कैसे कयामती महाविनाश के बाद हो सकी थी जीवन की वापसी- शोध ने किया खुलासा

पर्मियान युग के अंत में हुआ महाविनाश (Mass Extinction) सबसे घातक था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पर्मियान युग के अंत में हुआ महाविनाश (Mass Extinction) सबसे घातक था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पृथ्वी के इतिहास (History of Earth) पर वैज्ञानिकों ने पहली बार खुलासा किया है कि में कयामती महाविनाश (cataclysmic extinction) के बाद लगभग खत्म हो चुके जीवन (Life) ने कैसे वापसी करने में सफलता पाई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 3:45 PM IST
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पृथ्वी (Earth) पर आज से 6.6 करोड़ साल पहले हुई महाविनाश (Mass Extinction की घटना सबसे प्रसिद्ध मानी जाती है. इसमें डायनासोर के साथ पृथ्वी के 75 प्रतिशत जीवन का नष्ट हो गया था. लेकिन यह उससे भी करोड़ों साल पुरानी उस घटना की तुलना में बहुत छोटी मानी जाती है जिसे द ग्रेट डाइंग (The Great Dying) कहा जाता है. यह कयामती महाविनाश की घटना हजारों साल तक चली जिसमें पृथ्वी पर केवल 5 प्रतिशत जीवन ही बचा था. अब वैज्ञानिकों ने यह पता लगा लिया है कि आखिर यह 5 प्रतिशत जीवन बचने में कैसे सफल रहा और जीवों का विकास चक्र कैसे आगे बढ़ सका.

क्या हुआ था द ग्रेट डाइंग में

द ग्रेट डाइंग वाला महाविनाश  23.2 करोड़ साल पहले पर्मियान युग में हुआ था जिसमें पूरी पृथ्वी में भारी संख्या में ज्वालामुखी विस्फोट हुए थे जिससे एक हजार खरब टन की मात्रा में कार्बन निकल कर पृथ्वी के पूरे वायुमंडल में छा गया था. इससे हजारों सालों तक कयामती जलवायु परिवर्तन हुआ था और पूरी पृथ्वी की केवल पांच प्रतिशत प्रजातियां ही खुद को बचाने में सफल हो पाई थी.

ये उठे सवाल
इस महाविनाश के कारण विभिन्न प्रजातियों के समूहों को एक बार फिर से अपने विकास की शुरुआत करनी पड़ती जिनके उद्भव में लाखों करोड़ों साल लगे थे. ऐसे में यह सवाल उठा कि आखिर जीवन ने इस महाविनाश के  बाद कैसे वापसी की. ऐसे ही सवालों के जवाबों को खोजने के लिए चीन के वुहान की चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ जियोसाइंसेस के शोधकर्ता और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक युआनगेंग हुआंग ने प्रयास किया.

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पर्मियन युग के अंत में सरीसृपों (Reptiles) का बोलबाला था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


जवाबों की तलाश में क्या किया



हुआंग ने पर्मियान और ट्रियासिक कालों में उत्तरी चीन में रही खाद्य शृंखला के 14 समूहों का पता लगाकर फिर से खाद्य जाल का निर्माण किया. डॉ हांग ने बताया कि जीवाश्मों और उसके दांतों और पेट तथा मल में मिले पदार्थों का अध्ययन करने से वे पता कर सके कि किसने क्या खाया था. इससे इन पुराने पारिस्थितिकी तंत्रों की खाद्य शृंखला के बारे में सटीक जानकारी बनाने में मदद मिली.

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खाद्य शृंखला की विविधता

खाद्य शृंखला में घोंगा, पौधे, कीट पतंगे आदि जो तालाबों और नदियों में रहते हैं और इन्हें खाने वाली मछलियां, उभयचर और सरीसृप जीव शामिल रहते हैं. उस युग में सरीसृप बहुत ही विशालकाय हुआ करते थे जिसमें आज की छिपकली से लेकर बहुत बड़े सांप जैसे जीव शामिल थे. ऐसा ही एक जीव कटार के आकार वाले दातों के गोर्गोनोप्सियन प्रजाति थी जो सबसे शीर्ष का शिकारी जीव था. इसकी जगह करोड़ों सालों तक कोई भी नहीं ले सका था.

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पर्मियन युग (Permian Era) खत्म होने के करीब 7 करोड़ साल बाद डायनासोर का विकास हुआ. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


खाद्य जाल से प्रजातियों की छंटाई

इस महाविनाश के बाद पहले डायनासोर और स्तनापायी जीवन 16.5 करोड़ साल पहले आने शुरू हुए. कैलिफोर्निया एकेडमी ऑफ साइंसेस के पीटर रूपनारायन ने बताया कि हुआंग ने उनकी लैब में एक साल का समय बिताया और इकोलॉजिल मॉडलिंग पद्धतियों को लागू कर  खाद्य जाल की स्थायित्व का पता लगाया जिससे शोधकर्ता प्रजातियों को खाद्य जाल से छांट सके.

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शोधकर्ताओं ने पर्मियान काल के अंत  की घटना को दो कारणों से असाधारण बताया. पहला यह कि इसमें विविधता का नाश बहुत ज्यादा गंभीर था जबकि अन्य दो महाविनाशों में अंतकाल आने से पहले स्थायित्व कम था. इसके अलावा पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से खड़ा होने में एक करोड़ साल का समय लगा, जबकि अन्य घटनाओं में सुधार जल्दी हो गया था.
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