मंगल पर मिले ज्वालामुखी गतिविधि के प्रमाण, बढ़ी जीवन के संकेत मिलने की उम्मीद

मंगल ग्रह (Mars) की ज्वालामुखी घटनाओं के प्रमाण वहां जीवन के संकेत मिलने की आशा पैदा कर रहे हैं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

मंगल ग्रह (Mars) की ज्वालामुखी घटनाओं के प्रमाण वहां जीवन के संकेत मिलने की आशा पैदा कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

मंगल ग्रह (Mars) पर ज्वालामुखी गतिविधियां (Volcanic Acitivity) बताती हैं कि वहां के कुछ हिस्से आइसलैंड (Iceland) के ग्लेशियर ज्लावामुखी वाले इलाके जैसे हैं जहां खास बैक्टीरिया पनपते हैं.

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पिछले कुछ सालों से मंगल ग्रह (Mars) पर शोधों की तादात बहुत बढ़ गई है. नासा (NASA) और दुनिया के अन्य देश मंगल पर अपने अभियान भेज चुके हैं और बहुत से तैयारी में हैं. अमेरिका में तो नासा के अलावा निजी क्षेत्र भी मंगल पर जाने की गंभीरता से तैयारी कर रहा है. हालिया अध्ययन से ऐसे प्रमाण मिले हैं जिनसे पता चलता है कि मंगल ग्रह अब भूगर्भीय (Geologically) और ज्वालमुखी तौर से सक्रिय होता जा रहा है.

ज्वालामुखी गतिविधि के प्रमाण

इस नए अध्ययन में मंगल की सतह पर के ज्वालामुखी लक्षणों का नजदीकी अध्ययन से पता चला है कि इलिशीयम प्लैनिटिया पर जमा लावा हाल ही में जमा था और यह समय करीब 50 हजार साल पहली का ही है. भूगर्भीय समय के पैमाने पर यह एक बहुत ही कम समय है. इसका मतलब यह है कि मंगल हाल ही एक आवासीय ग्रह था क्योंकि इस इलाके हिस्से पृथ्वी के आइसलैंड जैसे ग्लेशियर वाले इलाके की ज्वालामुखी घटनाओं वाले इलाकों जैसे हैं.

जीवन की उम्मीद क्यों
आइसलैंड के ग्लेशियर वाले ज्वालामुखी इलाकों में एक्स्ट्रीमोफाइल बैक्टीरिया पनपते हैं. एरीजोना यूनिवर्सिटी और प्लैनेटरी साइंस इसंटीट्यूट के खगोलविद डेविड होर्वाथ का कहना है कि यह मंगल पर अब तक का खोजा गया सबसे युवा ज्वालामुखी निक्षेप हो सकता है. अगर मंगल के इतिहास को एक ही दिन में समेटा जाएद तो यह पिछले ही सेकंड की घटना होगी.

मंगल के बारे में कई नई बातें

हाल ही में मगंल के बारे में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं जिससे यहां ज्वालामुखी गतिविधि होने के प्रमाण मिले हैं. इसके अलाव यहां सतह के नीचे तरल पानी के होने के प्रमाण भी मिले हैं. मंगल एक बहुत ठंडी जगह है. दो साल पहले एक शोध पत्र में पाया गया था कि पानी के तरल रहने के लिए सतह के नीचे आंतरिक गर्मी बहुत जरूरी है.



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मंगल ग्रह (Mars) पर इस तरह के ताजा ज्वालामुखी निक्षेप पहली बार मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

फिर ये प्रमाण

वहीं पिछले साल एक और शोधपत्र ने यह बताया था कि कैसे मंगल से आए उल्कापिंड में उस ग्रह के मैंटल में ज्वालामुखी संवहन के प्रमाण मौजूद थे. अब सैटेलाइट आंकड़ों का उपयोग करहोर्वाथ की अगुआई में शोधकर्ताओं को नए सुराग का पता चला है. मंगल की भूमध्य रेखा के ठीक उत्तर में इलिशीयम प्लैनिटिया नाम के एक चौड़े सपाट मैदान पर ज्वालामुखी निक्षेप मिले हैं.

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एक रहस्मयी निक्षेप

हार्वाथ का कहना है कि एक एक रहस्यमयी निक्षेप है जो वॉशिंगट डीसी के क्षेत्र से थोड़ा ही बड़ा है. इसमें उच्च उष्मा जड़त्व है और यह उच्च कैल्शियम पायरोजीन खनिज से संपन्न है और इलिशीयम प्लैनिटिया में समान रूप से बिछा हुआ है. यह पृथ्वी के चंद्रमा और बुध ग्रह काले धब्बों के जैसा दिखता है जो विस्फोटक ज्वालामुखी उत्सर्जन की ओर इशारा करते हैं.

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आइसलैंड (Iceland) के ज्वालामुखियों के हालात भी मंगल के इस इलाके से मिलते जुलते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

क्यों खास है यह खोज

मंगल की सतह पर ज्यादातर ज्वालामुखी लक्षण सतह पर बहने वाले लावा के ही दिखाई देते हैं ना कि ज्वालामुखी विस्फोट के लावा के. वहीं विस्फोटक ज्वलामुखी उत्सर्जन के प्रमाण भी अनजान  नहीं हैं. यह खोज दिलचस्प इसलिए है क्योंकि ज्वालामुखी का लावा दूसरों से ऊपर है जिससे पता चलता है कि यह सबसे ताजा है और इसमें लावा और राख भी है.

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तो जीवन की आशा कैसे

ज्वालामुखी विस्फोट के संकेत मंगल पर हालिया जीवन की धुंधली आशा जगाते हैं. वहां वैसा ही जीवन हो सकता है जैसा पृथ्वी की हाइड्रोथर्मल सुरंगों में मिला है जहां बहुत ही ज्यादा ठंडे हालात उबलते गर्म तापमानों से मिलते हैं. ऐसे इलाको में सूक्ष्मजीवन पनपता है जो प्रकाश संश्लेषण पर नहीं बल्कि रासायनिक प्रतिक्रियाओं पर निर्भर होता है. ऐसा जीव पृथ्वी पर आइसलैंड के ग्लेशियर ज्लावामुखी के इलाकों में भी मिला है.

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