूल के बादल पृथ्वी तक आकर ही रुक जाते हैं. क्योंकि उनके पास आते ही पृथ्वी का गुरुत्व उन्हें खींच लेता है.

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    वहीं मंगल के पार गुरू ग्रह के पास गुरू का गुरूत्व इनके लिए व्यवधान का काम करता है. गरुत्व का प्रभाव ही बताता है कि ये धूल भी ग्रहों की तरह सूर्य का एक निश्चित कक्षा में चक्कर लगाती हैं. इनके वितरण की स्थिति ही एक ही निष्कर्ष पर पहुंचाती है कि मंगल ग्रह ही इन धूल के बादलों का स्रोत है.

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